केरल ने सीएफएल (CFL - compact fluorescent lamps) और फिलामेंट बल्ब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही केरल ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। केरल के वित्त मंत्री टीएम थॉमस ने बीते शुक्रवार इस बात की घोषणा की।
अब सवाल है कि आखिर केरल ने ऐसा क्यों किया? इससे क्या फायदा होगा? अब राज्य में लाइट की क्या व्यवस्था होगी? इन सवालों के जवाब आगे बताए जा रहे हैं।
क्यों लगा है प्रतिबंध
वित्त मंत्री टीएम थॉमसन ने कहा कि सीएफएल और फिलामेंट बल्ब से कचरा ज्यादा उत्पन्न होता है। फिलामेंट बल्ब में पारा होता है, जिसके कारण इनके टूटने के बाद पर्यावरण के प्रदूषित होने का खतरा भी ज्यादा रहता है। जबकि एलईडी बल्ब इन दोनों से कहीं ज्यादा ऊर्जा बचाने वाले व सुरक्षित होते हैं।
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बजट के दौरान दिए गए अपने भाषण में केरल के वित्त मंत्री ने कहा कि 'फिलामेंट मुक्त केरल सरकार की परियोजना है जिसे साल 2018 में राज्य के ऊर्जा केरल मिशन के तहत शुरू किया गया था। इसके तहत अब सभी सरकारी कार्यालयों के बल्ब और स्ट्रीट लाइट्स को एलईडी (LED - Light Emitting Diode) से बदला जाएगा। इसके अलावा लोगों के उपयोग के लिए राज्य में 2.5 करोड़ एलईडी बल्ब्स का उत्पादन किया गया है।'
देश का पहला फिलामेंट मुक्त गांव
सरकार बेचेगी एलईडी
केरल राज्य विद्युत बोर्ड और राज्य के ऊर्जा प्रबंधन केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से 'फिलामेंट मुक्त केरल' परियोजना लागू की जाएगी। सरकार उपभोक्ताओं को केरल राज्य विद्युत बोर्ड की वेबसाइट पर एलईडी बल्ब खरीदने की सुविधा दे रही है। नौ वॉट के एलईडी बल्ब सरकार द्वारा काफी कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं।