कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी पारंपरिक लोकसभा सीट गुलबर्गा से चुनाव नहीं लड़ने पर विचार कर रहे हैं। दरअसल कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर फोकस करना है, यही वजह है कि खरगे की जगह कोई और गुलबर्गा सीट से चुनाव लड़ सकता है। अभी जो चर्चाएं हैं, उनके मुताबिक खरगे के दामाद राधाकृष्ण डोड्डामनी गुलबर्गा से चुनाव लड़ने की सबसे तगड़े दावेदार हैं। मल्लिकार्जुन खरगे गुलबर्गा सीट से दो बार सांसद रहे है लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
इस वजह से चुनाव नहीं लड़ेंगे खरगे
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता पर काफी जिम्मेदारियां हैं। उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के मामलों को देखना है, साथ ही उन्हें विपक्षी गठबंधन के नेताओं के साथ भी समन्वय करना है। साथ ही उनके राज्यसभा में भी चार साल का कार्यकाल बचा हुआ है। ऐसे में खरगे खुद लोकसभा चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं हैं। खरगे के बेटे प्रियांक भी गुलबर्गा क्षेत्र की चित्तापुर विधानसभा से विधायक हैं और फिलहाल राज्य सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में वे भी लोकसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं। यही वजह है कि खरगे के दामाद राधाकृष्ण डोड्डामनी के नाम की चर्चा है।
चर्चाओं से दूर रहते हैं राधाकृष्ण डोड्डामनी
डोड्डामनी एक बिजनेसमैन हैं और कई शिक्षण संस्थानों का प्रबंधन देखते हैं। डोड्डामनी भी पहले चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं थे, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। डोड्डामनी का जन्म भी गुलबर्गा में ही हुआ है और वह बहुत ज्यादा चर्चा में रहना पसंद नहीं करते। हालांकि कांग्रेस के पार्टी कार्यकर्ताओं में वह काफी चर्चित चेहरा हैं और मल्लिकार्जुन खरगे जब गुलबर्गा की गुरमितकल सीट से 1972 से 2004 तक विधायक रहे तो डोड्डामनी ही पर्दे के पीछे से प्रचार अभियान की रणनीति बनाते थे। गुलबर्गा सीट के कांग्रेस के पोल मैनेजर ने भी पुष्टि की है कि स्थानीय कांग्रेस नेताओं से भी डोड्डामनी की संभावित उम्मीदवारी को लेकर चर्चा की गई है।
कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है गुलबर्गा सीट
गुलबर्गा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है और यहां लंबे समय से मल्लिकार्जुन खरगे का दबदबा है। पिछले कई दशकों में मल्लिकार्जुन खरगे को 2019 के लोकसभा चुनाव में पहली बार हार का सामना करना पड़ा था। दरअसल 2019 में खरगे की राह आसान नहीं थी। कांग्रेस विधायक उमेश जाधव ने पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था और खरगे को 95,452 वोटों से हराया था। उमेश जाधव के अलावा कांग्रेस के गुलबर्गा के कई अन्य शीर्ष नेता जैसे बाबुराव चिंचांसुर, एबी मलक्का रेड्डी और मलिकाया गुट्टेदार भी भाजपा में शामिल हो गए थे। गुलबर्गा क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें आती हैं और खरगे गुलबर्गा क्षेत्र से नौ बार विधायक और दो बार लोकसभा सांसद रहे हैं। अभी गुलबर्गा क्षेत्र की छह विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है और एक सीट पर भाजपा और एक पर जेडीएस का कब्जा है।