लोकसभा के चुनाव के दौरान जमकर लू चलेगी और खूब गर्मी होगी, इसकी चेतावनी तो मौसम विभाग ने पहले ही दे दी थी। मौसम विभाग की इस चेतावनी के बाद चुनाव आयोग ने न सिर्फ अलर्ट जारी किया, बल्कि उसने भी गर्मी में बचाव के सभी बंदोबस्त करने के दिशा निर्देश भी जारी कर दिए। हालांकि चुनाव आयोग के दिशा निर्देश मतदान स्थल से लेकर मतगणना स्थल तक के लिए विशेष रूप से जारी हुए थे, लेकिन प्रत्याशियों को भी अपने समर्थकों के साथ अलर्ट रहने के लिए कहा गया था। बावजूद इसके दिक्कत अभी भी सबसे ज्यादा उन राज्यों के प्रत्याशियों को हो रही है, जहां पर न सिर्फ तापमान 45 डिग्री से ज्यादा बना हुआ है, बल्कि लू के थपेड़े भी लगातार चल रहे हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि गर्मी के मौसम में प्रत्याशी से लेकर कार्यकर्ता और समर्थक भी बेहोश होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
लगातार बढ़े हुए तापमान के बीच में सोमवार को तो ओडिशा के पुरी में बीजू जनता दल के प्रत्याशी ही बेहोश होकर गिर गए। जानकारी के मुताबिक, मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर और पुरी से बीजेडी के लोकसभा प्रत्याशी अरुप पटनायक एक रोड शो कर रहे थे। इस दौरान उनके समर्थक नारेबाजी करते हुए चल रहे थे, लेकिन अचानक अरूप पटनायक बेहोश हो गए। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने बेहोशी का कारण गर्मी बताया। सिर्फ पुरी के अरुप पटनायक ही नहीं, बल्कि बीते दिनों मध्यप्रदेश के बैतूल से विधायक महेंद्र सिंह भी ऐसे ही गर्मी के चलते भारी जनसभा में बेहोश होकर गिर गए थे। उनको भी अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने गर्मी की वजह से बेहोश होने की बात बताई थी।
मध्यप्रदेश और ओडिशा की तरह ही पुडुचेरी में कांग्रेस के वर्तमान सांसद वी वैथिलिंगम भी बहोश होकर एक जनसभा में गिर पड़े थे। कांग्रेस के नेता को भी बेहोशी की वजह गर्मी बताई गई थी। सिर्फ नेता ही नहीं बल्कि चुनाव कराने वाले अधिकारी भी लगातार गर्मी के चलते बेहोश होकर गिर रहे हैं। झारखंड के गिरिडीह में भी गर्मी के चलते चुनाव कराने की ट्रेनिंग का हिस्सा बनी, एक महिला बेहोश होकर गिर गई थी। महाराष्ट्र के वर्धा में चुनाव से पहले होने वाली कर्मचारियों की ट्रेनिंग में भी दो अध्यापकों के बेहोश होने का मामला सामने आ चुका है।
ओडिशा के बरगढ़ लोकसभा से बीजेडी के लोकसभा प्रत्याशी देवेश आचार्य, बस्ता लोकसभा सीट से सुहासिनी जेना, वर्धा लोकसभा सीट से गठबंधन प्रत्याशी अमर शरदराव काले, यवतमाल से भाजपा प्रत्याशी राजश्री हेमंत, इन नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं ने लगातार पड़ रही भीषण गर्मी और गर्म हवाओं के चलते चुनाव प्रचार का वक्त ही बदल दिया है।
ओडिशा के बरगढ़ क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी देवेश आचार्य के समर्थक रामन साहू कहते हैं कि उनके कार्यकर्ता तो इतनी गर्मी में अब सुबह पांच बजे से ही चुनाव प्रचार के लिए निकल जाते हैं। इसके लिए उन्होंने ग्रामीण इलाकों के घरों से लेकर शहरी इलाकों के पार्कों को चुना है। रामन साहू कहते हैं कि कोशिश यही रहती है कि दिन चढ़ने के साथ बढ़ रहे पारे से पहले वह ज्यादा से ज्यादा वक्त लोगों के बीच में गुजार सकें, ताकि दिन में वह सियासी तौर पर अन्य रणनीतियों को अंजाम देकर एक बार फिर शाम को चुनाव प्रचार के लिए घर-घर दस्तक दे सकें।
गुजरात के कच्छ लोकसभा में आने वाले भगियारपुर के कांग्रेस के ब्लॉक महामंत्री स्वरूप छंगाभाई बताते हैं कि इस इलाके में एक गांव से दूसरे गांव जाने में न सिर्फ वक्त लगता है, बल्कि दिन में पड़ने वाली 45 डिग्री से ज्यादा की गर्मी और तेज चलने वाली धूल भरी हवाओं में निकलना भी मुश्किल होता है। यही वजह है कि उनके कार्यकर्ता और समर्थक कोशिश यही करते हैं कि जितनी जल्दी सुबह निकल कर लोगों से मुलाकात की जा सके वह सबसे बेहतर है। महाराष्ट्र के वर्धा और यवतमाल इलाके में भी लगातार तापमान बढ़ा हुआ है। वर्धा लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस के समर्थक किशन राव मोरे कहते हैं कि चुनाव में निकलना तो पड़ता ही है। लेकिन तेज गर्मी और लू के थपेड़ों से बचने के लिए सुबह पांच बजे से चुनाव प्रचार शुरू कर देते हैं। ताकि धूप के चटक होने से पहले ही वह ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिल सकें।
लगातार पड़ रही गर्मी के असर से बेहोश हो रहे प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को लेकर लोगों ने चुनाव आयोग पर भी जमकर नाराजगी जताई है। ओडिशा के भुवनेश्वर में गैर सरकारी संस्था के लिए काम करने वाली प्रमिला प्रधान रहती हैं कि चुनाव आयोग को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि ओडिशा में सिर्फ लोकसभा ही नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव भी साथ-साथ चल रहे हैं।
प्रमिला नाराजगी जताते हुए कहती हैं कि चार चरणों में होने वाले विधानसभा और लोकसभा के चुनाव शुरुआत के चार चरण में भी हो सकते थे। मई और जून में चुनाव आयोग को यहां पर चुनाव कराने से बचना चाहिए था। वह कहती हैं कि उन्होंने अपने ही राज्य के कई लोकसभा क्षेत्रों में देखा है कि प्रत्याशी अपने साथ डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ पानी पंखा और छांव का पूरा बंदोबस्त करके चलते हैं। बावजूद इसके गर्मी के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से कार्यकर्ताओं से लेकर समर्थकों और प्रत्याशियों की बेहोश होने की सूचनाए आती ही रहती हैं। ऐसे में चुनाव आयोग की जिम्मेदारियां और बढ़ जाती हैं कि कैसे चुनाव की तय समय सीमा के भीतर लोगों को कुछ राहत देते हुए चुनाव कराए जाए।
प्रमिला का कहना है कि इससे पहले ओडिशा में चार चरणों में ही चुनाव होते थे, लेकिन यह चुनाव शुरुआत के चार चरण में हो जाते थे। भुवनेश्वर के एक स्थानीय विश्वविद्यालय में कार्यरत समीर दास कहते हैं कि हमें गर्मी, सर्दी और बरसात के बावजूद भी एक जागरूक मतदाता होने के नाते हमें वोट तो करना है। उनका कहना है बेहतर होता अगर चुनाव आयोग ही इतनी भीषण गर्मी में यहां पर चुनाव कराने की बजाय पहले के चार चरणों में ही चुनाव करवा देता, तो संभव है कि मई के अंत और जून की शुरुआती गर्मी से बचा जा सकता। समीर दास बताते हैं कि उड़ीसा में तो अब ज्यादातर लोकसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा चुनाव प्रचार सुबह और शाम का ही दिख रहा है।