उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इन चुनावों को लेकर अभी से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पक्ष और विपक्ष दोनों मतदाताओं को लुभाने में लग गए हैं। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास, सामाजिक ताने-बाने और उसके राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात रामपुर जिले की बिलासपुर विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास क्या रहा है।
पहले जानते हैं बिलासपुर सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले और 403 विधानसभा सीटें हैं। रामपुर जिला पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित है। जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। इनमें- रामपुर, चमरौआ, बिलासपुर, स्वार और मिलक शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज बिलासपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। रामपुर जिले की बिलासपुर विधानसभा सीट 1964 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर पहला विधानसभा चुनाव साल 1967 में हुआ था। बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के पहले चुनाव में स्वतंत्र पार्टी के एम. लाल विधायक चुने गए थे।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
बिलासपुर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
बिलासपुर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, कुर्मी, एससी और सिख आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। अगर जातिगत आंकड़ों पर नजर डालें तो क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 21% हैं। इसके बाद कुर्मी मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 15% और अनुसूचित जाति (एससी) मतदाताओं की संख्या करीब 12% है। वहीं सिख मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 7%, वैश्य मतदाताओं की करीब 6%, और मौर्य तथा लोधी मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 4.5% है। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों और समुदायों से आते हैं।
बिलासपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1967: पहले चुनाव में स्वतंत्र पार्टी ने दर्ज की जीत
बिलासपुर के पहले यानी कि साल 1967 के विधानसभा चुनाव में स्वतंत्र पार्टी उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। चुनाव में स्वतंत्र पार्टी के एम. लाल विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एस लाल को हराया। चुनाव में एम लाल को 24,971 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के एस लाल को 20,756 वोट प्राप्त हुए।
1969: पहली बार जीती कांग्रेस
इस चुनाव में बिलासपुर सीट पर पहली बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के चंचल सिंह विजयी हुए। उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सोहन लाल को हराया। चुनाव मे चंचल सिंह को 22,347 वोट मिले, जबकि सोहन लाल को 21,231 वोट मिले। इस दौरान जीत का अंतर 1,116 वोट था।
1974: भारतीय क्रांति दल ने मारी बाजी
इस चुनाव में बिलासपुर सीट पर पहली बार भारतीय क्रांति दल ने जीत दर्ज की। चुनाव में भारतीय क्रांति दल के सोहन लाल विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के चंचल सिंह को 24,241 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में सोहन लाल को 45,347 वोट मिले, जबकि चंचल सिंह को 21,106 वोट प्राप्त हुए।
1977: जनता पार्टी ने दर्ज की पहली जीत
ये चुनाव आपातकाल के बाद हुए थे। देशभर में कांग्रेस को राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ा और जनता पार्टी ने केंद्र में सरकार बनाई। उत्तर प्रदेश में भी जनता पार्टी को बड़ी सफलता मिली। इसका असर बिलासपुर सीट पर भी पड़ा। चुनाव में बिलासपुर सीट पर जनता पार्टी के सोहन लाल विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के चंचल सिंह को 4,200 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सोहन लाल को 31,204 वोट मिले, जबकि चंचल सिंह को 27,004 वोट प्राप्त हुए।
1980: बदल गए जीत हार के चेहरे
इस चुनाव में कांग्रेस (इंदिरा) के चंचल सिंह ने बिलासपुर सीट पर जीत दर्ज की। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के सोहन लाल को 10,742 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में चंचल सिंह को 28,168 वोट मिले, जबकि सोहन लाल को 17,426 वोट प्राप्त हुए।
1985: कांग्रेस ने फिर दर्ज की जीत
1985 के विधानसभा चुनाव बिलासपुर सीट पर कांग्रेस ने फिर से जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के दलजीत सिंह विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार सोहन लाल को 4,176 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दलजीत सिंह को 19,433 वोट मिले, जबकि सोहन लाल को 15,257 वोट मिले
1989: निर्दलीय अनिल कुमार ने दर्ज की जीत
इस चुनाव में बिलासपुर सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार अनिल कुमार विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के दलजीत सिंह को 10,045 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अनिल कुमार को 34,874 वोट मिले, जबकि दलजीत सिंह को 24,829 वोट प्राप्त हुए।
1991: पहली बार जीती भाजपा
1991 के विधानसभा चुनाव में बिलासपुर सीट पर पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा के ज्वाला प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने जनता दल के ज्ञानी हरिंदर सिंह को 5,058 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में ज्वाला प्रसाद को 29,074 वोट मिले, जबकि हरिंदर सिंह को 24,016 वोट प्राप्त हुए।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
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1993: बिलासपुर में पहली बार जीती समाजवादी पार्टी
इस चुनाव में बिलासपुर सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के हरेंद्र सिंह ने जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा के ज्वाला प्रसाद को 11,497 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हरेंद्र सिंह को 52,883 वोट मिले, जबकि ज्वाला प्रसाद को 41,386 वोट प्राप्त हुए।
1996: कांग्रेस ने एक बार फिर की वापसी
1996 के विधानसभा चुनाव में बिलासपुर सीट पर कांग्रेस ने एक बार फिर वापसी की। चुनाव में कांग्रेस के काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां ने जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के ज्वाला प्रसाद को 17,588 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में काजिम अली खान को 82,211 वोट मिले, जबकि ज्वाला प्रसाद को 64,623 वोट प्राप्त हुए।
2002: बिलासपुर में सपा ने की वापसी
इस चुनाव में बिलासपुर सीट पर समाजवादी पार्टी ने वापसी की। चुनाव में सपा की बीना भारद्वाज विजयी हुईं। उन्होंने कांग्रेस के संजय कपूर को 20,410 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बीना भारद्वाज को 56,179 वोट मिले, जबकि संजय कपूर को 35,769 वोट प्राप्त हुए।
2007: कांग्रेस ने फिर की वापसी
2007 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के संजय कपूर ने बिलासपुर सीट पर जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा के ज्वाला प्रसाद को 722 वोटों के बेहद कम अंतर से हराया। चुनाव में संजय कपूर को 35,040 वोट मिले, जबकि ज्वाला प्रसाद को 34,318 वोट प्राप्त हुए।
2012: कांग्रेस ने दोहराई जीत
इस चुनाव में कांग्रेस ने संजय कपूर को फिर उम्मीदवार बनाया। उन्होंने समाजवादी पार्टी की बीना भारद्वाज को 10,177 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में संजय कपूर को 52,818 वोट मिले, जबकि बीना भारद्वाज को 42,641 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ संजय कपूर लगातार दूसरी बार बिलासपुर से विधायक बने।
2022 का नतीजा
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2017: 1991 के बाद भाजपा ने की वापसी
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के बलदेव सिंह औलख विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के संजय कपूर को 22,359 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में औलख को 99,100 वोट मिले, जबकि संजय कपूर को 76,741 वोट प्राप्त हुए। वहीं बहुजन समाज पार्टी के प्रदीप कुमार 39,344 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022: भाजपा ने सिर्फ 307 वोटों से बचाई सीट
2022 के विधानसभा चुनाव में बलदेव सिंह औलख ने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में दोबारा जीत दर्ज की, लेकिन इस बार मुकाबला बेहद करीबी रहा। चुनाव में उन्हें 1,01,998 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के अमरजीत सिंह को 1,01,691 वोट प्राप्त हुए। इस तरह औलख केवल 307 वोटों के अंतर से विजयी हुए। इसके अलावा, बसपा के रामऔतार कश्यप को 18,870 वोट और कांग्रेस के संजय कपूर को 9,814 वोट प्राप्त हुए।