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ये हैं दोस्ती पर बनी 5 बेहतरीन फिल्में

Sun, 04 Aug 2013 07:23 AM IST
इंटरनेट डेस्क/नई दिल्ली
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आज फ्रेंडशिप डे है। हिंदी फिल्मों में दोस्ती हमेशा ही एक हिट फॉर्मूला रहा है। दौर कोई भी रहा हो फिल्मकारों ने दोस्ती भुनायी। फिल्मों में दोस्ती का रिश्ता कई बार खून के रिश्ते से भी गाढ़ा दिखाया गया है। हम फिल्मों के बहुत पीछे के पन्ने नहीं पलटेंगे। हम सिर्फ 21वीं सदी की उन बेहतरीन पांच फिल्मों के बारे में बात करेंगे जो दोस्ती के ताने-बाने पर बुनी गई हैं और खूब सफल हुईं।
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दर्शकों को ऐसी फिल्में पसंद आती रही हैं। इसकी वजह साफ है। दोस्ती की इन फिल्मों से दर्शक खुद को आसानी से कनेक्ट कर लेते हैं। जिन किरदारों को वह पर्दे पर साकार होते देख रहे होते हैं कुछ वैसे ही किरदार खुद उनकी जिंदगी में होते हैं। कई बार वह खुद को ही फिल्म का हीरो मान बैठते हैं। चलिए बात करते हैं दोस्ती पर बनीं और सफल रहीं फिल्मों के बारे में,

दिल चाहता है

2001 में रिलीज हुई फरहान अख्तर निर्देशित यह फिल्म अपने समय से आगे की फिल्म माने जाती है। फिल्म का कैनवास दोस्तों के सपनों के साथ उनके आंतरिक टकरावों पर भी फोकस करता है। फिल्म दिखाती है कि विचारों में अंतर होने के बाद भी यह दोस्त एक-दूसरे का नजरिया समझने का प्रयास करते हैं। अपना खुद का नजरिया पीछे करके। इस फिल्म में तीन दोस्तों की भूमिका आमिर खान, सैफ अली खान और अक्षय खन्ना ने निभायी थी।
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रंग दे बंसती

राकेश ओमप्रकाश मेहरा निर्देशित यह फिल्म भी दोस्ती की कहानी को शानदार तरीके से कहती है। देशप्रेम और दोस्ती के पुट के साथ। दिल्ली विवि के पांच छात्र अपनी सामाजिक जवाबदेही निभाते हुए किस तरह से देश की सुर्खियों बन जाते हैं यह फिल्म इसी विषय पर फोकस करती है। आजादी के बैकग्राउंड से जोड़कर बनायी गई यह एक अद्भुत फिल्म है। अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक वर्ग से आने वाले यह दोस्त एक सपने के साथ आगे बढ़ते हैं और टीम बनाकर उसे पूरा करते हैं। आमिर खान की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में शरमन जोशी, माधवन, सिद्घार्थ और अतुल कुलकर्णी ने प्रमुख भूमिका निभायी।

थ्री इडियट्स

दोस्ती और विचारधारा के बदलाव की उम्दा कहानी कहती है थ्री इडियट्स। राजकुमार हिरानी निर्देशित इस फिल्म में एक बार फिर आमिर केंद्रीय भूमिका में होते हैं। उनके साथ काम करने वाले कलाकारों की जोड़ी भी 'रंग दे बसंती' वाली होती है। इंजीनियरिंग कॉलेज के बैकग्राउंड पर बनीं यह फिल्म शिक्षा पद्घति पर बदलावों पर खुला विमर्श करती है। इस फिल्म में तीन दोस्त तीन अलग-अलग तरह की मानसिकताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी विचारधारा को शिक्षा और रोजगार से जोड़कर देखा जाता है।  


जिंदगी न मिलेगी दोबारा

जिंदगी मिलेगी न दोबारा दोस्ती की कहानी कुछ अलग ढंग से कहती है। कहीं-कहीं दार्शनिक हो गई यह फिल्म जीवन में दोस्ती के महत्व को अंडरलाइन करती हुई चलती है। यह फिल्म बताती है कि जीवन में खुद से बात से करना, अपने सपनों से बात करना और अपने दोस्तों से बात करना कितना जरूरी है। फिल्म में फरहान अख्तर, ऋतिक रोशन और अभय देओल ने मुख्य भूमिका है।

काई पो चे

दोस्ती की फिल्मों में अभिषेक कपूर निर्देशित काई पो चे दोस्ती में सपनों के साथ उनके टकरावों की कहानी भी कहती है। लेकिन यह टकराव कही भी इतने बड़े नहीं होते कि वह पूरी दोस्ती को प्रभावित कर दें। यहां तीन दोस्त अलग-अलग सोच वाले होते हैँ बावजूद इसके वह एक-दूसरे से ज्यादा खुद को ज्यादा पसंद करते हैं। सुशांत सिंह और राजकुमार यादव ने मुख्य भूमिका निभाई है।
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