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Ground Report: गणतंत्र की जननी वैशाली पर बाहुबलियों की बिसात, RJD के मुन्ना शुक्ला-LJP की वीणा के बीच मुकाबला

सार

Ground Report: छह विधानसभा सीट वाली इस संसदीय सीट में बाढ़, शहर का विकास न होना, पर्यटन पर ध्यान न देना व रोजगार बड़े मुद्दे हैं। वैशाली का मुख्यालय हाजीपुर है। कोल्हुआ में अशोक स्तंभ के पास दुकान चलाने वाले बिक्कू कुमार कहते हैं, वीणा देवी की छवि अच्छी है। पार्किंग अटेंडेंट राजेश कहते हैं कि मुन्ना शुक्ला के जीतने से क्षेत्र का बेहतर विकास होगा।
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मुन्ना शुक्ला, वीणा - फोटो : चुनाव आयोग हलफनामा
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विस्तार
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वैशाली जन का प्रतिपालक, विश्व का आदि विधाता

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जिसे ढूंढ़ता विश्व आज, उस प्रजातंत्र की माता
रुको एक क्षण पथिक, इस मिट्टी पर शीश नवाओ
राज सिद्धियों की समाधि पर फूल चढ़ाते जाओ
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने इन पंक्तियों में वैशाली के स्वर्णिम अतीत के गौरव को उकेरा था, पर इसे विडंबना ही कहेंगे कि भगवान महावीर की जन्मस्थली और भगवान बुद्ध की कर्मस्थली जिस वैशाली को दुनिया का पहला गणतंत्र देने का श्रेय है, आज उसकी चर्चा बाहुबली नेता और हत्या के आरोप में जेल जा चुके राजद प्रत्याशी मुन्ना शुक्ला के चुनावी मैदान में उतरने की वजह से हो रही है।

वैशाली से राजद के दिग्गज नेता रघुवंश प्रसाद सिंह पांच बार सांसद रहे। इस बार बाहुबली विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला के सामने हैं एनडीए की लोजपा से प्रत्याशी वीणा सिंह। रोचक तो इस मुकाबले को दूसरे बाहुबली रामा सिंह की एंट्री ने बनाया है। रामा सिंह उर्फ राम किशोर सिंह ने 2014 के चुनाव में लोजपा के टिकट पर रघुवंश को हराया था। बाद में राजद में शामिल हो गए। हाल में लालू ने टिकट नहीं दिया तो फिर लोजपा में चले गए। इससे राजद के सामने राजपूत वोट बंटने का संकट गहरा गया है। रामा के समर्थन से वीणा व मुन्ना की टक्कर बराबरी की हो गई है।
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मुन्ना मुजफ्फरपुर की लालगंज विधानसभा सीट के रहने वाले हैं। 90 के दशक में अपराधियों के दो बड़े गुट थे, मुन्ना के बड़े भाई कौशलेंद्र उर्फ छोटन शुक्ला, जिसे राजपूत नेता आनंदमोहन सिंह की सरपस्ती हासिल थी। दूसरा ओमकार सिंह का गुट, जिसे पिछड़ी जाति के नेता और राबड़ी सरकार में मंत्री रहे बृज बिहारी प्रसाद का साथ मिला था। इन गुटों में सरकारी ठेकों को लेकर आए दिन मारामारी होती थी। 1994 में छोटन की हत्या कर दी गई। शवयात्रा में उग्र भीड़ को समझाने गए डीएम गोपालगंज जी. कृष्णैया की हत्या कर दी गई थी और नाम आया मुन्ना का। छोटन की हत्या का आरोप ओमकार गैंग पर लगा था। प्रतिशोध में मुन्ना के लोगों ने उसके सात गुर्गों की हत्या कर दी। अपराध की दुनिया में कुख्यात होने के बाद मुन्ना ने 1999 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा। बाद में जदयू से तीन बार लालगंज से विधायक रहे। 2009 में वैशाली से जदयू ने रघुवंश प्रसाद के खिलाफ उतारा, पर वे हार गए।
वहीं, वीणा देवी मुजफ्फरपुर से एमएलसी दिनेश प्रसाद की पत्नी हैं। वीणा पिछला चुनाव लोजपा से जीती थीं। राम विलास पासवान के निधन के बाद जब चिराग और चाचा पशुपतिनाथ पारस में विवाद हुआ, तो उन्होंने पारस का खेमा चुना। अब जब एनडीए ने लोजपा को तरजीह दी, तो वे फिर चिराग की पार्टी में आ गईं। रामा पांच बार विधायक और एक बार सांसद रहे हैं और राम विलास पासवान के निकट थे।
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मुद्दे और मतदाता
छह विधानसभा सीट वाली इस संसदीय सीट में बाढ़, शहर का विकास न होना, पर्यटन पर ध्यान न देना व रोजगार बड़े मुद्दे हैं। वैशाली का मुख्यालय हाजीपुर है। कोल्हुआ में अशोक स्तंभ के पास दुकान चलाने वाले बिक्कू कुमार कहते हैं, वीणा देवी की छवि अच्छी है। पार्किंग अटेंडेंट राजेश कहते हैं कि मुन्ना शुक्ला के जीतने से क्षेत्र का बेहतर विकास होगा। विकास स्वीट के मालिक अखिलेश कहते हैं, अच्छी फाइट देखने को मिलेगी। फल बेचने वाले धर्मवीर कहते हैं, लोकल को ही जीतना चाहिए।

पिछले दो चुनाव के नतीजे
2019
उम्मीदवार               दल        मत%
वीणा देवी              लोजपा     52.87
प्रसाद सिंह             राजद      31.04

2014
उम्मीदवार              दल          मत%
रामा किशोर सिंह   लोजपा      32.99
रघुवंश प्रसाद         राजद       22.27

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