लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
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कोटा-बूंदी: अपनों से ही बिड़ला की टक्कर
कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में चुनाव इस मायने में बहुत रोचक हो गया है, क्योंकि यहां वास्तविकता में टक्कर भाजपा के ही पूर्व और मौजूदा दिग्गजों में हैं। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के सामने भाजपा से ही कांग्रेस में गए पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल हैं। गुंजल चार महीने पहले विधानसभा का चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़े थे। बिड़ला को भाजपा के वोट कटने का खतरा है, तो कांग्रेस में भितरघात की आशंका। शहरी वोटों को लेकर भाजपा तो अल्पसंख्यकों पर कांग्रेस आश्वस्त हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में मीणा-गुर्जर वोटों का बंटवारा बहुत हद तक परिणाम प्रभावित करेगा। एक-एक वोट को बटोरने के लिए भाजपा की ओर से मंत्री किरोड़ी लाल मीणा, कांग्रेस से पूर्व मंत्री अशोक चांदना और क्षेत्र के युवा नेता नरेश मीणा दिन रात मशक्कत में जुटें हैं।
बाड़मेर-जैसलमेर: त्रिकोणीय संघर्ष में फंसे मंत्री चौधरी
यहां से केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी भाजपा की तरफ से मैदान में हैं। निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी के मैदान में आने से चौधरी त्रिकोणीय संघर्ष में फंस गए हैं। कांग्रेस से उम्मीदवार राम बेनीवाल हैं। सीट पर जीत का गणित जाट, राजपूत और अल्पसंख्यक वोटों के बंटवारे से निकलेगा। भाटी गुजरात जाकर रुपाला प्रकरण को हवा दे आए हैं। इसके अलावा अल्पसंख्यक वोट में भी सेंधमारी कर सकते हैं। इधर, कांग्रेस जाट और अल्पसंख्यक वोटों की लामबंदी से मैदान मारने की तैयारी में जुटी है। चौधरी को प्रधानमंत्री मोदी के नाम का सहारा तो है, लेकिन जातिगत और पार्टी के कोर वोटों में सेंधमारी रोकना उनकी चुनौती बना हुआ है।
बांसवाड़ा-डूंगरपुर: आदिवासी नेताओं में साख की जंग
यहां प्रत्याशी भी आदिवासी समुदाय के हैं और निर्णायक भी आदिवासी मतदाता हैं। पूरा चुनाव जनजातीय मुद्दों पर टिका है। दशकों से क्षेत्र में कांग्रेस के बड़े आदिवासी चेहरे और कई बार के विधायक और मंत्री रहे महेंद्रजीत सिंह मालवीय को इस बार भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है। सामने भारतीय आदिवासी पार्टी के उम्मीदवार विधायक राजकुमार रोत हैं। कांग्रेस ने भारतीय आदिवासी पार्टी से गठबंधन किया, लेकिन कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार ने अंतिम समय में नामांकन वापस ही नहीं लिया। ऐसे में मुकाबला कहने को त्रिकोणीय है, लेकिन कांग्रेस को समर्थन रोत का करना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में इसी सीट पर सभा के दौरान मंगलसूत्र वाला बयान देकर क्षेत्र को पूरे देश में चर्चित कर दिया था।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत
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जालोर: मैदान में वैभव चुनाव गहलोत का
इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार भले ही वैभव गहलोत हों, लेकिन चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बन गया है। पुत्र को संसद पहुंचाने के लिए अशोक गहलोत ने प्रचार का अधिकांश समय इसी सीट पर बिताया है। पिछला चुनाव वैभव जोधपुर से हार गए थे। पटेल समुदाय के वोट बहुतायत में होने के कारण सीट पर गुजराती संस्कृति का असर भी है। ऐसे में अशोक गहलोत गुजरात तक का दौरा कर आए हैं। भाजपा के पूर्व सांसद देवजी पटेल विधानसभा चुनाव हार गए थे। इसलिए भाजपा की ओर से उनके स्थान पर लुंबाराम को नए चेहरे के तौर पर उतारा गया है।