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लोकसभा चुनाव 2024: BJP-JJP गठबंधन से नाखुश बीरेंद्र सिंह परिवार दस साल बाद फिर हुआ कांग्रेसी, पढ़ें रिपोर्ट

Mon, 11 Mar 2024 12:46 PM IST
नवीन दलाल सुरेंद्र दलाल, हिसार (हरियाणा)

सार

लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही हरियाणा की राजनीति गरमाने लगी। हिसार लोकसभा से सांसद बृजेंद्र सिंह ने कांग्रेस में शामिल होकर भाजपा को बड़ा झटका दे दिया है। अब जींद में होने वाली एक रैली में बीरेंद्र सिंह भी बड़ा एलान कर सकते हैं।
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दिल्ली में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मुलाकात करते सांसद बृजेंद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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करीब दस साल पहले भाजपाई बने बीरेंद्र सिंह का परिवार एक बार फिर से कांग्रेस में शामिल हो गया है। उम्मीद है कि 23 या 26 मार्च को एक रैली कर बीरेंद्र सिंह कांग्रेस में शामिल होने का एलान करेंगे। रैली जींद या हिसार जिले में होगी। जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह, पत्नी पूर्व विधायक प्रेमलता सहित कुछ अन्य लोग भी भाजपा को छोड़कर कांग्रेस में शामिल होंगे।

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बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता को जजपा प्रत्याशी दुष्यंत चौटाला ने हराया
बीरेंद्र सिंह के पार्टी छोड़ने के तीन बड़े कारण माने जा रहे हैं। जिसमें पहला बीरेंद्र सिंह जजपा के साथ भाजपा के समझौते को पंसद नहीं कर रहे थे। उचाना से भाजपा की टिकट पर मैदान में उतरी बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता को जजपा प्रत्याशी दुष्यंत चौटाला ने हरा दिया। जिसके बाद इन दोनों परिवारों में राजनीतिक टकराव चल रहा है। पिछले करीब साढ़े चार साल से दोनों परिवारों के बीच खींचतान चल रही है। बीरेंद्र सिंह ने 2 अक्टूबर 2023 को जींद में मेरी आवाज सुनो नाम से रैली कर भाजपा नेतृत्व को अल्टीमेटम दिया था कि या तो वह जेजेपी से नाता तोड़ लें नहीं तो वह बीजेपी में नहीं रहेंगे। भाजपा बीरेंद्र सिंह तथा दुष्यंत दोनों के साथ संतुलन बनाकर चलने का प्रयास कर रही थी। भाजपा ने कुछ समय पहले ही जजपा को एनडीए में शामिल किया था।

हिसार लोकसभा से सांसद बृजेंद्र सिंह की भाजपा से टिकट कटने की आशंका जताई जा रही थी। अगर बृजेंद्र सिंह को हिसार से टिकट मिलता तो भी प्रेमलता को उचाना से टिकट कटना तय था। भाजपा एक परिवार एक टिकट एक फार्मूले के तहत उचाना की सीट प्रेमलता को नहीं उतारती। ऐसे में बीरेंद्र सिंह अपने बेटे को लोकसभा में भेजने तथा अपनी उचाना सीट दोनों को सुरक्षित करने के लिए कांग्रेस में आए।
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बीरेंद्र सिंह को जाट नेता के तौर पर पहचान मिलती है। किसान आंदोलन के समय वह किसानों के साथ खड़े दिखाई दिए। उन्होंने महिला पहलवानों तथा अग्निवीर के मुददे पर भी मतभेद जताया था। यह तीनों मुद्दे कहीं न कहीं उनके जाट वोट बैंक को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। इन कारणों के चलते भी वह भाजपा से खुश नहीं थे। ऐसे में उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया।

एक दूसरे पर करते रहे तीखी टिप्पणी
बीरेंद्र और दुष्यंत दोनों के बीच तीखी टिप्पणी करते रहे हैं। पिछले सप्ताह दुष्यंत चौटाला ने बीरेंद्र- बृजेंद्र सिंह पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ खोखला अल्टीमेटम जारी करने वाला बताया था। बीरेंद्र ने कुछ समय पहले सरकार में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में जेजेपी मंत्रियों के शामिल होने का आरोप लगाया था। उन्होंने हिसार में भाजपा के एक कार्यक्रम में नेहरु परिवार की सराहना की थी। बीरेंद्र सिंह दिवंगत राजीव गांधी और सोनिया गांधी के करीबी रहे हैं।

बीरेंद्र सिंह छोटू राम के नाती (बेटी के बेटे) हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के रिश्तेदार हैं। उन्होंने 1977 में अपने गृह क्षेत्र उचाना कलां से राजनीतिक शुरुआत की। पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 1984 में हिसार से लोकसभा सांसद बने। 2010 में कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य बने। 2014 में भाजपा ने उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाकर केंद्रीय इस्पात मंत्री बनाया।

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