बसपा सुप्रीमो मायावती लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों के खूब टिकट काट रही हैं। पार्टी में बहनजी के नाम से मशहूर मायावती ने पिछले दिनों ऐसी कुल्हाड़ी मारी, लोग इसके घाव खोज रहे हैं। बसपा के नेताओं को लग रहा है कि उन्होंने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है। आखिर आकाश आनंद, जो फायर ब्रांड नेता बन रहे थे, उन्हें ऐसे क्यों हटाया? बहनजी वाले कुछ नेता कह रहे हैं कि बाद में समझोगे? आकाश आनंद इस एक कदम से हीरो बन गया है। प्रयागराज के संघ के नेता का कहना है कि जमीनी संदेश उल्टा जा रहा है। समाजवादी पार्टी के संजय लाठर तो जिक्र करते ही हंस देते हैं। कहते हैं कि कुछ सीटों पर बसपा के उम्मीदवार बदलने से पैर में घाव तो हुए, लेकिन अंत में बहनजी ने आकाश आनंद पर कार्रवाई करके तोहफा दे दिया। बहुजन के लोगों में अपने आप संदेश चला गया कि बहनजी भाजपा की मदद कर रही हैं। इससे हमारे घाव भर आए और अब मजा आ रहा है।
शिंदे हैं कि बात मानते नहीं, ठाकरे हैं कि रूठ जाते हैं
भाजपा के खेमे में बड़ी मुश्किल से मनसे प्रमुख राज ठाकरे आए। ठाकरे को दिल्ली तक लाने में कड़ी मशक्कत हुई। जब आए थे, तो कुछ अपनी चिंताओं का साझा किया था। महाराष्ट्र लौटे तो उन्हें सब फिट लगा। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अच्छा स्वागत किया। यह वही शिंदे हैं जो कभी बाला साहेब ठाकरे के दौर में राज ठाकरे के इशारों पर नाचते थे। लेकिन कुछ दिन बाद एकनाथ शिंदे फिर शिंदे हो गए। यह नहीं समझ पाए कि भाजपा ने 48 सीटों में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए राज ठाकरे को जोड़ रही है। अजित पवार आए तो शरद की ताकत कम हुई। राज आएंगे तो उद्धव भी कमजोर होंगे। अब शिंदे के रुख को देखकर राज को बड़ी तकलीफ हुई। ठसक वाले नेता ने खुद को घर के दरवाजे तक सीमित कर लिया। कहते हैं न, जब इज्जत नहीं तो काहे को जाना। इधर उपमुख्यमंत्री फडणवीस को भी हमेशा ऐसा मुद्दे की चुगली की तलाश रहती है। बताते हैं फडणवीस ने अपना काम किया, तो दिल्ली एक्शन में आ गई। अब आप समझ सकते हैं कि बेचारे शिंदे फिर कैसे-कैसे पानी हुए। खैर, मुकाबला चल रहा है ताकि 30 सीटें तो पार हो जाएं?
नामांकन के आखिरी दिन स्मृति ईरानी बहुत खुश हुई थीं और अब?
कांग्रेस की प्रेस विज्ञप्ति जारी हुई। अमेठी के प्रत्याशी के तौर पर नाम था किशोरी लाल शर्मा। जानते हैं, सबसे ज्यादा खुश कौन हुआ था? गौरीगंज के भाजपा नेता उस दिन अपनी सांसद के पास थे। खेमे में सब खुश थे, हार से डरकर भाग गया (राहुल गांधी)। ईरानी की टीम मानकर चल रही थी कि अब तो जीत पक्की है। कोई मुकाबला ही नहीं रहा। खबर है कि अब भाजपा प्रत्याशी के चेहरे पर सुबह छह बजे ही 12 बज जाते हैं। हर रोज बैठक, तैयारी, प्रचार सब मैराथन। यही नहीं सपने में भी राहुल गांधी याद आ रहे हैं। इसलिए रह-रहकर तंज, जहरबुझे तीर चला रही हैं। दूसरी तरफ, दिल्ली और लखनऊ की भाजपा ने भी अमेठी की चुनौती भांप ली है। बताते हैं सीट बचाए रखने की चुनौती बढ़ गई है। इसी को साधने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने रायबरेली में समाजवादी पार्टी के विधायक मनोज पांडे के घर जाना उचित समझा, क्योंकि रायबरेली के साथ-साथ अमेठी के ब्राह्मण को साधना है। वैसे भी अमेठी से राहुल गांधी भले प्रत्याशी नहीं है, लेकिन इस सीट की महिमा कम नहीं हुई। क्योंकि पिछली बार स्मृति ने कांग्रेस अध्यक्ष को हराया था। इस बार नेहरू गांधी परिवार के वफादार से हार गईं, तो भद्द पिटनी भी तय है। हारते-हारते जीत गई तो भी मुश्किल है। कम से कम जीत का अंतर तो डेढ़ लाख के ऊपर हो।
क्यों तिलमिला रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार?
तेजस्वी यादव के तंज से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तिलमिला जा रहे हैं। तेजस्वी हैं कि अपनी जनसभाओं में चाचा (नीतीश कुमार) को याद करना नहीं भूलते। तेजस्वी के इस अंदाज से नीतीश, लालू के पुराने संगी शिवानंद तिवारी बहुत खुश हैं। शिवानंद तिवारी कहते हैं कि नीतीश कुमार आदमी बेजोड़ थे। अब पता नहीं क्या हो गया कि रोड-शो में कमल थाम लिए। तिवारी कहते हैं कि तेजस्वी ठीके बोल रहा है कि अब चाचा (नीतीश) को कमल थामने के बाद तीरवा (चुनाव चिन्ह, तीर) तरकश में रख देना चाहिए।
मंडी की सीट ने बढ़ाई कांग्रेस और भाजपा की चिंता
हिमाचल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का गृह राज्य है। गृह राज्य में मंडी सीट से इस बार चुनाव में अभिनेत्री से नेता बनी कंगना रनौत हैं। बताते हैं कंगना रनौत को हिमाचल के मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह ने कड़ी चुनौती दे दी है। विक्रमादित्य के मैदान में उतरने, बयानों के अंदाज, युवा कनेक्ट और चुनाव प्रबंधन कौशल ने कंगना के ग्लैमर को उलझा दिया है। वहीं, मंडी भाजपा के कुछ अच्छे नेता भी अब कंगना के लिए बाहर नहीं निकल रहे हैं। यही हाल विक्रमादित्य का भी है। मुख्यमंत्री सुक्खू की टीम को लगता है कि उनकी परेशानी की जड़ में विक्रमादित्य है। इससे अच्छा निपटाने का अवसर कहां मिलेगा? इसके साथ-साथ खबर यह भी है कि भाजपा जहां मंडी को हाई प्रोफाइल मानकर मैनेज करने में जुट गई है, वहीं प्रियंका गांधी ने भी मंडी की आवाज सुन ली है। वैसे भी कंगना को हराना एजेंडे में है। ताकि लड़ाई हो तो अच्छी हो।