अजय देवगन कहते हैं, 'मैं तब नहा रहा था जब फोन की घंटी बजी। वह लैंडलाइन फोन बाथरूम के नजदीक ही था, तो मैंने शॉवर लेना बीच में रोकर फोन को उठाया। उधर से आवाज आई भट्ट साहब आप से बात करना चाहते हैं'।
बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अजय देवगन इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं। जल्द ही उनकी फिल्म 'औरों में कहां दम था' रिलीज होने वाली है। इस फिल्म में तब्बू के साथ अभिनय करते नजर आने वाले हैं। हाल ही अपनी आगामी फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने महेश भट्ट के संग अपने काम करने के अनुभवों को अपने फैंस के संग साझा किया। साथ ही साथ उन्होंने यह भी बताया कि कैसे बिना पूरी कहानी सुने ही उन्होंने 'जख्म' के लिए हां कर दिया था।
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बिना कहानी सुने किया था फिल्म साइन
अजय देवगन बॉलीवुड को एक से बढ़कर एक हिट दे चुके हैं। वे जब भी किसी रोल को करते हैं उस किरदार को हमेशा के लिए दर्शकों के दिलों में जिंदा कर देते हैं। पिछले दिनों अपने एक इंटरव्यू के दौरान वे फिल्म 'जख्म' के बारे में बातें करते हुए बोले, 'मैंने जब 'जख्म' साइन किया था तब मैंने उस फिल्म की पूरी कहानी सुनी भी नहीं थी। उन दिनों मोबाईल फोन नहीं होते थे। मैं हैदराबाद में शूटिंग कर रहा था'।
नहाते वक्त 'जख्म' के लिए भरी हामी
अजय देवगन अपनी बात जारी रखते हुए कहते हैं, 'मैं तब नहा रहा था जब फोन की घंटी बजी। वह लैंडलाइन फोन बाथरूम के नजदीक ही था, तो मैंने शॉवर लेना बीच में रोकर फोन को उठाया। उधर से आवाज आई भट्ट साहब आप से बात करना चाहते हैं। फिर महेश भट्ट फोन पर आए और उन्होंने कहा मैं अपनी आखिरी फिल्म बना रहा हूं। मैं चाहता हूं कि तुम इस फिल्म में काम करो और वे मुझे स्टोरी सुनाने लगे। मैंने बिना पूरी कहानी सुने हुए ही उनसे कहा कि भट्ट साहब मैं आपकी फिल्म करूंगा, बस अभी मैं नहा रहा हूं'।
शब्दों के पक्के हैं भट्ट साहब
महेश भट्ट ने अपनी बेटी पूजा भट्ट, सोनाली बेंद्रे, अजय देवगन और कुणाल खेमू के संग फिल्म 'जख्म' का निर्माण किया था। यह फिल्म महेश भट्ट की मां के जीवन पर आधारित फिल्म थी। अजय देवगन कहते हैं, 'महेश भट्ट के साथ काम करने का अनुभव बेहद सुखद था। उन्होंने सच में 'जख्म' के बाद किसी और फिल्म को निर्देशित नहीं किया। वे अपनी जबान के पक्के हैं। इस फिल्म में मैंने कहीं कोई एक्टिंग नहीं की है। अगर आप गौर से देखेंगे तो मैं हर दृश्य में सिर्फ मूक दर्शक बनकर देख रहा हूं और फिर भी सभी दृश्य काफी इमोशनल बने हैं। यह भट्ट साहब की खासियत है'।