लोकसभा की 25 सीटों वाले राज्य राजस्थान में भले ही सियासत के धुरंधर कहे जाने वाले दिग्गज नेता खुद चुनावी मैदान में नहीं हैं, लेकिन उनकी साख सीधे तौर पर दांव पर लग गई है। दरअसल, कई सीटों पर बड़े नेताओं के पुत्र, पत्नी या रिश्तेदार मैदान में हैं। कुछ अन्य सीटें नेता के गृहनगर या टिकट में भूमिका को लेकर स्वत: ही उनके नाम से जुड़ गई हैं। ऐसे में परिणाम के बाद जीत का सेहरा इन्हीं के सिर पर रखा जाएगा तो हारने का ठीकरा भी इन्हीं के सिर फूटेगा। जानते हैं किन दिग्गजों की साख दांव पर लगी हुई है।
वसुंधरा राजे
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह झालावाड़-बारां सीट से फिर मैदान में है। राजे पूरी तरह से इसी सीट पर सक्रिय हैं। बड़ा चेहरा होने के बावजूद अन्य सीटों पर वह बहुत कम ही नजर आ रही हैं।
भजनलाल शर्मा
राज्य में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की साख भी दांव पर है। वे पूरे प्रदेश में चुनाव की कमान संभाले हैं। लेकिन गृहनगर होने के कारण भरतपुर सीट का नाम उनसे जुड़ा है। इस सीट पर इस बार भाजपा ने चेहरा बदल कर रामस्वरूप कोली को टिकट दिया है।
गोविंद सिंह डोटासरा
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का गृहनगर सीकर है। इस सीट पर पहले उनके खुद मैदान में उतरने की चर्चा थी, लेकिन कांग्रेस ने यहां माकपा से गठबंधन किया है। समझौते में उनकी राय निर्णायक रही और अमराराम को टिकट मिला।
भंवर जितेंद्र सिंह
अलवर से हर बार चुनाव लड़ते आए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह इस बार मैदान में नहीं है। उन्होंने विधायक ललित यादव की पैरवी कर टिकट दिलवाया। ऐसे में चुनाव का दबाव कहीं ना कहीं उन पर रहेगा।