लोकतंत्र का एक पक्ष यह भी है कि अपराध खत्म करने और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने का दावा करने वाले राजनीतिक दल चुनाव जीतने के लिए दागी सांसदों पर दांव लगानेे से पीछे नहीं रहते। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, गंभीर आपराधिक मामलों के बावजूद उन्हें सांसद बनाकर सदन में बैठाने से गुरेज नहीं करते। पिछले दो दशकों के आंकड़े देखें, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में कई सांसद ऐसे पहुंचे, जिनके ऊपर आपराधिक और गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
चुनाव सुधार के लिए काम करने वाले संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के पिछले चार आम चुनाव (2004 से 2019) के आंकड़ों पर नजर डालें, तो गंभीर अपराध वाले सांसदों की संख्या में 163 फीसदी, तो आपराधिक मामले वाले सांसदों की संख्या में 85 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2004 के लोकसभा चुनाव में गंभीर आपराधिक मामले वाले विजयी सांसदों की संख्या 60 थी, जो 2019 में 158 हो गई।
इसी तरह 2004 में आपराधिक मामले वाले 125 माननीय संसद पहुंचे थे। 2019 में इनकी संख्या 232 हो गई। इन नेताओं पर मारपीट, भड़काऊ भाषण, धमकी देना, हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और महिलाओं से अपराध जैसे आपराधिक मामले दर्ज हैं।
सर्वाधिक सांसद भाजपा के
2019 में आपराधिक मामले वाले कुल 232 सांसंद लोकसभा पहुंचे। इनमें से सबसे अधिक 116 सांसद भाजपा के, 29 कांग्रेस के, 10 डीएमके, 13 जदयू के और 9 तृणमूल के हैं। गंभीर आपराधिक मामले वाले 158 उम्मीदवार जीतकर संसद पहुंचे। इनमें से सबसे अधिक 87 सांसद भाजपा के, 19 कांग्रेस के, 60 डीएमके, 8 जदयू के और 4 तृणमूल के हैं।
करोड़पति सांसद 209 फीसदी बढ़े
2004 से 2019 के आम चुनाव के आंकड़ों के अनुसार करोड़पति सांसदों की संख्या में 209 फीसदी का इजाफा हुआ है। 2004 में 153 सांसद करोड़पति थे। 2019 में यह संख्या बढ़कर 474 हो गई।
पिछले चुनाव में सर्वाधिक दागी
| वर्ष |
दागी सांसद |
गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सांसद |
| 2004 |
125 |
60 |
| 2009 |
158 |
86 |
| 2014 |
186 |
119 |
| 2019 |
232 |
158 |
88 प्रतिशत सांसद करोड़पति
| वर्ष |
करोड़पति सांसद |
प्रतिशत |
| 2004 |
153 |
30% |
| 2009 |
302 |
58% |
| 2014 |
442 |
82% |
| 2019 |
474 |
88% |