उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। भले ही चुनाव में अभी कुछ समय हो, लेकिन राज्य के हर जिले और चौपाल पर राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। भाजपा जहां अपनी सरकार को बरकरार रखने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन के लिए नए समीकरण बनाने में जुटा है। उत्तर प्रदेश की चुनावी हलचल के बीच हम आपको प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात सुल्तानपुर जिले की सुल्तानपुर विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास क्या रहा है।
पहले जानते हैं सुल्तानपुर विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन्हीं में से एक जिला सुल्तानपुर है। जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें- इसौली, सुल्तानपुर, सदर, लम्भुआ और कादीपुर शामिल हैं। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम सुल्तानपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। सुल्तानपुर जिले की सुल्तानपुर विधानसभा सीट मूल रूप से साल 1957 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह विधानसभा क्षेत्र अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ था। यहां साल 1957 में पहला चुनाव हुआ था। यहां के पहले विधायक कुंवर कृष्ण बने थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव में जीत हासिल की थी।
सुल्तानपुर विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण
सुल्तानपुर विधानसभा सीट के जातीय समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, ब्राह्मण, अनुसूचित जाति (दलित), क्षत्रिय (ठाकुर) और यादव समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 22% हैं। इसके बाद ब्राह्मण मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 17% और अनुसूचित जाति (दलित) मतदाताओं की आबादी भी लगभग 17% है, जबकि क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 11% और यादव मतदाताओं की आबादी लगभग 9% है। अन्य प्रमुख वर्गों में कुर्मी समाज के मतदाता लगभग 3% हैं। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
सुल्तानपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
कांग्रेस के दबदबे के साथ शुरुआत
सुल्तानपुर विधानसभा सीट के पहले यानी कि साल 1957 के चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। चुनाव में कांग्रेस के कुंवर कृष्ण विजयी हुए। उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (PSP) के मकबूल खान को 3,494 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में कुंवर कृष्ण को 15,969 वोट, जबकि मकबूल खान को 12,475 वोट मिले।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1962: कांग्रेस ने दोहराई जीत
वहीं 1962 के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर सुल्तानपुर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के अब्दुल सामी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के राम प्यारे शुक्ला को 542 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अब्दुल सामी को 12,588 वोट, जबकि राम प्यारे शुक्ला को 12,046 वोट मिले।
1967 में पहली बार जीता भारतीय जनसंघ
इस चुनाव में सुल्तानपुर विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनसंघ ने जीत दर्ज की। चुनाव में आर. पी. शुक्ला विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के अब्दुल सामी को 7,167 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आर. पी. शुक्ला को 21,348 वोट, जबकि अब्दुल सामी को 14,181 वोट मिले।
1969: भारतीय जनसंघ की लगातार दूसरी जीत
इसके बाद साल 1969 के चुनाव हुए। इस चुनाव में भारतीय जनसंघ के राम प्यारे शुक्ला ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के मकबूल हुसैन खान को 3,590 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम प्यारे शुक्ला को 25,756 वोट, जबकि मकबूल हुसैन खान को 22,166 वोट मिले।
भारतीय जनसंघ ने लगाई जीत की हैट्रिक
वहीं साल 1974 के चुनाव में इस सीट पर भारतीय जनसंघ का दबदबा रहा। चुनाव में भारतीय जनसंघ (BJS) के जितेंद्र कुमार विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस (INC) के मोहम्मद अमीन को 2,785 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जितेंद्र कुमार को 22,151 वोट, जबकि मोहम्मद अमीन को 19,366 वोट मिले।
आपातकाल का समय
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी।
सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1977 : सुल्तापुर में पहली बार जनता पार्टी ने मारी बाजी
इस चुनाव में पहली बार सुल्तानपुर विधानसभा सीट पर जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में जनता पार्टी के जितेंद्र कुमार अग्रवाल विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के मोहम्मद जमान को 14,719 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जितेंद्र कुमार अग्रवाल को 24,962 वोट, जबकि मोहम्मद जमान को 10,243 वोट मिले।
1980: कांग्रेस ने की वापसी
इस चुनाव में 1962 के बाद कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में कांग्रेस (आई) के मोइद अहमद विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गोकुल प्रसाद पाठक को 12,538 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोइद अहमद को 22,364 वोट, जबकि गोकुल प्रसाद पाठक को 9,826 वोट मिले।
1985: लगातार दूसरी बार जीती कांग्रेस
इसके बाद राज्य में 1985 के चुनाव हुए। चुनाव में कांग्रेस के मोइद अहमद लगातार दूसरी बार विजयी हुए। उन्होंने लोकदल के शाहिद अशफाक अहमद खान को 6,691 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोइद अहमद को 23,888 वोट, जबकि शाहिद अशफाक अहमद खान को 17,197 वोट मिले।
1989: कांग्रेस ने लगाई जीत की हैट्रिक
1989 के चुनाव में कांग्रेस के मोइद अहमद ने लगातार तीसरी बार सुल्तानपुर सीट जीती। इस बार उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के जितेंद्र कुमार अग्रवाल को 3,900 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोइद अहमद को 30,376 वोट, जबकि जितेंद्र कुमार अग्रवाल को 26,476 वोट मिले।
इन चुनावों के बाद राज्य में राजनीतिक अस्थिरता के चलते साल 1991, 1993 और 1996 के चुनाव हुए। इस दौरान सुल्तानपुर सीट का समीकरण बदलता रहा।
1991: पहली बार जीती भाजपा
इस चुनाव में सुल्तानपुर सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा की तरफ से प्रत्याशी बनाए गए राम प्यारे शुक्ला विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के जफर को 9,473 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम प्यारे शुक्ला को 32,748 वोट, जबकि जफर को 23,275 वोट मिले।
1993: सुल्तानपुर सीट पर हुई समाजवादी पार्टी की एंट्री
इसके बाद राज्य में 1993 का चुनाव हुआ। इस चुनाव में सुल्तानपुर विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा प्रत्याशी बरकत अली खान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राम प्यारे शुक्ला को 13,707 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बरकत अली खान को 57,248 वोट, जबकि राम प्यारे शुक्ला को 43,541 वोट मिले।
1996: भाजपा ने की वापसी
1996 में फिर से चुनाव हुए। इस बार भाजपा ने सुल्तानपुर विधानसभा सीट पर वापसी की। चुनाव में भाजपा के सूर्यभान विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के सफदर रजा को 9,018 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सूर्यभान को 49,439 वोट, जबकि सफदर रजा को 40,421 वोट मिले।
2002: भाजपा ने दोहराई जीत
इस चुनाव में भाजपा ने अपने दबदबे को बरकरार रखते हुए इस सीट पर लगातार दूसरी जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा के ओम प्रकाश पांडेय विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के मोइद अहमद को 5,186 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में ओम प्रकाश पांडेय को 29,126 वोट, जबकि मोइद अहमद को 23,940 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी (SP) के मलिक जहीन 23,920 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2007: सुल्तानपुर सीट पर सपा ने की वापसी
इस चुनाव में सुल्तानपुर विधानसभा सीट पर सपा ने वापसी की। चुनाव में समाजवादी पार्टी के अनूप संडा विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के ओम प्रकाश पांडेय को 4,751 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अनूप संडा को 29,504 वोट, जबकि ओम प्रकाश पांडेय को 24,753 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के मुईद अहमद 23,892 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 का नतीजा
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2012: सपा ने लगातार दूसरी बार जीती सीट
वहीं 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के अनूप संडा ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद ताहिर खान को 6,812 वोटों के अंतर से हराया। अनूप संडा को 57,811 वोट, जबकि मोहम्मद ताहिर खान को 50,999 वोट मिले। वहीं, पीस पार्टी के चंद्र भद्र सिंह 32,457 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2017: सुल्तानपुर सीट पर एक बार फिर भाजपा की हुई वापसी
इस चुनाव के बाद राज्य में 2017 के चुनाव हुए। इस चुनाव में यूपी की सुल्तानपुर विधानसभा सीट से भाजपा के सूर्यभान सिंह विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के मुजीब अहमद को 32,393 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सूर्यभान सिंह को 86,786 वोट, जबकि मुजीब अहमद को 54,393 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी के अनूप संडा 53,238 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 के चुनाव में भाजपा ने दोहराई जीत
इस चुनाव में सुल्तानपुर सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी विनोद सिंह विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अनूप संडा को 1,009 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विनोद सिंह को 92,715 वोट, जबकि अनूप संडा को 91,706 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (BSP) के डॉ. देवी सहाय मिश्रा 22,521 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।