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Lok Sabha Elections: क्या दलबदलू लगाएंगे बेड़ा पार? जीत की हैट्रिक के साथ भाजपा की नजर पार्टी के विस्तार पर

Mon, 01 Apr 2024 07:05 AM IST
यशोधन शर्मा हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली

सार

आम चुनाव में जीत की हैट्रिक के साथ भाजपा की नजर पार्टी के विस्तार पर भी हैं। खासकर पंजाब, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे उन राज्यों में, जहां भविष्य की सियासत के लिए पार्टी अपनी अलग और मजबूत पहचान बनाना चाहती है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने इस बार इन राज्यों में थोक के भाव में दलबदलुओं पर भरोसा जताया है। इनमें कई मौजूदा सांसद भी हैं।
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नवीन जिंदल, गोडम नागेश, रवनीत सिंह और किरण कुमार रेड्डी - फोटो : Social Media
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विस्तार
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भाजपा ने तेलंगाना में सबसे अधिक संख्या में दलबदलुओं पर दांव लगाया है। सूबे में 17 में से नौ टिकट बीआरएस में रहे नेताओं को दिया है। आंध्र प्रदेश में पार्टी के हिस्से चार सीटें आई हैं। इनमें से तीन सीटों पर उम्मीदवार तीन अलग-अलग दलों से निष्ठा बदल कर आए नेता हैं। हरियाणा और पंजाब में भी तीन-तीन अहम सीटें कांग्रेस और अन्य दलों से पालाबदल करने वालों को दी हैं।

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इन राज्यों से इतर पार्टी ने झारखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों में भी दलबदलुओं के लिए दिल बड़ा किया है। मसलन, झारखंड में झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन की पुत्रवधु सीता सोरेन को दुमका, राजस्थान में कांग्रेस से आईं ज्योति मिर्धा को नागौर, मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष रहे कृपाशंकर सिंह को जौनपुर, इसी पार्टी से आए जितिन प्रसाद को पीलीभीत से उम्मीदवार बनाया है। बीजेडी के दिग्गज नेता भर्तृहरि महताब को ओडिशा में कटक, तो पंजाब में आप के इकलौते सांसद सुशील कुमार रिंकू को जालंधर से उतारा है। वहीं, झारखंड में कांग्रेस की इकलौती सांसद और पूर्व सीएम मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा को सिंहभूम से मैदान में उतारा है।

  • तेलंगाना में 17 में से नौ टिकट बीआरएस से आए नेताओं को
  • आंध्र में 4 में से तीन टिकट निष्ठा बदलने वाले नेताओं को
  • तेलंगाना में बीआरएस से आए नेताओं पर मेहरबानी


भाजपा यहां प. बंगाल और ओडिशा के प्रयोग को दोहराना चाहती है। बीते चुनाव में दोनों ही राज्यों में पार्टी ने कांग्रेस को पीछे धकेल दूसरी बड़ी ताकत बनने में सफलता हासिल की थी। यहां उसकी निगाहें मुख्य विपक्षी दल बनने पर हैं। यही कारण है कि बीआरएस से आए नेताओं को टिकट दिया है।

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इन्हें मौका
तेलंगाना में बीआरएस नेताओं गोडम नागेश को अदीलाबाद, पूर्व सांसद सीताराम नाइक को महमूदाबाद, विधायक सैदा रेड्डी को नालगोंडा, दो बार सांसद रहे बीबी पाटिल को जहीराबाद, सांसद रामुली के बेटे पी भारत को नागरकरनूल, पूर्व विधायक अरूरी रमेश को वारांगल, डीके अरुणा को महबूबनगर, केसीआर सरकार में मंत्री रहे ए राजेंद्र को मलकागिरी और बूरा नाए गौड़ को भोंगीर से उम्मीदवार बनाया है।

कुल सीटें : 17


पार्टी           सीट             मत%
बीआरएस     9               52.94
भाजपा         4               23.53
कांग्रेस          3              17.64



आंध्र प्रदेश में उपस्थिति दर्ज कराने की रणनीति
बीते चुनाव में पार्टी आंध्र प्रदेश में खाता नहीं खोल पाई थी। इस बार भाजपा ने टीडीपी और जनसेना के साथ गठबंधन कर अपने लिए चार सीटें हासिल की हैं। पार्टी की योजना इन सीटों पर जीत हासिल कर खाता खोलने के साथ ही अहम सियासी ताकत बनने की है। चूंकि राज्य में भाजपा का संगठन मजबूत नहीं है, ऐसे में पार्टी ने अपने हिस्से की चार में से तीन सीटों पर दलबदलुओं पर मेहरबानी की है।

इन्हें मौका
आंध्र प्रदेश में कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम किरण कुमार रेड्डी को राजमपेट, वाईएसआरसीपी से आई कोथापल्ली गीता को अराकू और टीडीपी के राज्यसभा सांसद सीएम रमेश को अनाकापल्ली से उम्मीदवार बनाया है।

कुल सीटें : 25

पार्टी                    सीटें                मत%
वाईएसआर           22                 49.89
तेलुगू देशम            3                  40.19
भाजपा                  0                     6.24
कांग्रेस                   0                   1.55

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पंजाब में अपने दम पर ताकत बनने की चाहत
राज्य में भाजपा को जीत के लिए हमेशा अकाली दल की जरूरत पड़ी। इस बार पार्टी यहां अपने दम पर पहचान बनाना चाहती है। इस रणनीति के तहत विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी ने बड़ी संख्या में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को अपने पाले में शामिल करने में सफलता हासिल की है। पहले पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर, सुनील जाखड़, परनीत कौर और रवनीत सिंह बिट्टू को साधा है। पार्टी की योजना यहां कांग्रेस के वोट बैंक पर कब्जा करने की है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने कांग्रेस से जुड़े रहे बिट्टू और परनीत कौर को टिकट दिया है।

कुल सीटें : 13

पार्टी            सीटें              मत%
कांग्रेस           8                40.12
शिअद           2                27.45
भाजपा           2                   9.63
आप              1                   7.38

हरियाणा में विरासत पर नजर
हरियाणा में पार्टी का आधार मजबूत है। मजबूती बरकार रखने के लिए पार्टी ने दूसरे दलों में शामिल ऐसे नेताओं को साधा है, जिनकी सियासत में मजबूत विरासत है। पहले कुलदीप बिश्नोई, फिर नवीन जिंदल के साथ देवीलाल परिवार के रणजीत सिंह चौटाला भाजपा में आए। इनमें जिंदल और रणजीत को पार्टी ने क्रमश: कुरुक्षेत्र और हिसार से उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और दलित बिरादरी से आने वाले अशोक तंवर को सिरसा से मैदान में उतारा है।

कुल  सीटें : 10

पार्टी      सीटें        मत%
भाजपा   10          58.02
कांग्रेस      0         28.42

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