कहां हो रहा शो का प्रसारण
यह शो 6 जुलाई से शुरू हो चुका है। यह शो दर्शकों को भारत की समृद्ध कृषि, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास करेगा इन अमूल्य खजाने को संरक्षित करने के महत्व के बारे में बताता है। इस शो का प्रसारण दूरदर्शन के प्रमुख चैनल डीडी नेशनल पर हर शनिवार सुबह 11 बजे और इसका पुनः प्रसारण शाम चार बजे हो रहा है। 'अतुल्य भारत की अमूल्य निधियां' का उद्देश्य दर्शकों को एक मनोरंजक और ज्ञानवर्धक अनुभव प्रदान कर रहा है।
2004 में की थी भारत सरकार ने पहल
जीआई टैग या भौगोलिक संकेत टैग एक प्रमाणन है, जो किसी उत्पाद को एक विशिष्ट क्षेत्र से उत्पन्न होने और उस मूल के कारण अद्वितीय गुण या प्रतिष्ठा रखने के का प्रमाण देता है। ये टैग विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक विरासत और पहचान को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जीआई टैग को बढ़ावा देने की पहल भारत सरकार द्वारा 2004 में शुरू की गई थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे काफी गति मिली है। वाणिज्य मंत्रालय के पास एक समर्पित विभाग है, जो जीआई-सत्यापित उत्पादों को पंजीकृत और बढ़ावा देता है, जिसमें 500 से अधिक उत्पाद पहले ही प्रमाणित हो चुके हैं।
शो को लेकर क्या बोले सतीश पांडे
सतीश पांडे अपनी व्यावहारिक और प्रभावशाली कहानी कहने के लिए जाने जाते हैं। वे अपने काम के माध्यम से लगातार महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाते रहे हैं। ‘अतुल्य भारत की अमूल्य निधि’ के साथ सतीश पांडे का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाना और देश के जीआई-सत्यापित उत्पादों के पीछे मेहनत करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करना है। सतीश ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि एक फिल्म निर्माता के रूप में मैं जीआई-टैग किए गए उत्पादों के रूप में भारत की विविधता को प्रदर्शित करने में बहुत गर्व महसूस कर सकता हूं, क्योंकि यह किसी विशेष स्थान से किसी वस्तु को प्रामाणिकता और विकास के कई अवसर प्रदान करता है। भारत सरकार की यह पहल हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण है। इस शो के माध्यम से, हमारा उद्देश्य इन अनूठे उत्पादों के पीछे की कहानियों को उजागर करना और उन किसानों और कारीगरों की कड़ी मेहनत और समर्पण का सम्मान करना है, जिन्होंने इन उत्पादों को देश के कोने-कोने और विदेशों में पहुंचाया है।
कई विशेषज्ञों के साथ होगी चर्चा
‘अतुल्य भारत की अमूल्य निधि’ कृषि उपज से लेकर हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुओं तक भारत के जीआई-टैग किए गए उत्पादों की विविध और समृद्ध विरासत को दर्शा रही है। प्रत्येक एपिसोड में विशेषज्ञों के साथ गहन चर्चाएं हो रही है, जो इन वस्तुओं के इतिहास, महत्व और उत्पादन प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्रदान कर रहे हैं। किसान और उत्पादक अपनी व्यक्तिगत कहानियां, चुनौतियां और जीत भी साझा कर रहे हैं, जिससे दर्शकों को उनके जीवन और उनके काम के महत्व की झलक मिल रही है।