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सरदार पटेल की किस बात से दुखी हुए महात्मा गांधी, आखिरी समय में कहे ये शब्द

Wed, 02 Oct 2019 09:47 AM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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सरदार वल्लभभाई पटेल और महात्मा गांधी
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2 अक्तूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती को बड़े धूम-धाम से मनाई जा रही है। गांधी जयंती न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी बड़े हर्ष के साथ मनाई जाती है। यहां हम बात कर रहे हैं गांधी जी के अंतिम अनशन की। उस वक्त आखिर क्यों गांधी जी अपने अंतिम समय में सरदार पटेल से गुस्सा हुए। पढ़ते हैं आगे...

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गांधी जी के जीवन का अंतिम आमरण अनशन 13 जनवरी, 1948 को मंगलवार की सुबह 11:55 बजे आरंभ हुआ। उस वक्त गांधी जी केवल दो बातों को लोकर अनशन कर रहे थे।

1- गांधी जी चाहते थे कि जिन शरणार्थी ने मुस्लिम घरों पर कब्जा कर लिया है, उन्हें खाली करके उनके मुसलमान मालिकों को लौटा दें और फिर शरणार्थी-कैंपों में वापस चले जाएं।" 
2- भारत और पाकिस्तान के बीच 55 करोड़ रुपयों के कर को लेकर ये अनशन था।

उनकी इस मांग से अधिकांश मंत्रियों को, विशेष रूप से सरदार पटेल को बहुत आघात पहुंचा। उन्हें बहुत गुस्सा भी आया। पहले नेहरू ने फिर उनके बाद पटेल ने रुपया रोक लेने के फैसले को उचित सिद्ध करने की कोशिश की।

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अनशन करने से पहले गांधी जी पूरी तरह से स्वस्थ नहीं थे। और अनशन के दौरान गांधी जी बेहद कमजोर हो गए थे। उन्हें चक्कर आ रहे थे। वह अपनी चटाई पर चुपचाप लेटे थे और छत पर नजरें गड़ाए हुए थे। वह सरदार पटेल के बारे में सोच रहे थे क्योंकि सरदार पटेल 55 करोड वाली बात पर उनके साथ नहीं थे। 
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थोड़ी देर बाद गांधी जी कोहनियों के बल ऊपर उठे और उस इंसान को बड़े गौर से देखने लगे, जिसने संघर्षों में उनका साथ दिया। 
उन्होंने भराए हुए क्षीण स्वर में कहा कि "तुम बह सरदार नहीं हो, जिसे मैं किसी युग में जानता था"

इतना कहकर वह पुन: चटाई पर लेट गए। 

(स्रोत और संदर्भः फ्रीडम एट मिडनाइट-लेखक लैरी कॉलिन्स और डोमिनिक लिपिएर)

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