अमर उजाला संवाद में राकेश बेदी
- फोटो : अमर उजाला
किस पति के लिए आसान है यह काम?
वहीं कार्यक्रम में जब राकेश बेदी से पूछा गया कि वो दुनिया को अपनी कॉमेडी से खुश रखते हैं। क्या पत्नी भी उनकी कॉमेडी से खुश रहती है? जवाब में बेदी ने कहा,
'कौन से पति के लिए आसान है पत्नी को खुश करना? यह ऐसा कुआं है, जिसे भरते रहो, कभी नहीं भरता। आपको लगता है कि आज मैंने बहुत महंगी साड़ी लाकर दी मूड ठीक हो जाएगा?
मूड ठीक हो जाएगा, लेकिन चार घंटे तक। हां, लेकिन मैं जब ट्रैवल पर होता हूं तो देखता हूं कि दुनिया मेरे जोक पर हंस रही है। मगर, मेरी पत्नी कहती है, 'हुंह क्या बड़ी बात है'। घर पर मेरी हालत घर की मुर्गी दाल बराबर है। दुनिया के लिए 'धुरंधर' हूं, पत्नी के लिए छछूंदर हूं।'
सिर्फ मेरी पत्नी को पता था 'धुरंधर 2' का क्लाइमेक्स
फिल्म 'धुरंधर 2' के क्लाइमेक्स में राकेश बेदी खुद सबसे बड़े जासूस निकलकर सामने आते हैं। इस बारे में बात करते हुए राकेश बेदी ने बताया,
'मैंने 'धुरंधर' का जो बेस है, वह शेयर किया था कि एक स्पाई फिल्म है। इसमें एक रियल घटना है। मगर, ये कि मैं भी फिल्म में जासूस हूं यह बात सिर्फ मेरी पत्नी को पता थी। प्रोडक्शन यूनिट के कुछ लोगों को छोड़कर किसी को यह बात नहीं पता थी।'
बच्चों से भी छिपाकर रखी यह बात
राकेश बेदी ने आगे बताया,
'शुरू में बहुत तकलीफ हुई। आदित्य धर ने बहुत रिक्वेस्ट की थी कि राकेश जी प्लीज इस बारे में किसी को मत बताना। फिर ये भी है कि बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी, इसलिए मैंने अपने बच्चों तक से यह बात छिपाकर रखी। जब हमने इस फिल्म का प्रीमियर देखा तो मेरी दोनों बेटियां दूसरे थिएटर में थीं। जब आखिरी का ये सीन आया तो वो दोनों रो रही थीं। उन्हें गुस्सा आ रहा था कि एक तो हमारा बाप जासूस निकला और हम एक ही घर में रहते हैं और हमें बताया ही नहीं। इतने बड़े क्लाइमेक्स के बारे में नहीं बताया गया।'
अर्जुन रामपाल के बयान पर नहीं आया अहंकार
इवेंट में राकेश बेदी से पूछा गया कि जब अभिनेता अर्जुन रामपाल ने आपसे कहते हैं कि सर आप तो फिल्म में सबको खा गए। तो आपको वो कॉम्प्लीमेंट सुनकर कैसा फील हुआ? जवाब में राकेश बेदी ने कहा,
'नहीं! मुझे कुछ फील नहीं हुआ। अगर खुद पर अहंकार आ जाएगा तो एक शेर है:
शोर नदी का नहीं, आबशार का है
यहां से जो भी सफर है उतार का है
अगर कोई तुमसे ये कहे कि बच्चा है तू मेरा
उससे बचकर रहो, वो आदमी बेकार का है।'
आगे बेदी ने कहा,
'अर्जुन रामपाल ने जो कॉम्प्लीमेंट दिया था, वह अच्छा था पर अब उस पर मेरा दिमाग खराब हो जाए तो बेकार है। आदमी जब अपने काम बार-बार देखता है तो उसे दूसरों के काम नजर आना बंद हो जाता है। वह अपने आप से प्रभावित हो जाता है। मुझे खुद से प्रभावित होने की जरूरत नहीं है। मैंने सात-आठ हजार एपिसोड किए होंगे टेलीविजन पर लेकिन मैंने दोबारा भी नहीं देखा होगा। जो काम कर दिया सो कर दिया।'
अमर उजाला संवाद में राकेश बेदी
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