सीखने की कोई उम्र नहीं होती। यही वजह है कि 74 वर्ष की उम्र में भी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन फिल्म स्कूल में एडमिशन लेने की ख्वाहिश रखते हैं। वह मानते हैं कि फिल्मों में उनके सीखने के लिए बहुत कुछ बाकी है। अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में अमिताभ ने मन की बात साझा की। आज यह सवाल संभवत: अप्रासंगिक लगे कि अमिताभ क्या कभी किसी फिल्म का निर्देशन करेंगे परंतु पंद्रह-बीस बरस पहले ऐसी खूब अटकलें थीं।
जब अमिताभ से पूछा गया कि क्या वाकई उनके मन में कभी निर्देशक बनने का खयाल था? अमिताभ ने कहा, ‘ऐसा कभी नहीं था क्योंकि निर्देशन का काम मुझे आता ही नहीं। यह बड़ा मुश्किल काम है।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे तो आज भी यह बात समझ नहीं आती कि कोई निर्देशक क्या सोच कर किसी खास एंगिल पर कैमरा रखता है। क्यों कोई खास लोकेशन चुनता है।’
शुक्रवार को बिग बी की नई फिल्म 'तीन' रिलीज हो रही है
अमिताभ बच्चन- फाइल फोटो
इसके बाद उन्होंने मन की बात कही, ‘कई बार मुझे लगा कि विदेश में जाकर किसी फिल्म स्कूल में भर्ती हो जाऊं और सीखूं। आजकल अच्छे-अच्छे कोर्स मिलते हैं जो दो-तीन महीने में ऐक्टिंग का, राइटिंग का, डायरेक्शन का काम और बारीकियां सिखाते हैं। कई बार मैंने इस पर सोचा है।’
-कहा, कभी नहीं सोचा निर्देशक बनने के बारे में
-पिता के जीवन पर फिल्म बनाना मुश्किल काम
क्या अमिताभ सचमुच ऐसा करेंगे? उन्होंने कहा, ‘हां, मैं जरूर करना चाहूंगा। अभी इस धारणा को मैंने अपने मन से पूरी तरह से निकाला नहीं है।’ उल्लेखनीय है कि देश-दुनिया के कुछ विश्वविद्यालय सिनेमा में योगदान के लिए अमिताभ को डॉक्टरेट की उपाधि दे चुके हैं। चार बार उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। शुक्रवार को बिग बी की नई फिल्म तीन रिलीज हो रही है।
पिता हरिवंश राय बच्चन के जीवन पर फिल्म बनाना मुश्किल
अमिताभ
- फोटो : BBC
इन दिनों हिंदी सिनेमा में काफी बायोपिक बन रही हैं। जब अमिताभ से पूछा गया कि क्या आपको कभी लगा कि पिता हरिवंश राय बच्चन के जीवन, उनके किसी कालखंड अथवा विशेष घटनाक्रम पर फिल्म बनाएं? उन्होंने कहा, ‘कई बार सोचा इस बारे में। ईमानदारी से कहूंगा। डर लगता है कि हम वो कर नहीं पाएंगे जो उन्होंने लिखा है।
हममें इतनी प्रबलता नहीं है कि लिखे हुए को दर्शा सकें।’ उन्होंने बताया, ‘जया जी और मैंने कई बार इस पर विचार किया। यह भी लगा कि चलिए किसी एक खंड में से कोई हिस्सा लेकर उसे फिल्मा लें, परंतु नहीं हो सका।’ हरिवंश राय बच्चन ने चार खंडों में आत्मकथा लिखी है, जिसे हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर माना जाता है।
इरफान और नवाजुद्दीन बहुत ही नेचुरल ऐक्टर हैंः अमिताभ
अमिताभ- फाइल फोटो
इरफान और नवाजुद्दीन पर
‘‘दोनों के काम में लगता नहीं कि वे काम कर रहे हैं। बहुत साधारण व्यक्तित्व है दोनों का और वही साधारणता वे अपने काम में लाते हैं। बड़ा कठिन होता है कैमरे के सामने साधारण दिखना। दोनों में यह गुण है। मैं मानता हूं कि उनके साथ काम करते हुए मैं खुद को शिक्षित करता हूं और कहीं न कहीं अपने काम में उसके उपयोग की कोशिश करता हूं। दोनों बहुत नेचुरल ऐक्टर हैं। काम करते हुए अपनी कलागिरी नहीं दिखाते।’’
होम प्रोडक्शन से फिल्म नहीं
‘‘फिल्म निर्माण में अपनी तरफ से हम सौ फीसदी नहीं कर पाते। हमने कोशिश की थी मगर हार गए। अब अगर कोई और प्रोड्यूस करे तो हम उसके साथ होते हैं।’’
ऐक्टिंग से आगे...
-पिछले कुछ वर्षों में कंगना रनौत, इमरान खान, आथिया शेट्टी और सिद्धांत कपूर जैसे ऐक्टरों ने अभिनय के साथ स्क्रिप्ट राइटिंग और निर्देशन की पढ़ाई भी की है। इन सभी ने न्यूयॉर्क फिल्म एकेडमी से कोर्स किए हैं।