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Ground Report: MP के छिंदवाड़ा में नकुलनाथ के सामने विवेक, दांव पर कमलनाथ की प्रतिष्ठा; कमल की साख भी कसौटी पर

Mon, 15 Apr 2024 06:12 AM IST
प्रेम प्रताप सिंह छिंदवाड़ा, अमर उजाला

सार

छिंदवाड़ा के चुनावी संग्राम में इमोशन, एक्शन, सस्पेंस, कॉमेडी, ड्रामा सब देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश की यह सबसे चर्चित सीट है। कांग्रेस को यहां कमलनाथ के इमोशनल कार्ड और भाजपा को पीएम मोदी के मैजिक के दम पर जीत की आस है।
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कांग्रेस से नकुलनाथ और भाजपा के विवेक साहू - फोटो : ANI
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विस्तार
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सतपुड़ा नेशनल पार्क के किनारे बसे छिंदवाड़ा की सियासत जंगल से आनेवाली हवा की तरह ही तेजी से रुख बदल रही है। इस संसदीय सीट की सियासी जंग किसी फिल्म से कम रोचक नहीं। यहां के चुनावी संग्राम में इमोशन, एक्शन, सस्पेंस, कॉमेडी, ड्रामा सब देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश की यह सबसे चर्चित सीट है। कांग्रेस को यहां कमलनाथ के इमोशनल कार्ड और भाजपा को पीएम मोदी के मैजिक के दम पर जीत की आस है।

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पूर्व सीएम कमलनाथ सांसद बेटे नकुलनाथ के लिए अपने 44 साल के सियासी साम्राज्य को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं, जबकि मोदी के करिश्माई चेहरे और हिंदुत्व के दम पर भाजपा के विवेक साहू उनका किला ढहाने की कोशिश में जुटे हैं। जीत-हार किसी की भी हो, लेकिन इस चुनाव के बाद छिंदवाड़ा संसदीय सीट का एक नया अध्याय शुरू हो जाएगा।

भगवा झंडों से पटे शहरी क्षेत्र
छिंदवाड़ा संसदीय सीट के सातों विधानसभा क्षेत्रों के शहरी इलाके भगवा झंडों से पटे हैं, जिन पर जय श्रीराम लिखा हुआ है। 17 अप्रैल को रामनवमी मनाने की तैयारी चल रही है। 19 को मतदान होगा। इससे पहले भाजपा संगठन पूरे जिले को राममय बनाने में जुटा है। भाव-भक्ति में कमलनाथ भी पीछे नहीं हैं। शहर से गांव तक केवल कांग्रेस और भाजपा के झंडे-पोस्टर दिखाई देते हैं।  
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कांग्रेस के पोस्टर से राहुल ही गायब  
भाजपा के होर्डिंग-पोस्टरों पर पीएम मोदी, सीएम मोहन यादव और प्रत्याशी विवेक साहू उर्फ बंटी भैया की तस्वीरें लगी होती हैं, जबकि कांग्रेस के होर्डिंग, बैनर और पोस्टरों पर कमलनाथ और नकुलनाथ की ही तस्वीरें हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस के दूसरे प्रमुख नेता पोस्टरों से गायब हैं। शहरी इलाकों का वोटर खुलकर बोल रहा है। बदलाव की बात कर रहा है। लेकिन, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अभी खामोशी है, जबकि इन्हीं इलाकों के मतदाता निर्णायक साबित होंगे।

भाजपा में जाने की खबरों का असर
कमलनाथ के पुराने सारथी एक-एक कर साथ छोड़ गए हैं। चुनावी मैदान में वह परिवार संग अकेले पड़ गए हैं। कमलनाथ के भी भाजपा में शामिल होने की खबरें आईं थीं, जिसकी खूब चर्चा है। इन खबरों का तत्काल खंडन न करने से कमलनाथ की छवि पर जरूर असर पड़ा है। संकट के बीच किला बचाने के लिए कमलनाथ कवि सम्मेलन करा रहे हैं। भाजपा में गुटबाजी की खबरें भी उन्हें राहत दे रही हैं। कई कांग्रेसियों के भाजपा में आने से पार्टी के पुराने नेता असहज व असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वे चुप हैं, मगर चुप्पी भी अलग कहानी बयां कर रही है।

भाजपा ने झोंकी ताकत
छिंदवाड़ा में जीत के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। सीएम मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक-एक विधानसभा क्षेत्र के लिए रणनीति बनाकर जुटे हैं। कमलनाथ के कई सेनापतियों को भाजपा ने पहले ही तोड़ लिया है। अमरवाड़ा विधायक कमलेश शाह, छिंदवाड़ा के महापौर विक्रम आहाके और 2019 विधानसभा के उपचुनाव में कमलनाथ के लिए अपनी सीट छोड़ने वाले पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इनके सहारे भाजपा ने ऐसी मजबूत किलेबंदी की है, जिससे निपटना कमलनाथ के लिए बहुत आसान नहीं ।

कमलनाथ का इमोशनल कार्ड
बेटे के लिए कमलनाथ रात-दिन छिंदवाड़ा में ही कैंप कर रहे हैं। भाजपा की किलेबंदी के सामने उन्होंने इमोशनल कार्ड खेला है। जनसभाओं में कह रहे हैं, मैंने अपनी जवानी छिंदवाड़ा के लिए समर्पित की है। मेरी आखिरी सांस यहां के लिए है। बेटे नकुलनाथ भी भावनात्मक अपीलें कर रहे हैं। उनकी पत्नी खेतों में गेहूं की फसल काटती दिखीं, ताकि आदिवासी व ग्रामीण इलाकों में अपनत्व का संदेश जा सके। खास बात यह है कि कांग्रेस छिंदवाड़ा से कभी हारी नहीं, मगर इस बार लड़ाई बेहद कठिन है।

पिछले दो आम चुनावों के परिणाम

2019

उम्मीदवार              दल          मत                   मत%
नकुलनाथ                कांग्रेस      5.9 लाख            47
नाथशाह कवर्ती        भाजपा      5.5 लाख            44


2014

उम्मीदवार              दल           मत                   मत%
कमलनाथ              कांग्रेस       5.6 लाख             50.5
चंद्रभान सिंह          भाजपा       4.4 लाख             40


जातिगत समीकरण
छिंदवाड़ा संसदीय सीट पर आदिवासी मतदाता प्रभावी हैं। यहां पर लगभग 38 फीसदी से ज्यादा आबादी आदिवासियों की है। यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा का पूरा ध्यान उन्हें अपनी ओर खींचने पर केंद्रित है। यहां की सात विधानसभा सीटों में से तीन अनुसूचित जनजाति और एक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। जिले के शहरी इलाकों में सामान्य वर्ग की आबादी प्रभावी है।

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