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आपके पास है सोशल मीडिया से अपनी पहचान मिटाने का अधिकार

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Thu, 03 Oct 2019 06:45 PM IST

सार

 
  • आपकी निजता और सुरक्षा का ख्याल रखता है ये विशेष अधिकार
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

निजता का अधिकार (Right to Privacy), शिक्षा का अधिकार (Right to Education), सूचना का अधिकार (Right to Information)... ऐसे कई अधिकारों के बारे में आप जानते होंगे। लेकिन क्या आपने कभी डिजिटल मीडिया से अपनी पहचान मिटाने के अधिकार के बारे में सुना है? इससे लोगों को क्या फायदा मिलता है? क्या आप भी इसका फायदा उठा सकते हैं? दुनिया का एक देश ऐसा भी है, जहां यह कानून अपने नागरिकों का अधिकार देता है।

इन सभी सवालों के जवाब हम आपको आगे बता रहे हैं।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
निजता का अधिकार (Right to Privacy), शिक्षा का अधिकार (Right to Education), सूचना का अधिकार (Right to Information)... ऐसे कई अधिकारों के बारे में आप जानते होंगे। लेकिन क्या आपने कभी डिजिटल मीडिया से अपनी पहचान मिटाने के अधिकार के बारे में सुना है? इससे लोगों को क्या फायदा मिलता है? क्या आप भी इसका फायदा उठा सकते हैं? दुनिया का एक देश ऐसा भी है, जहां यह कानून अपने नागरिकों का अधिकार देता है।

इन सभी सवालों के जवाब हम आपको आगे बता रहे हैं।

डिजिटल मीडिया से अपनी पहचान मिटाने का अधिकार ऑनलाइन निजता का एक कानून (Online Privacy Law) है। यह किसी शख्स को अधिकार देता है कि वह किसी संस्था से उनका निजी डाटा मिटाने के लिए कह सके। अगर कोई शख्स ऐसा करता है तो संबंधित संस्था को वह डाटा अपने पास से मिटा देना होगा।

कैसे मिला है यह अधिकार

यह अधिकार लोगों को यूरोपीय संघ के जनरल डाटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR) के तहत मिला है। जीडीपीआर एक कानून है जिसे 2018 में 28 सदस्यीय ब्लॉक द्वारा पास किया गया था।

जीडीपीआर की वेबसाइट के अनुसार, डिजिटल मीडिया से अपनी पहचान मिटाने के अधिकार के बारे में इसके अनुच्छेद 17 में जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि -
'डाटा जिसके बारे में है, उसके पास ये अधिकार है कि वह उस निजी डाटा के नियंत्रक को उसे अविलंब हटाने के लिए कह सकता है। नियंत्रक को बिना देर किए उस डाटा को मिटाना होगा जिससे अपीलकर्ता को परेशानी हो रही है।'

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जीडीपीआर में इस 'अविलंब' (Undue Delay) का मतलब करीब एक महीने का समय बताया गया है।
वहीं निजी डाटा (personal data) का अर्थ है 'ऐसी जानकारी जो किसी परिचित या अपरिचित शख्स के बारे में हो या उससे जुड़ी हो।'

ऐसी अपील मिलने पर क्या करता है गूगल

अगर गूगल (Google) जैसी सर्च इंजन कंपनी के पास इस कानून के तहत ऐसी कोई अपील पहुंचती है, तो वह पहले इसकी समीक्षा करता है। इसके बाद उस देश विशेष की वेबसाइटों से लिंक हटा देता है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कानून बनने के बाद से अब तक गूगल के पास करीब 8.45 लाख ऐसी अपील पहुंची हैं। जिनमें इंटरनेट पर मौजूद करीब 33 लाख लिंक्स को मिटाए जाने की अपील की गई।

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क्या आप भी ले सकते हैं फायदा

हाल में यूरोपीय संघ के सर्वोच्च न्यायालय ने इस संबंध आए एक मामले में फैसला सुनाया है। यह मामला फ्रांस की एक संस्था और गूगल के बीच था। फ्रेंच संस्था का कहना था कि गूगल ने उनके कहने के बाद भी ग्लोबल डाटाबेस से उनका डाटा नहीं हटाया। लेकिन कोर्ट ने इस मामले में गूगल के पक्ष में फैसला सुनाया।

इसका कारण ये है कि अपील करने वाला पक्ष फ्रांस का था। कोर्ट ने कहा कि जीडीपीआर के तहत डिजिटल मीडिया से अपनी पहचान मिटाने का अधिकार सिर्फ उनके लिए है जो यूरोपीय संघ के अंतर्गत आते हैं। इससे बाहर के देशों व उनके लोगों पर यह लागू नहीं होता। यानी भारत में भी लोग इस अधिकार का लाभ नहीं उठा सकते हैं।

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