रामपुर में जब हम दाखिल हुए तो हमारे जेहन में कई सवाल थे। बड़ा सवाल तो यही था-यहां चुनाव किस करवट बैठेगा? आजम खां फैक्टर कितना असर डालेगा? हम लोगों से मिलते गए, सवालों के जवाब भी मिलते गए। उन जवाबों को अगर जोड़ें और विश्लेषण करें तो साफ हो जाता है कि यहां सिर्फ ध्रुवीकरण ही निर्णायक साबित होगा। न मोदी और योगी का जादू कम हुआ है और न सपा और अखिलेश यादव से भरोसा उठा है। कुल मिलाकर कहें तो मुख्य लड़ाई में सपा और भाजपा ही है।
कसौटी पर विकास
बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र में मिले ग्राम आदपुर के सुरेंद्र पाल सिंह बसपा प्रत्याशी को आगे बताते हैं। मिलक के ओमकार बौद्ध बसपा सरकार की उपलब्धियों का एक पत्रक हमें देते हुए कहते हैं, जितना काम मायावती ने मुख्यमंत्री रहते कराया, उतना आज तक किसी ने नहीं किया। रामपुर सदर के जसराज सागर इस तर्क को खारिज करते हैं कि बसपा प्रमुख मायावती भाजपा को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से प्रत्याशी उतार रही हैं। वह कहते हैं, मायावती इस देश में मुस्लिम-दलित गठजोड़ चाहती हैं और इसी समीकरण को देखते हुए फैसले ले रही हैं। हालांकि, जसराज सागर रामपुर में सपा-भाजपा के बीच ही टक्कर मानकर चल रहे हैं।
सवालों में अतीक और मुख्तार के मामले भी
स्वार विधानसभा क्षेत्र के ग्राम धनौरा पहुंचे तो वहां गनपति मौर्य पत्नी पुष्पा के साथ अपने खेत से प्याज निकाल रहे थे। गनपति मौर्य ने बड़ी ही साफगोई से कहा कि वे कमल के साथ हैं। पुष्पा भी उसे ही वोट देंगी, जिसको उनके पति देंगे। स्वार कस्बे में पहुंचे तो मारूफ अपने कई साथियों के साथ बैठे मिले। वह मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को लेकर काफी गुस्से में दिखे। कहते हैं-अतीक और मुख्तार का क्या हश्र कर डाला। कोर्ट को अपना काम करने देना चाहिए था। मारूफ और उनके साथी इस बात से भी काफी खफा दिखे कि दिल्ली में नमाज पढ़ने के दौरान पुलिस ने एक व्यक्ति को पीटा। सभी एक स्वर में कहते हैं कि हमें चेहरे से मतलब नहीं, जिसे सपा ने उतार दिया, वही सिर-माथे पर।
जो विकास करे, हम उसके साथ
चमरौआ विधानसभा क्षेत्र के डिलारी ग्राम पंचायत निवासी सरदार जसविंदर सिंह और दारा सिंह कहते हैं कि इस चुनाव में योगी-मोदी की बयार चल रही है। शेर अली सपा प्रत्याशी मोहिब्बुल्लाह को बाहरी मानते हैं। वहीं स्वार की मुस्लिम बहुल ग्राम पंचायत मुकरमपुर में अलग ही तस्वीर देखने को मिली। यहां मस्जिद के सामने के मुख्य मार्ग पर काफी कीचड़ है।
रामपुर के समर में ये योद्धा
घनश्याम लोधी, भाजपा : 2022 में उप चुनाव में आजम खां के करीबी आसिम राजा को हराकर सांसद बने। सपा में रहते हुए आजम के करीबी रह चुके हैं। इस सीट पर 1 लाख से ज्यादा लोधी वोट है। इस सीट पर 52 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता एकजुट हुए तो लोधी को मुश्किल में डाल सकते हैं।
मोहिब्बुल्लाह नदवी, सपा : पेशे से दिल्ली पार्लियामेंट्री की जामा मस्जिद में इमाम हैं। तुर्क बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले मौलाना नदवी के लिए अपनी बिरादरी मजबूती देगी। यहां 2 लाख से ज्यादा तुर्क वोटर हैं। हालांकि वह आजम खां के पसंदीदा नहीं हैं, इससे उनको नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जीशान खान बसपा : प्रॉपर्टी डीलर जीशान खान लोकसभा चुनाव में नया नाम हैं। अभी तक उनके परिवार की रामपुर के नगर पालिका के चुनाव में ही सक्रियता रहती थी। वह पठान बिरादरी से हैं। यहां सवा लाख पठान वोटर हैं। पार्टी संगठन की निष्क्रियता से उनको नुकसान हो सकता है।
उपचुनाव में भाजपा ने सपा से छीनी सीट
रामपुर से 2004 और 2009 में सपा के टिकट पर जयाप्रदा जीती थीं। 2014 में भाजपा के डॉ. नेपाल सिंह विजयी हुए। 2019 में सपा के मो. आजम खां जीते, लेकिन वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी। इसके बाद हुए उपचुनाव में यहां भाजपा के घनश्याम लोधी ने आजम के करीबी आसिम राजा को 42,192 मतों के अंतर से हराया।
आजम खां के बहिष्कार को लेकर असमंजस में लोग
थोड़ा आगे बढ़े तो मिलक में ही डॉ. राजकुमार माहेश्वरी के क्लीनिक पर राजनीतिक चर्चा-परिचर्चा का दौर चलता मिला। डॉ. माहेश्वरी कहते हैं, मोदी-योगी के राज में देश-प्रदेश में अमन-चैन कायम हुआ है। मिलक में सौ करोड़ का पुल मंजूर हुआ है। सड़कें सुधरी हैं। युवा राशिद अंसारी उनकी बात काटते हुए कहते हैं, भाजपा राज में अवाम का कोई भला नहीं हुआ है।
छुट्टा पशुओं से काश्तकार परेशान हैं। सड़कों का जाल तो सपा सरकार में जितना बिछा, उतना किसी सरकार में नहीं। यहां की जनता अब बदलाव चाहती है। इकरार हुसैन कहते हैं कि सपा ने बाहरी प्रत्याशी उतारा है, इसलिए आजम खां ने चुनाव के बहिष्कार की बात की है। इसलिए हम अभी असमंजस में हैं। अगर यह बहिष्कार जारी रहा तो क्या करेंगे? इस सवाल पर इकरार हुसैन बोले-'वोट डालने नहीं जाएंगे।' देवेंद्र सिंह आश्वस्त हैं कि भाजपा न सिर्फ रामपुर से जीतेगी, बल्कि देश में पूर्ण बहुमत की सरकार भी बनाएगी।