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Sita Soren: देवर हेमंत सोरेन के खिलाफ भ्रष्टाचार पर खोला मोर्चा, महत्वाकांक्षी नेता के रूप में बनाई अलग पहचान

Wed, 20 Mar 2024 06:34 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हेमंत के खिलाफ आरोप लगने के बाद सीता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। जनता के बीच पार्टी और परिवार से अलग पहचान बनाई। माना जा रहा है, भाजपा उन्हें झारखंड या ओडिशा की किसी सीट से टिकट दे सकती है।
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सीता सोरेन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीता सोरेन झारखंड की सियासत में चर्चित नाम है। यहां के सबसे बड़ी सियासी परिवार शिबू सोरेन की बड़ी बहू हैं। शिबू के बड़े बेटे दुर्गा की पत्नी को महत्वाकांक्षी नेता माना जाता है। 2009 में दुर्गा की मौत के बाद सियासत में कदम रखा। सीता 2012 के कैश फॉर वोट कांड की आरोपी हैं। फिलहाल इस मामले में जमानत पर हैं। इसके अलावा दो अन्य मामलों में आरोपी हैं। पिता बीएन माझी इंडियन ऑयल के कर्मचारी रहे। कैश फोर वोट मामले में उन्होंने ही सौदेबाजी की थी और राज्यसभा में समर्थन के नाम पर सीता की तरफ से रिश्वत ली थी। 2015 में उन्हें गिरफ्तार किया गया।

सीता ने कभी शिकायत नहीं की, लेकिन अलग-अलग तरीकों से जताती रहीं कि वे जिस पद-प्रतिष्ठा की हकदार हैं, उससे महरूम रखा गया है। शिबू दुर्गा को उत्तराधिकारी के रूप स्थापित कर रहे थे, लेकिन अचानक मौत होने के बाद हेमंत को उत्तराधिकारी बनाया। सीता का मानना है कि अगर दुर्गा जीवित होते, तो झारखंड के सीएम बनते और पार्टी के हालात कुछ और होते। पर, हेमंत ने पार्टी को भ्रष्टाचार के दलदल में बेईमानों के बीच फंसा दिया है। सीता कहती हैं कि आदिवासियों के हक, जंगलों का संरक्षण और अवैध खनन को रोकना बड़े मुद्दे हैं, लेकिन दुर्गा की विरासत को बचाने के बजाय हेमंत खुद ही अवैध खनन में लिप्त हैं। सीता पिछले दो-तीन वर्ष से लगातार हेमंत के खिलाफ आवाज उठा रही हैं।  

हेमंत पर हमलों के लिए किया इंतजार

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जब हेमंत सत्ता में आए, तो सीता ने उनपर तुरंत हमला बोलने के बजाय इंतजार किया। कभी राज्यपाल से मिलकर, तो कभी राष्ट्रपति और केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इरादे जाहिर कर दिए कि वे हेमंत सरकार में अनदेखी पर चुप नहीं बैठने वाली हैं। सबसे पहले 2021 में उन्होंने हेमंत सरकार के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर मोर्चा खोला, तब तक हेमंत के खिलाफ कई मामलों में जांच शुरू हो चुकी थी। हेमंत के कोयले के अवैध खनन व लाभ के पद वाले मामलों में घिरने पर सीता ने सरकार का विरोध करते हुए खुद को परिवार पर लग रहे आरोपों से अलग कर लिया।

झारखंड या ओडिशा से मिल सकता है टिकट
हेमंत के खिलाफ आरोप लगने के बाद सीता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई। जनता के बीच पार्टी और परिवार से अलग पहचान बनाई। माना जा रहा है, भाजपा उन्हें झारखंड या ओडिशा की किसी सीट से टिकट दे सकती है। 12वीं तक पढ़ीं तीन बार विधायक सीता की सियासी समझ गहरी है। उन्होंने मंत्री न बनाने को मुद्दा नहीं बनाया। दुर्गा के नाम पर बेटियों के बनाए संगठन बनाया में कामकर जनता के बीच मजबूत छवि बनाई।

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