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झारखंड की सियासत: दुख की घड़ी में भी गुरुजी की बहुओं ने दिखाए तेवर, राजनीति में परिवार का मुकाबला

सार

सियासी सरगर्मियों के बीच झारखंड का एक परिवार भी काफी चर्चा में है। एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के भाई के श्राद्ध कर्म में पूरा कुनबा नेमरा में जुटा, तो दूसरी तरफ जेठानी सीता सोरेन के साथ देवरानी कल्पना के तेवर चर्चा में रहे।
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दुर्गा और कल्पना सोरेन (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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झारखंड के पूर्व सीएम और झामुमो चीफ शिबू सोरेन की बहुएं इन दिनों काफी चर्चा में हैं। वजह है गुरुजी शिबू सोरेन की बहू सीता सोरेन का दुमका संसदीय क्षेत्र से परिवार के खिलाफ भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना और देवरानी कल्पना सोरेन का उनके खिलाफ प्रचार करना। दुख के अवसर पर एकसाथ होते हुए भी उनके हाव-भाव चर्चाओं में रहे। दुमका में तो चर्चाएं यहां तक हैं कि गुरुजी की बहुएं पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) में चचिया ससुर के श्राद्ध कर्म में गईं, तो दुमका तो सूना रहा, मगर नेमरा गरम।  

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वहीं, झारखंड के सियासी गलियारों में देवरानी-जेठानी के एक साथ शोकसभा में शामिल होने की भी चर्चाएं खूब रहीं। शिबू सोरेन के छोटे भाई दिवंगत राजाराम सोरेन के श्राद्ध कर्म में पूरा परिवार उनके पैतृक गांव नेमरा में जुटा, मगर वहां काफी कुछ सियासी माहौल था। पूर्व सीएम हेमंत सोरेन जेल से वहां पहुंचे, तो हर कोई उनके पिता वाले लुक को देखकर हैरत में था। काफी हद तक सफेद हो चुकी दाढ़ी और मूंछों में वह एकदम पिता शिबू सोरेन की तरह लग रहे थे।

मीडिया व रिश्तेदारों से दूरी बनाए रखते हुए उन्होंने पिता और माता के अलावा पत्नी कल्पना के साथ काफी समय बिताया। टेबल पर टिकाए पिता के चरणों को स्पर्श करके आशीर्वाद लिया और उन्हीं के पास बैठे रहे। भावुक मां रूपी सोरेन से गले लगना भी सबके दिलों को छू गया। सोशल मीडिया पर जारी तस्वीरों में सीता सोरेन के वहां होते हुए भी पूरे सीन से गायब दिखाने के भी सियासी मतलब निकाले जा रहे हैं। चर्चाएं यह भी रहीं कि दुमका में आमने-सामने आईं देवरानी-जेठानी के हाव-भाव नेमरा में भी कुछ वैसे ही रहे।
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खराब सेहत बताकर शिबू से मिलने से रोका गया
चर्चाएं तो यह भी हैं कि डायलिसिस पर बताकर शिबू सोरेन से किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा, मगर खराब सेहत के बावजूद उन्हें पूरे समय बैठाए रखने को सियासी नजरिए से भी देखा जा रहा है। सोरेन के साथ पत्नी रूपी के अलावा बेटे हेमंत, बहू कल्पना व प्रत्याशी नलिन सोरेन ही अधिक समय मौजूद रहे। सबके केंद्र में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से पैरोल पर आए हेमंत ही रहे। उसकी वजह पिता जैसी दाढ़ी-मूंछ वाला उनका बदला लुक भी रहा। जिस किसी ने हेमंत सोरेन को देखा, उसने कहा जरूर कि एकदम पिता जैसे नजर आ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने आते-जाते पिता के चरण स्पर्श किए। मां को गले लगाया। सोशल मीडिया पर जारी सारी तस्वीरें चर्चाओं में भी रहीं।

प्रतिष्ठा की लड़ाई चर्चा में बगावत
दुमका को अपनी कर्मस्थली बनाकर आठ बार जीता शिबू सोरेन परिवार अब इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा के तौर पर देखता है। ऐसे में उन्हीं की बहू सीता सोरेन का भाजपा के टिकट पर परिवार के खिलाफ मैदान में उतर जाना बगावत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि खुलकर कोई कुछ नहीं बोल रहा। सीता के सामने परिवार से किसी को न उतारकर विवादों से बचने की कोशिश तो की जा रही है, मगर प्रत्याशी बनाए गए नलिन सोरेन के प्रचार की कमान देवरानी कल्पना के हाथ में देना भी एक तरह से मुकाबला ही माना जा रहा है। हालांकि कल्पना गांडेय विधानसभा से उपचुनाव लड़ रही हैं। विधायक नलिन ने भी मैदान में उतरते ही सीता पर परिवार तोड़ने को लेकर हमला बोला था। हालांकि सीता सोरेन ने दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ शामिल होकर दूसरा ही संदेश दिया।

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