बीजू जनता दल (बीजद) ने ओडिशा की बेहद महत्वपूर्ण अस्का लोकसभा सीट से रंजीता साहू को मैदान में उतारा है। रंजीता यहां से अपनी सियासी पारी की शुरुआत कर रहीं हैं। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और उनके पिता पूर्व सीएम दिवंगत बीजू पटनायक भी इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। 33 वर्षीय रंजीता साहू अर्थशास्त्र में परास्नातक हैं और लंबे समय से सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रही हैं।
रंजीता का भले ही यह पहला चुनाव हो, पर राजनीतिक समझ उन्हें विरासत में मिली है। उनके पिता हरप्रसाद साहू और मां सुनीता प्रभा साहू कोडाला अधिसूचित क्षेत्र परिषद के अध्यक्ष रह चुके हैं। बीजद ने हरप्रसाद साहू को पिछले विधानसभा चुनाव में कबिसूर्यनगर सीट से उतारा था, लेकिन वह जीतने में सफल नहीं हुए थे। यह सीट अस्का लोकसभा क्षेत्र में आती है। रंजीता का अस्का सीट पर भाजपा के पूर्व मंत्री रमाकृष्ण पटनायक की बेटी अनीता प्रियदर्शिनी से सामना होगा। अनीता की मां कुमुदिनी पटनायक भी अस्का की सांसद रह चुकी हैं।
नवीन पटनायक के गृहनगर में रंजीता साहू को युवा और शिक्षित महिला की छवि का फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। बीजद ने उन्हें अस्का में उतारकर महिला सशक्तीकरण केंद्रित राजनीति करने का दावा पेश किया है।
बीजद की प्रतिष्ठा बचाने का दारोमदार
पटनायकों के वर्चस्व वाली अस्का सीट पर रंजीता का कड़ा इम्तिहान होगा। उनके लिए राहत की बात है कि उनकी प्रतिद्वंद्वी अनीता पिछला लोकसभा चुनाव बीजद की ही प्रमिला बिसोई से 2.04 लाख वोटों के भारी-भरकम अंतर से हारी थीं। अस्का लोकसभा क्षेत्र में हिंजिली, पोलासरा, कविसूर्यनगर, खलीकोट, अस्का, सुरदा और सनाखेमुंडी विधानसभा क्षेत्र आते हैं। हिंजिली सीएम नवीन पटनायक का गृह क्षेत्र है। ऐसे में बीजद के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का भी सवाल है। रंजीता को उम्मीद है कि वह यहां जीत के इतिहास को बरकरार रखेंगी।
सियासी जमीन, कोडाला यूथ फोरम से चर्चा में आईं
रंजीता साहू ने कोडाला, पोलासरा एवं कबिसूर्यनगर में जनता के लिए काम करने के इरादे से कोडाला यूथ फोरम की स्थापना की थी। वह कबिसूर्यनगर में कविसूर्य युवक संघ के प्रमुख की भी जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। इन संगठनों में काम करते हुए रंजीता को क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में खासी मदद मिली। इसी के भरोसे वह जीत के सपने बुन रही हैं।