पंजाब में बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों के लोग रहते हैं। सालों से यहां रह रहे ये लोग न सिर्फ यहां की संस्कृति का हिस्सा बन गए हैं, बल्कि राज्य के विकास में भी इनका बढ़ा योगदान है। एक रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में 43 लाख से अधिक लोग दूसरे राज्यों के हैं। इनमें से 32 लाख मतदाता है। ये किसी भी सीट के नतीजे पलटने की क्षमता रखते हैं। लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, बठिंडा और पटियाला में इनकी आबादी सबसे ज्यादा है। प्रवासियों को नजरंदाज करना राजनीतिक दलों को कई बार भारी पड़ता है। हर साल 20 लाख के करीब प्रवासी पंजाब नौकरी और रोजगार तलाशने के लिए आते हैं, इनमें कई लोग यहीं अपनी रोजी-रोटी जमा लेते हैं। ऐसे में हर राजनीतिक दल प्रवासियों का वोट बैंक खींचने में लगा रहता है। इसके लिए अलग से रणनीति बनाई जाती है।
लोकसभा चुनाव में नेताओं ने अब प्रवासियों के बीच जाना शुरू कर दिया है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने जालंधर में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। बीते चुनाव में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को भी प्रवासियों को नाराज करने का खामियाजा भुगतना पड़ा था। यही कारण है कि अतीत में जाने-अनजाने में हुई गलतियों से सबक लेते हुए इस बार उन्होंने होली मिलन समारोह प्रवासियों के बीच जाकर मनाया। प्रवासियों पर चन्नी की उनकी टिप्पणी भारी पड़ी थी। चन्नी जालंधर से कांग्रेस के प्रत्याशी हो सकते हैं और जालंधर औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां प्रवासियों की संख्या सर्वाधिक है, ऐसे में प्रवासी वोट बैंक लोकसभा चुनाव में जीत में एक बड़ा रोल अदा कर सकते हैं, इसके लिए वह अभी से मैदान में डट चुके हैं।
ये हैं 5 बड़े मुद्दे
पंजाब में प्रवासियों के पांच बड़े मुद्दे हैं। इनमें प्रवासियों के लिए रोजगार, मकान, उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा और सुरक्षा मुहैया कराए जाने का अहम मुद्दा है। पंजाब में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और कुछ हिस्सा हिमाचल के लोगों का है, जो सरहदी होने के कारण हिमाचल प्रदेश से लगता है। पंजाब में बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा के लोग प्रवासी के तौर पर रहते हैं।
पंजाब की अर्थव्यवस्था में प्रवासियों का बड़ा योगदान
पंजाब कृषि प्रधान प्रदेश और औद्योगिक क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने की दिशा में बढ़ रहा है। पंजाब को औद्याेगिक क्षेत्र में जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में प्रवासियों का बड़ा योगदान है, क्योंकि अधिकतम प्रवासी यहां श्रमिक के रूप में काम कर रहे हैं। 1970 के दशक में हरितक्रांति के समय में पंजाब में प्रवासियों का रुख बढ़ने लगा था।
हरित क्रांति ने उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को यहां प्रवासी के तौर पर धान की बुआई और अन्य खेतीबाड़ी व श्रमिक के रूप में आमदन का नया अवसर दिया। 1978 में पंजाब में प्रवासी मजदूरों की संख्या की अगर बात करें तो यह आंकड़ा 2.18 लाख थी, जो अब कई गुना तक बढ़कर 43 लाख तक पहुंच चुकी है। पूर्वांचल प्रवासी संगठन के अनुसार भी पंजाब में 43 लाख प्रवासी रहते हैं। यह आबादी सबसे ज्यादा लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, मोहाली, बठिंडा, फगवाड़ा और होशियारपुर में रहती है। अकेले औद्यौगिक शहर लुधियाना में करीब सात से आठ लाख प्रवासी मजदूर काम करते हैं।
मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं
हमने अपने घोषणा न्याय पत्र में कुछ अहम बिंदुओं को शामिल किया है, जिससे प्रवासियों को भी बड़े स्तर पर लाभ मिलेगा। जैसे मनरेगा के तहत 400 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी, ग्रेजुएट बच्चों को एक लाख तक की एप्रेंटेंसशिप शामिल है। कांग्रेस क्षेत्रवाद की राजनीति नहीं करती, लेकिन कुछ राजनीतिक दल क्षेत्रवाद की राजनीति करते हैं, हमारा हमेशा प्रयास रहता है कि प्रदेश के हर नागरिक को बेहतर सेवाएं और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, चाहें वह किसी भी प्रांत या धर्म का हो।
-अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, अध्यक्ष, पंजाब कांग्रेस
हर नागरिक को छत देने का प्रयास
हमारी पार्टी प्रदेश में हर प्रवासी को रोजगार और रहने के लिए छत देने का प्रयास करती है। केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में हर नागरिक के लिए जो भी योजनाएं शुरू की गई है, हमारा प्रयास है कि उसका लाभ हर व्यक्ति को मिले, जिसे उसकी जरूरत है, चाहे फिर वह प्रवासी हो या प्रदेश का आम नागरिक।
-एसएस चन्नी, प्रवक्ता, पंजाब भाजपा