भाजपा ने तेलंगाना में सबसे अधिक संख्या में दलबदलुओं पर दांव लगाया है। सूबे में 17 में से नौ टिकट बीआरएस में रहे नेताओं को दिया है। आंध्र प्रदेश में पार्टी के हिस्से चार सीटें आई हैं। इनमें से तीन सीटों पर उम्मीदवार तीन अलग-अलग दलों से निष्ठा बदल कर आए नेता हैं। हरियाणा और पंजाब में भी तीन-तीन अहम सीटें कांग्रेस और अन्य दलों से पालाबदल करने वालों को दी हैं।
भाजपा यहां प. बंगाल और ओडिशा के प्रयोग को दोहराना चाहती है। बीते चुनाव में दोनों ही राज्यों में पार्टी ने कांग्रेस को पीछे धकेल दूसरी बड़ी ताकत बनने में सफलता हासिल की थी। यहां उसकी निगाहें मुख्य विपक्षी दल बनने पर हैं। यही कारण है कि बीआरएस से आए नेताओं को टिकट दिया है।
पार्टी सीट मत%
बीआरएस 9 52.94
भाजपा 4 23.53
कांग्रेस 3 17.64
आंध्र प्रदेश में उपस्थिति दर्ज कराने की रणनीति
बीते चुनाव में पार्टी आंध्र प्रदेश में खाता नहीं खोल पाई थी। इस बार भाजपा ने टीडीपी और जनसेना के साथ गठबंधन कर अपने लिए चार सीटें हासिल की हैं। पार्टी की योजना इन सीटों पर जीत हासिल कर खाता खोलने के साथ ही अहम सियासी ताकत बनने की है। चूंकि राज्य में भाजपा का संगठन मजबूत नहीं है, ऐसे में पार्टी ने अपने हिस्से की चार में से तीन सीटों पर दलबदलुओं पर मेहरबानी की है।
इन्हें मौका
आंध्र प्रदेश में कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम किरण कुमार रेड्डी को राजमपेट, वाईएसआरसीपी से आई कोथापल्ली गीता को अराकू और टीडीपी के राज्यसभा सांसद सीएम रमेश को अनाकापल्ली से उम्मीदवार बनाया है।
कुल सीटें : 25
पार्टी सीटें मत%
वाईएसआर 22 49.89
तेलुगू देशम 3 40.19
भाजपा 0 6.24
कांग्रेस 0 1.55