उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसको लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी भाजपा अपनी सत्ता बचाए रख पाती है या विपक्ष उसके 10 साल के वर्चस्व को खत्म कर देगा। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात सुल्तानपुर जिले की इसौली विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं इसौली विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन्हीं में से एक जिला सुल्तानपुर है। जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें- इसौली, सुल्तानपुर, सदर, लम्भुआ और कादीपुर शामिल हैं। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम इसौली विधानसभा सीट की बात करेंगे। सुल्तानपुर जिले की इसौली विधानसभा सीट मूल रूप से साल 1957 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह विधानसभा क्षेत्र अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ था। यहां साल 1957 में पहला चुनाव हुआ था। यहां के पहले चुनाव में गया बख्श विजयी हुए थे। उन्होंने भारतीय जनसंघ के टिकट पर चुनाव में जीत हासिल की थी।
इसौली विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण
इसौली विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में अनुसूचित जाति (दलित), मुस्लिम, ब्राह्मण, क्षत्रिय (ठाकुर) और यादव समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी अनुसूचित जाति (दलित) मतदाताओं की है, जो लगभग 21% हैं। इसके बाद मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 20% और ब्राह्मण मतदाताओं की आबादी लगभग 19% है, जबकि क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 14% और यादव मतदाताओं की आबादी लगभग 12% है। अन्य प्रमुख वर्गों में कुर्मी समाज के मतदाता लगभग 3% हैं। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
इसौली विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1957 के पहले चुनाव में भारतीय जनसंघ जीती
इसौली विधानसभा सीट के पहले यानी कि साल 1957 के चुनाव में भारतीय जनसंघ ने जीत हासिल की थी। चुनाव में भारतीय जनसंघ के गया बख्श विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राम बली को महज 395 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में गया बख्श को 12,139 वोट, जबकि राम बली को 11,744 वोट मिले।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1962: इसौली में पहली बार जीती कांग्रेस
इस चुनाव में सुल्तानपुर जिले की इसौली विधानसभा सीट से कांग्रेस के राम बली विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ (JS) के गया बख्श को 10,894 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम बली को 17,387 वोट, जबकि गया बख्श को 6,493 वोट मिले।
कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत
इसके बाद 1967 के चुनाव हुए। इस चुनाव में इसौली विधानसभा सीट से कांग्रेस ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के आर. बी. मिश्रा विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के अमरपाल को 12,356 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आर. बी. मिश्रा को 18,981 वोट, जबकि अमरपाल को 6,625 वोट मिले।
1969: भारतीय क्रांति दल ने पहली बार जीती इसौली सीट
इस चुनाव में इसौली सीट पर पहली बार भारतीय क्रांति दल (BKD) ने जीत दर्ज की। चुनाव में राम जियावन विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राम बली मिश्रा को 11,410 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम जियावन को 18,558 वोट, जबकि राम बली मिश्रा को 7,148 वोट मिले।
1974: कांग्रेस की हुई वापसी
1969 के चुनाव के बाद राज्य में 1974 के चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में इसौली विधानसभा सीट से कांग्रेस के अंबिका प्रसाद सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ (BJS) के राम बरन वर्मा को 6,188 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अंबिका प्रसाद सिंह को 12,734 वोट, जबकि राम बरन वर्मा को 6,546 वोट मिले।
आपातकाल का समय और 1977 का सियासी बदलाव
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी।
सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।
1977: पहली बार जीती जनता पार्टी
आपातकाल के बाद 1977 में फिर से चुनाव हुआ। इसमें पहली बार जनता पार्टी (JNP) के राम बरन वर्मा विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के अंबिका प्रसाद सिंह को 6,627 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम बरन वर्मा को 16,029 वोट, जबकि अंबिका प्रसाद सिंह को 9,402 वोट मिले।
हालांकि, उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1980 के चुनाव में कांग्रेस (आई) ने मारी बाजी
इस चुनाव में कांग्रेस (आई) के श्रीपत मिश्रा विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर-राजनारायण) के राम बरन वर्मा को 1,895 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्रीपत मिश्रा को 11,410 वोट, जबकि राम बरन वर्मा को 9,515 वोट मिले।
1985: कांग्रेस ने फिर दोहराई जीत
1980 के बाद 1985 के चुनाव हुए। इस चुनाव में इसौली विधानसभा सीट से कांग्रेस के जय नारायण तिवारी विजयी हुए। उन्होंने लोकदल के राम बरन वर्मा को 10,623 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जय नारायण तिवारी को 23,264 वोट, जबकि राम बरन वर्मा को 12,641 वोट मिले।
1989: इसौली में पहली बार जीता जनता दल
साल 1989 के चुनाव में सुल्तानपुर जिले की इसौली विधानसभा सीट पर पहली बार जनता दल ने जीत दर्ज की। चुनाव में जनता दल के इंद्र भद्र विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के जय नारायण को 3,198 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इंद्र भद्र को 35,188 वोट, जबकि जय नारायण को 31,990 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के मुनीर अहमद 6,153 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
इन चुनावों के बाद राज्य में राजनीतिक अस्थिरता के चलते साल 1991, 1993 और 1996 के चुनाव हुए। इस दौरान सीट का समीकरण बदलता रहा।
1991: इसौली विधानसभा सीट पर हुई भाजपा की पहली जीत
साल 1991 में इसौली विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा के ओम प्रकाश पांडेय विजयी हुए। उन्होंने जनता दल के इंद्र भद्र को 6,043 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में ओम प्रकाश पांडेय को 24,203 वोट, जबकि इंद्र भद्र को 18,160 वोट मिले।
1993 में निर्दलीय उम्मीदवार ने मारी बाजी
इस चुनाव में इसौली विधानसभा सीट से निर्दलीय इंद्र भद्र सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के ओम प्रकाश पांडेय को 11,224 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इंद्र भद्र सिंह को 39,280 वोट, जबकि ओम प्रकाश पांडेय को 28,056 वोट मिले।
1996: पहली बार जीती बसपा
साल 1996 के यूपी विधानसभा चुनाव में इसौली विधानसभा सीट पर पहली बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा प्रत्याशी जय नारायण तिवारी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के ओम प्रकाश पांडे को 4,409 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जय नारायण तिवारी को 31,884 वोट, जबकि ओम प्रकाश पांडे को 27,475 वोट मिले।
2002: इसौली सीट पर सपा के दबदबे की शुरुआत
साल 2002 के चुनाव में इसौली विधानसभा सीट का समीकरण एक बार फिर बदला। चुनाव में पहली बार समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर जीत दर्ज की। यहां सपा के चंद्र भद्र सिंह विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के कामिल फारूख को 25,561 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में चंद्र भद्र सिंह को 53,270 वोट, जबकि कामिल फारूख को 27,709 वोट मिले।
2007: सपा ने दोहराई जीत
2007 के यूपी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के चंद्र भद्र सिंह ने लगातार दूसरी बार इसौली सीट जीती। इस बार उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के कृष्ण कुमार उर्फ कक्कू पांडेय को 4,438 वोटों से हराया। चुनाव में चंद्र भद्र सिंह को 53,911 वोट, जबकि कृष्ण कुमार को 49,473 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के अवधेश प्रताप सिंह 8,794 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 का नतीजा
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2012: सपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इसौली सीट पर जीत की हैट्रिक लगाई। चुनाव में सपा की तरफ से प्रत्याशी बनाए गए अबरार अहमद विजयी हुए। उन्होंने पीस पार्टी के यश भद्र सिंह (मोनू) को 13,941 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अबरार अहमद को 48,813 वोट, जबकि यश भद्र सिंह को 34,872 वोट मिले। वहीं, निर्दलीय कृष्ण कुमार 25,081 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2017: सपा ने लगाया जीत का चौका
इसके बाद राज्य में 2017 के चुनाव हुए। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने लगातार चौथी जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के अबरार अहमद विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के ओम प्रकाश पांडेय उर्फ बजरंगी को 4,241 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अबरार अहमद को 51,583 वोट, जबकि ओम प्रकाश पांडेय को 47,342 वोट मिले। वहीं, राष्ट्रीय लोक दल के यश भद्र सिंह उर्फ मोनू 43,026 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022: सपा ने दर्ज की लगातार पांचवीं जीत
2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इसौली में लगातार पांचवीं जीत दर्ज की। चुनाव में मोहम्मद ताहिर खान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के ओम प्रकाश पांडेय को महज 269 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोहम्मद ताहिर खान को 69,629 वोट, जबकि ओम प्रकाश पांडेय को 69,360 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के यश भद्र सिंह 54,119 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।