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सीट का समीकरण: पिछले पांच चुनाव में दो-दो बार जीते भाजपा-सपा; रामनगर सीट का ऐसा रहा है चुनावी इतिहास

Mon, 26 Oct 2026 07:39 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा

सार

बाराबंकी जिले की रामनगर विधानसभा सीट 1967 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। शुरुआती वर्षों में यहां कांग्रेस का दबदबा रहा, जबकि बाद में भाजपा, बसपा और सपा समेत कई पार्टियों ने इस सीट पर जीत दर्ज की। आइए इस विधानसभा सीट के बारे में विस्तार से जानते हैं...
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रामनगर सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। जैसे-जैसे चुनाव के दिन नजदीक आ रहे हैं, राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो रही है। आने वाले चुनाव में जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। पक्ष और विपक्ष दोनों मतदाताओं को लुभाने में लग गए हैं। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास, सामाजिक ताने-बाने और उसके राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा बाराबंकी जिले की रामनगर विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।

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पहले जानते हैं रामनगर विधानसभा सीट के बारे में

उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला बाराबंकी है। जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं। इनमें- कुर्सी, रामनगर, बाराबंकी, जैदपुर, दरियाबाद और हैदरगढ़ शामिल हैं। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम रामनगर विधानसभा सीट की बात करेंगे। बाराबंकी जिले की रामनगर विधानसभा सीट साल 1967 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। यहां पहला चुनाव साल 1967 में हुआ था। यहां के पहले विधायक आर. आसरे बने थे। उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।

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राम नगर विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण
राम नगर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, ब्राह्मण, रावत, वर्मा (कुर्मी) और यादव समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 19% हैं। इसके बाद ब्राह्मण मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 15% और रावत मतदाताओं की आबादी लगभग 13% है, जबकि वर्मा (कुर्मी) समाज की हिस्सेदारी करीब 12% और यादव मतदाताओं की आबादी लगभग 10% है। अन्य प्रमुख वर्गों में गौतम समुदाय (एससी) के मतदाता करीब 8%, क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाता लगभग 7% और अन्य दलित वर्ग के मतदाता करीब 4.5% हैं। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।  

रामनगर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास

1967: संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की जीत
बाराबंकी जिले की रामनगर सीट पर साल 1967 के चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के आर. आसरे विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के एस. नारायण को 87 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया। चुनाव में आर. आसरे को 19,860 वोट, जबकि एस. नारायण को 19,773 वोट मिले। इस चुनाव में तीसरे स्थान पर सोशलिस्ट पार्टी (SSP) के पुरुषोत्तम रहे, जिन्हें 8,321 वोट मिले।

इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1969: कांग्रेस ने दर्ज की जीत
इस चुनाव में बाराबंकी जिले की रामनगर विधानसभा सीट से कांग्रेस के शेष नारायण शुक्ला विजयी हुए थे। उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के हंसराज सिंह को 7,951 वोटों के अंतर से हराया।

1974: कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत
इस चुनाव में रामनगर विधानसभा सीट से कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के भगौती प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने भारतीय क्रांति दल के मसूदुल हसन को 594 वोटों के मामूली अंतर से हराया। चुनाव में भगौती प्रसाद को 16,679 वोट, जबकि मसूदुल हसन को 16,085 वोट मिले।

आपातकाल का समय
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। 

सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।

1977: बाराबंकी की रामनगर सीट पर हुई जनता पार्टी की एंट्री
1977 के यूपी विधानसभा चुनाव में बाराबंकी जिले की रामनगर विधानसभा सीट से जनता पार्टी के मसूदुल हसन नोमानी विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के राम आसरे वर्मा को 9,802 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मसूदुल हसन नोमानी को 23,847 वोट, जबकि राम आसरे वर्मा को 14,045 वोट मिले।

हालांकि, उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।

विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।

इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1980 का चुनाव
इस चुनाव में रामनगर विधानसभा सीट से कांग्रेस (आई) के गजेंद्र सिंह विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय कृष्ण बिहारी को 999 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में गजेंद्र सिंह को 16,991 वोट, जबकि कृष्ण बिहारी को 15,992 वोट मिले।

1985: रामनगर सीट पर पहली बार जीता लोकदल
1980 के बाद राज्य में 1985 के चुनाव हुए। इस चुनाव में रामनगर सीट पर पहली बार लोकदल ने जीत हासिल की। चुनाव में फरीद महफूज किदवई विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के गजेंद्र सिंह को 12,356 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में फरीद महफूज किदवई को 32,791 वोट, जबकि गजेंद्र सिंह को 20,435 वोट मिले।

1989: कांग्रेस की हुई वापसी
इस चुनाव में बाराबंकी की रामनगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने वापसी की। चुनाव में कांग्रेस के शिव करण सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता दल (JD) के फरीद महफूज किदवई को 741 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शिव करण सिंह को 22,588 वोट, जबकि फरीद महफूज किदवई को 21,847 वोट मिले।

इन चुनावों के बाद राज्य में राजनीतिक अस्थिरता के चलते साल 1991, 1993 और 1996 के चुनाव हुए। इस दौरान बाराबंकी सीट का समीकरण बदलता रहा।

1991: रामनगर सीट पर जनता पार्टी की जीत
1991 के चुनाव में बाराबंकी की रामनगर विधानसभा सीट पर जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में फरीद महफूज किदवई विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज लक्ष्मी वर्मा को 791 वोटों के अंतर से हराया।

1993: रामनगर सीट पर पहली बार जीती भाजपा
इस चुनाव में बाराबंकी की रामनगर विधानसभा सीट पर पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में भाजपा की राज लक्ष्मी वर्मा विजयी हुईं। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के फरीद महफूज किदवई को 1,686 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राज लक्ष्मी वर्मा को 50,401 वोट, जबकि फरीद महफूज किदवई को 48,715 वोट मिले।

1996:  रामनगर सीट पर सपा की जीत
इस चुनाव में रामनगर सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के सरवर अली खान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की राज लक्ष्मी वर्मा को 4,261 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सरवर अली खान को 41,807 वोट, जबकि राज लक्ष्मी वर्मा को 37,546 वोट मिले।

2002: रामनगर सीट पर भाजपा की हुई वापसी
साल 2002 के चुनाव में बाराबंकी जिले की रामनगर विधानसभा सीट पर भाजपा ने वापसी की। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की राज लक्ष्मी वर्मा विजयी हुईं। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के वीरेंद्र शुक्ला को 11,087 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राज लक्ष्मी वर्मा को 34,009 वोट, जबकि वीरेंद्र शुक्ला को 22,922 वोट मिले।

2007: रामनगर सीट पर पहली बार जीती बसपा
साल 2007 के चुनाव में बाराबंकी जिले की रामनगर विधानसभा सीट पर पहली बार बसपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा के अमरेश कुमार विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के कुंवर रामवीर सिंह को 2,556 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अमरेश कुमार को 30,363 वोट, जबकि कुंवर रामवीर सिंह को 27,807 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी की राज लक्ष्मी 20,407 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
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2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2012: सपा की हुई वापसी
इस चुनाव में बाराबंकी जिले की रामनगर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने वापसी की। चुनाव में सपा के अरविंद कुमार सिंह विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के अमरेश कुमार को 32,224 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में अरविंद कुमार सिंह को 77,428 वोट, जबकि अमरेश कुमार को 45,204 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के कुंवर रामवीर सिंह 37,257 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2017 के चुनाव में भाजपा ने मारी बाजी
इस चुनाव में एक बार फिर साल 2002 के बाद भारतीय जनता पार्टी ने वापसी की। चुनाव में भाजपा के शरद कुमार अवस्थी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अरविंद कुमार सिंह को 22,727 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शरद कुमार अवस्थी को 88,937 वोट, जबकि अरविंद कुमार सिंह को 66,210 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के हफीज भारती 53,891 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2022: सपा ने मारी बाजी
इस चुनाव में बाराबंकी जिले की रामनगर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के फरीद महफूज किदवई विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शरद कुमार अवस्थी को महज 261 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में फरीद महफूज किदवई को 98,799 वोट, जबकि शरद कुमार अवस्थी को 98,538 वोट मिले।
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