रांची शहर में भाजपा का दबदबा नजर आता है, मगर कांग्रेस के पुराने धुरंधर पूर्व सांसद सुबोधकांत सहाय भी अपनी बेटी यशस्विनी के लिए पूरी ताकत झोंके हुए हैं। यशस्विनी पेशे से अधिकवक्ता हैं और मुंबई सेशन कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं। वह कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन से भी जुड़ी हुई हैं। उनकी मां रेखा सहाय अभिनेत्री रहीं हैं। गोंडा हिल, रॉक गार्डन, मछली घर, टैगोर हिल, मैकलुस्कीगंज, आदिवासी संग्रहालय और बिरसा जैविक उद्यान जैसे पर्यटन स्थलों से पहचाना जाने वाला रांची हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री भवन, प्रशासनिक भवन से लेकर अधिकतर सरकारी-गैरसरकारी भवन में विकास नजर आता है। रांची स्टेशन भी आधुनिक हो चुका है। स्टेशन में प्रवेश करते ही प्लेटफॉर्म नंबर एक पर वंदे भारत ट्रेन खड़ी दिखाई दी। स्टाफ से उसके दो घंटे पहले खड़े होने की वजह पूछी, तो पता लगा कि सफाई के दौरान यात्रियों के आकर्षण का केंद्र भी बनी रहती है। वंदे भारत के साथ सेल्फी ले रहे राकेश साहू बताते हैं कि बीते पांच-सात वर्षों में रांची तेजी से बदला है। रेलवे ही नहीं, सड़कें, हाईवे, फ्लाईओवर, चौड़ीकरण, पर्यटन, सौंदर्यीकरण, खेलों से लेकर हर क्षेत्र में सुधार हुआ है। गांवों तक सड़कें सरपट दौड़ने लगी हैं। दूसरे शहरों से अपने घर लौटें तो गांव की यात्रा खलती नहीं है। वंदे भारत की सफाई में जुटीं मंजू देवी ने बताया-महिलाओं के हालात भी बदल रहे हैं। काम में प्राथमिकता मिल रही है। उनकी सफाई की टीम में सभी महिलाएं ही हैं। आदिवासियों के गांवों में महिलाओं की हालत भले ही अभी कमजोर दिखती है, मगर रांची में हॉकी हॉस्टल के एस्ट्रोटर्फ पर खेलतीं खिलाड़ियों से लेकर पेट्रोल पंप की छोटी नौकरी तक में लड़कियां ही ज्यादा नजर आती हैं। सांसद संजय सेठ इस संदेश को पहुंचाने में जुटे हैं।
भगवा की धमक के बीच झामुमो की पैठ से कांग्रेस को आस
शहर, कस्बों और गांवों में भगवा झंडों की भरमार है। झामुमो-कांग्रेस (इंडिया गठबंधन) के बैनर-पोस्टर भी दिख जाते हैं। बड़गाईं के कृष्णा साहू कहते हैं, माहौल भाजपा का है, संजय सेठ ने अच्छा काम किया है।
सुबोधकांत पुराने कांग्रेसी हैं, मगर उनकी बेटी को लोग सही से जानते भी नहीं हैं। खूंटी रोड पर बाजार में मिले प्रभात कुमार सिंह कहते हैं कि रांची में भाजपा के पक्ष में एकतरफा लहर है। हालांकि मोराबाड़ी पर मिल्क बूथ चलाने वाले जैमिनी कांत महतो इससे सहमत नहीं हैं। कहते हैं, शहर में संजय सेठ की धमक है, मगर गांवों में झामुमो की पैठ का फायदा कांग्रेस को मिलेगा। पास खड़े आशीष बरला, राजेश सहाय, प्रभाष कुमार सिंह भी भगवा लहर की बात कर रहे हैं।
जाति-बिरादरी नहीं, व्यक्तित्व को तरजीह
रांची लोकसभा के चरित्र को देखें तो जाति के नाम या आधार पर वोटिंग की प्रवृत्ति उभर कर सामने नहीं आती। अब तक के 16 लोकसभा चुनावों में रामटहल चौधरी सबसे ज्यादा पांच बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय और पीके घोष तीन-तीन बार सांसद रहे हैं।
16 में से सिर्फ पांच बार कुर्मी सांसद रहा। जबकि कायस्थ व बंगाली कायस्थ तीन-तीन बार, तेली साहू दो बार और अब्दुल इब्राहिम मुस्लिम, मीनू मसानी पारसी और रवींद्र वर्मा केरल राजवंश के सदस्य एक-एक बार सांसद रहे हैं।
पिछले दो चुनाव के नतीजे
2019
| उम्मीदवार |
दल |
मत प्रतिशत (%) |
| संजय सेठ |
भाजपा |
57.18 |
| सुबोधकांत सहाय |
कांग्रेस |
34.29 |
2014
| उम्मीदवार |
दल |
मत प्रतिशत (%) |
| रामटहल चौधरी |
भाजपा |
42.74 |
| सुबोधकांत सहाय |
कांग्रेस |
23.76 |