मुशायरे के जरिए फिल्म निर्माता ने किया पसंद
कारोबारी सुगम कपाड़िया जो भोपाल में कुछ नए सिनेमाघरों के मालिक थे, ने फाजली ब्रदर्स को बताया कि भोपाल में कई अच्छे कवि हैं। उन्होंने उन्हें सुझाव दिया कि आप भोपाल आकर मुशायरे में हिस्सा लें और अच्छे कवि या गायक की तलाश करें। फाजली ब्रदर्स सहमत हो गए। 5 मई 1949 को कपाड़िया ने भोपाल टॉकीज में एक मुशायरा आयोजित कराया। कई शायरों के साथ असद भोपाली ने भी इस मुशायरे में हिस्सा लिया और शेर पढ़े। फाजली ब्रदर्स, असद भोपाली के प्रदर्शन से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने असद भोपाली को बॉम्बे बुलाया।
मोहम्मद रफी ने गाया पहला गाना
निर्माताओं के कहने पर असद भोपाली ने फिल्म 'दुनिया (1949)' के लिए दो गाने लिखे। उनके पहले गाने 'रोना है तो चुपके-चुपके' को मोहम्मद रफी ने गाया और 'अरमान लुटे, दिल टूट गया' को सुरैया ने गाया। अगले साल उन्होंने फिल्मों के लिए कुछ और गाने लिखे। इन गानों को लता मंगेशकर और शमशाद बेगम ने गाया था। असद भोपाली को सबसे बड़ा ब्रेक फिल्म 'अफसाना' (1951) में मिला। इस फिल्म के लिए उन्होंने पांच गाने लिखे।
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400 से ज्यादा फिल्मों में लिखे गाने
असद भोपाली ने अपने दौर में कई संगीत निर्देशकों के साथ काम किया। उन्होंने लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की पहली रिलीज हुई फिल्म 'पारसमणि' के लिए मशहूर गाना 'वो जब याद आए, बहुत याद आए' लिखा। उन्होंने म्यूजिक डायरेक्टर उषा खन्ना के साथ काम किया। उन्होंने भोपाली के कई गानों को संगीत दिया। साल 1949 से लेकर 1990 तक असद भोपाली ने 100 से ज्यादा फिल्मों में 400 से ज्यादा गाने लिखे।
सबसे अच्छे गीतकार के लिए पुरस्कार
असद भोपाली का नाम मजरूह सुल्तानपुरी, साहिर लुधियानवी और जां निसार अख्तर जैसे गीतकारों के साथ लिया जाता है। अपने लिखे गानों के जरिए उन्होंने शोहरत कमाई।
असद भोपाली को सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए 1990 में 35वां फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। उन्हें यह पुरस्कार 'मैंने प्यार किया' (1989) के गाने 'दीवाना के लिए' के लिए दिया गया।
असद भोपाली की निजी जिंदगी और परिवार
असद भोपाली ने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी आयशा से उनके दो बेटे (ताज और ताबिश) थे। इसके अलावा उनकी छह बेटियां थीं। उनकी दूसरी पत्नी से उनके बेटे गालिब असद भोपाली थे। गालिब फिल्म लेखक और गीतकार बने। गालिब ने 'भिंडी बाजार' और 'मुंबई मिरर' जैसी फिल्में लिखीं। असद भोपाली के छोटे भाई कमर जमाली भी उर्दू के शायर थे।
असद भोपाली की रचनाएं
असद भोपाली ने फिल्म 'रंगभूमि' के लिए गीत लिखे थे। यह फिल्म उनके निधन के बाद 1992 में रिलीज हुई थी। उनकी कविताओं का एक संग्रह 'रोशनी, धूप, चांदनी' 1995 में भोपाल की उर्दू अकादमी से प्रकाशित किया गया।
असद भोपाली का निधन 9 जून 1990 को भोपाल में हुआ।