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सीट का समीकरण: गोसाईंगंज में अब तक तीन चुनाव, दो रहे सपा नाम, एक बार जीती भाजपा; ऐसा है यहां का सियासी इतिहास

Thu, 22 Oct 2026 06:43 AM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

अयोध्या जिले की गोसाईंगंज विधानसभा सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। यहां 2012 में पहला चुनाव हुआ था। इस सीट पर अब तक तीन चुनाव हुए हैं, और इन चुनावों में दो बार समाजवादी पार्टी और एक बार भाजपा ने जीत दर्ज की है। आइए इस विधानसभा सीट के बारे में विस्तार से जानते हैं...
 
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गोसाईंगंज सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों को लेकर अभी से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पक्ष और विपक्ष दोनों मतदाताओं को लुभाने में लग गए हैं। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास, सामाजिक ताने-बाने और उसके राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात अयोध्या जिले की गोसाईंगंज विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास क्या रहा है।
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पहले जानते हैं गोसाईंगंज विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन्हीं में से एक जिला अयोध्या है। जिले में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें- अयोध्या, बीकापुर, गोसाईंगंज, मिल्कीपुर (SC) और रुदौली शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम गोसाईंगंज विधानसभा सीट की बात करेंगे। अयोध्या जिले की गोसाईंगंज विधानसभा सीट मूल रूप से साल 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। यहां साल 2012 में पहला चुनाव हुआ था। यहां के पहले चुनाव में अभय सिंह विजयी हुए थे। उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव में जीत हासिल की थी।

गोसाईंगंज विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण
गोसाईंगंज विधानसभा सीट के जातीय समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में दलित (एससी), ब्राह्मण, वर्मा (कुर्मी), निषाद और वैश्य समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी दलित मतदाताओं की है, जो लगभग 20% हैं। इसके बाद ब्राह्मण मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 17%, वर्मा (कुर्मी) समाज की आबादी लगभग 11% और निषाद मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 11% है, जबकि वैश्य समुदाय के मतदाताओं की आबादी लगभग 8% है।

अन्य प्रमुख वर्गों में क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाता करीब 7%, यादव समाज लगभग 7%, मुस्लिम समुदाय करीब 7% और चौहान समाज लगभग 3% हैं। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।  

कब-किस पार्टी को मिली जीत? - फोटो : अमर उजाला
गोसाईंगंज विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास

गोसाईंगंज सीट पर अब तक तीन चुनाव, दो बार सपा ने जीती बाजी
गोसाईंगंज विधानसभा सीट के पहले यानी कि 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के अभय सिंह विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी को 58,681 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में अभय सिंह को 1,22,235 वोट, जबकि इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी को 63,554 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के सीताराम निषाद 7,463 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2017 में भाजपा ने जीती गोसाईंगंज विधानसभा सीट
इसके बाद राज्य में 2017 के चुनाव हुए। इस चुनाव से पहले इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी बसपा से भाजपा में शामिल हो गए और इस चुनाव में गोसाईंगंज विधानसभा सीट से भाजपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया। चुनाव में इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अभय सिंह को 11,620 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी को 89,586 वोट, जबकि अभय सिंह को 77,966 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के धर्मराज निषाद 46,528 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2022 में सपा की वापसी
हालांकि 2022 के चुनाव में सपा ने गोसाईंगंज विधानसभा सीट पर वापसी की। चुनाव में समाजवादी पार्टी के अभय सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की आरती तिवारी को 13,079 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अभय सिंह को 1,05,863 वोट, जबकि आरती तिवारी को 92,784 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के राम सागर 37,271 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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