उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसको लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यूपी की सभी 403 सीटों पर चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी भाजपा अपनी सत्ता बचाए रख पाती है या विपक्ष उसके 10 साल के वर्चस्व को खत्म कर देगा। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात मुरादाबाद जिले की मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
सबसे पहले जानते हैं मुरादाबाद ग्रामीण सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले और 403 विधानसभा सीटें हैं। मुरादाबाद जिला पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित है। जिले में छह विधानसभा क्षेत्र हैं- कांठ, ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद ग्रामीण, मुरादाबाद नगर, कुंदरकी और बिलारी। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट की बात करेंगे। मुरादाबाद जिले की मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट साल 1957 में अस्तित्व में आई थी। इस क्षेत्र में पहला विधानसभा चुनाव भी वर्ष 1957 में आयोजित किया गया था। इस विधानसभा क्षेत्र के पहले विधायक खमानी सिंह बने थे, जिन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
पहले चुनाव में निर्दलीय खमानी सिंह ने दर्ज की जीत
1957 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद ग्रामीण सीट से निर्दलीय उम्मीदवार खमानी सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के दौ दयाल खन्ना को 196 वोटों के बेहद कम अंतर से हराया। चुनाव में खमानी सिंह को 13,467 वोट मिले, जबकि दौ दयाल खन्ना को 13,271 वोट प्राप्त हुए।
1962: पहली बार जीती प्रजा सोशलिस्ट पार्टी
इस चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रियासत हुसैन ने जीत दर्ज की। चुनाव में उन्हें 13,204 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के शिव शंकर त्रिवेदी को 9,995 वोट प्राप्त हुए। रियासत हुसैन ने 3,209 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।
1967: पहली बार जीती कांग्रेस
इस चुनाव में कांग्रेस के के. सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के एम. पी. सिंह को 1,538 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में कांग्रेस के के. सिंह को 13,238 वोट मिले, जबकि जनसंघ के एम. पी. सिंह को 11,700 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ कांग्रेस ने सीट पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की।
1969: प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने की वापसी
1969 के विधानसभा चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रियासत हुसैन ने एक बार फिर जीत हासिल की। उन्होंने भारतीय क्रांति दल के कृष्ण सेन को 8,497 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रियासत हुसैन को 20,972 वोट मिले, जबकि कृष्ण सेन को 12,475 वोट प्राप्त हुए।
1974: निर्दलीय ओम प्रकाश ने दर्ज की बड़ी जीत
इस चुनाव में मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ओम प्रकाश विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के रियासत हुसैन को 17,092 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में ओम प्रकाश को 41,668 वोट मिले, जबकि रियासत हुसैन को 24,576 वोट प्राप्त हुए।
1977: एक बार फिर निर्दलीय उम्मीदवार ने दर्ज की जीत
1977 के विधानसभा चुनाव देश में आपातकाल के बाद हुए थे। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा और जनता पार्टी ने केंद्र में सरकार बनाई। उत्तर प्रदेश में भी जनता पार्टी को बड़ी सफलता मिली। हालांकि, मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर जीत जनता पार्टी के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार रियासत हुसैन के खाते में गई। चुनाव में रियासत हुसैन को 16,557 वोट मिले, जबकि जनता पार्टी के ओम प्रकाश को 15,338 वोट प्राप्त हुए। इस तरह उन्होंने 1,219 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
1980: निर्दलीय उम्मीदवार ने लगाई जीत की हैट्रिक
1980 के विधानसभा चुनाव में भी रियासत हुसैन ने जीत का सिलसिला जारी रखा। इस बार वे एक बार फिर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में थे। चुनाव में उन्हें 15,689 वोट मिले, जबकि कांग्रेस (अर्स) के शब्बीर को 9,970 वोट प्राप्त हुए। रियासत हुसैन ने 5,719 वोटों के अंतर से चुनाव में जीत हासिल की।
1985: मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर पहली बार जीती लोकदल
इस चुनाव में लोकदल के मोहम्मद रिजवानुल हक ने मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर जीत दर्ज की। उन्होंने जनता पार्टी के रियासत हुसैन को 5,515 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोहम्मद रिजवानुल हक को 23,622 वोट मिले, जबकि रियासत हुसैन को 18,107 वोट प्राप्त हुए।
1989: दल बदलकर जीते रिजवानुल हक
1989 के विधानसभा चुनाव में मोहम्मद रिजवानुल हक जनता दल के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे और जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के कुबेर पाल सिंह को बेहद करीबी मुकाबले में हराया। चुनाव में मोहम्मद रिजवानुल हक को 25,268 वोट मिले, जबकि कुबेर पाल सिंह को 24,675 वोट प्राप्त हुए। जीत का अंतर सिर्फ 593 वोट रहा।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
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1991: हक ने लगाई जीत की हैट्रिक
1991 के विधानसभा चुनाव में जनता दल के मोहम्मद रिजवानुल हक एक बार फिर विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के शिव कुमार सिंह को 5,217 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोहम्मद रिजवानुल हक को 31,787 वोट मिले, जबकि शिव कुमार सिंह को 26,570 वोट प्राप्त हुए।
1993: भाजपा ने पहली बार दर्ज की जीत
1993 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की। चुनाव में भाजपा के सुरेश प्रताप सिंह विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के सोलत अली को 12,733 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सुरेश प्रताप सिंह को 56,098 वोट मिले, जबकि सपा के सोलत अली को 43,365 वोट प्राप्त हुए।
1996: मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर पहली बार जीती समाजवादी पार्टी
इस चुनाव में मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के सोलत अली ने जीत दर्ज की। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार मोहम्मद रिजवानुल हक को 1,978 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सोलत अली को 49,327 वोट मिले, जबकि मोहम्मद रिजवानुल हक को 47,349 वोट प्राप्त हुए।
2002: मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर कांग्रेस ने की वापसी
2002 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर वापसी की। चुनाव में कांग्रेस के शमीमुल हक विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के सोलत अली को 14,917 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शमीमुल हक को 52,367 वोट मिले, जबकि सोलत अली को 37,450 वोट प्राप्त हुए।
2007: समाजवादी पार्टी ने की वापसी
2007 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के उस्मानुल हक विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के रामवीर सिंह को 3,160 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में उस्मानुल हक को 49,194 वोट मिले, जबकि रामवीर सिंह को 46,034 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ सपा ने मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर अपनी स्थिति मजबूत की।
2012: सपा ने दोहराई जीत
2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के शमीमुल हक ने जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा के सुरेश चंद्र सैनी को 22,736 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शमीमुल हक को 72,213 वोट मिले, जबकि सुरेश चंद्र सैनी को 49,477 वोट प्राप्त हुए।
2022 का नतीजा
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2017: सपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के हाजी इकराम कुरैशी ने जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के हरिओम शर्मा को 28,781 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हाजी इकराम कुरैशी को 97,916 वोट मिले, जबकि हरिओम शर्मा को 69,135 वोट प्राप्त हुए। वहीं राष्ट्रीय लोकदल के मोहम्मद कमरानुल हक 23,404 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में सपा ने लगातार तीसरी बार मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर जीत हासिल की।
2022: सपा ने सीट पर जीत का सिलसिला रखा बरकरार
इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर मोहम्मद नासिर को उम्मीदवार बनाया। उन्होंने भाजपा के के.के. मिश्रा को 56,820 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में मोहम्मद नासिर को 1,43,337 वोट मिले, जबकि के.के. मिश्रा को 86,517 वोट प्राप्त हुए। वहीं बसपा के अकील चौधरी 13,598 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस जीत के साथ समाजवादी पार्टी ने 2007, 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में लगातार चार बार मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर जीत दर्ज की। 2022 में जीत का अंतर पिछले चुनावों की तुलना में और बड़ा रहा।