- अगर चुनाव के बाद किसी पार्टी को बहुमत न मिला हो
- जिस पार्टी को बहुमत मिला हो वह सरकार बनाने से इनकार कर दे और राज्यपाल को दूसरा कोई ऐसा दल नहीं मिले जो सरकार बनाने की स्थिति में हो
- राज्य सरकार विधानसभा में हार के बाद इस्तीफा दे दे और दूसरे दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हो
- राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के संवैधानिक निर्देशों का पालन ना किया हो
- कोई राज्य सरकार जान-बूझकर आंतरिक अशांति को बढ़ावा या जन्म दे रही हो
- राज्य सरकार अपने संवैधानिक दायित्यों का निर्वाह नहीं कर रही हो
ये भी जानें...
राष्ट्रपति शासन के लागू होने के दो महीनों के भीतर संसद के दोनों सदनों के द्वारा अनुमोदन हो जाना चाहिए। दोनों सदनों में इसका अनुमोदन होने के बाद राष्ट्रपति शासन छह महीने तक चल सकता है। भारत में अब तक करीब 125 बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है। भारत में राष्ट्रपति शासन सबसे पहले पंजाब में साल 1951 में लगाया गया था।
भारत में राष्ट्रपति को तीन धाराओं के तहत आपातकाल की घोषणा की शक्ति प्राप्त है। धारा 352 के तहत युद्ध या विदेशी आक्रमण की स्थिति में राष्ट्रीय आपातकाल लगाया जा सकता है। तो धारा 360 के तहत आर्थिक आपातकाल लगाया जा सकता है।
राष्ट्रपति शासन की अवधि छह महीने या एक साल की होती है। अगर राष्ट्रपति शासन को एक साल पूरा होने के बाद भी आगे बढ़ाना होता है तो इसके लिए चुनाव आयोग की अनुमति लेनी होती है।
अगर चुनाव आयोग सहमति दे भी देता है तो राष्ट्रपति शासन तीन साल की अवधि से ज्यादा नहीं लगाया जा सकता। राष्ट्रपति शासन के दौरान भी राज्यपाल राजनीतिक पार्टियों को बहुमत साबित करने के लिए न्योता दे सकते हैं।
किन परिस्तिथियों में विधानसभा को भंग किया जा सकता है:
- जब राज्य में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है और अन्य दलों के नेता मिलकर सरकार नहीं बना पाते हैं तो राज्यपाल विधानसभा को भंग कर देता है।
- संविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार, यदि एक राज्य सरकार, केंद्र सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में अपनी कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग करने में विफल रहती है या सरकार संविधान के अनुसार बताये गए नियमों का पालन नहीं करती है, तो उस राज्य का राज्यपाल इसकी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजता है जो कि केंद्रीय कैबिनेट की परामर्श के अनुसार राज्य में विधान सभा को भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा सकता है।
- यदि राज्य में चल रही गठबंधन सरकार अल्पमत में आ जाती है अन्य दलों के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं है तो ऐसी स्थिति में राज्यपाल नए चुनाव कराने के उद्देश्य से राज्य की विधानसभा को भंग कर सकता है।
- यदि विधानसभा चुनाव अपरिहार्य कारणों (जैसे राज्य का विभाजन, बाहरी आक्रमण इत्यादि) से स्थगित कर दिए गए हैं तो भी राज्यपाल विधानसभा को भंग कर सकता है।
यद्यपि राज्य विधानसभा के विघटन की शक्ति राज्यपाल के पास भी है। हालांकि राज्यपाल के इस निर्णय को संसद के दोनों सदनों द्वारा दो महीने के अंदर अनुमति मिलना जरूरी होता है।
यदि सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के पास विधानसभा भंग करने के खिलाफ अपील की जाती है और कोर्ट अपनी जांच में ये पता लगाते हैं कि राज्य विधानसभा को झूठे या अप्रासंगिक मुद्दे के आधार पर भंग किया गया है तो कोर्ट विधानसभा का भंग किया जाना रोक सकते हैं। इस प्रकार विधानसभा भंग करने का राष्ट्रपति का फैसला अंतिम निर्णय नहीं है और इसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
सन 1994 से पहले, राज्य असेंबली को भंग करने के तरीकों के बारे में व्यापक रूप से निंदा हुई थी। कई लोगों का मानना था कि केंद्र सरकार अपने हितों को पूरा करने के लिए अपने से अलग पार्टी की सरकारों को गैर वाजिब कारणों के हटा रही थी। इसलिए इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में उन कारणों की व्याख्या की जिनके आधार पर किसी राज्य की विधानसभा को भंग किया जा सकता है।
राष्ट्रपति शासन लागू करने के आदेश में विधानसभा को भंग करने या निलंबित रखने (सस्पेंडेड एनीमेशन) का उल्लेख होता है। भंग किए जाने की स्थिति में विधानसभा के पास कोई शक्ति नहीं होती और छह महीने के अंदर दोबारा चुनाव कराने जरूरी होते हैं। अगर राज्यपाल को लगता है कि राज्य में स्थिति बदल सकती है या सरकार बनाई जा सकती है, तो वे विधानसभा को निलंबित करने की सिफारिश करते हैं।
राष्ट्रपति शासन कैसे हटाया जाता है
विधानसभा निलंबित किए जाने पर, राष्ट्रपति शासन कभी भी हटाया जा सकता है और विधानसभा अपनी मूल स्थिति में लौट सकती है। यानी एक महीने या दो महीने बाद, जब भी कभी सरकार बनने की स्थिति बने, तो राष्ट्रपति शासन हटाया जा सकता है।
विधानसभा भंग होती तो...
अगर राष्ट्रपति शासन के आदेश में विधानसभा भंग की जाती, तो फिर छह महीने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन रहता और इन छह महीनों के अंदर-अंदर राज्य में विधानसभा चुनाव कराने पड़ते।
राष्ट्रपति शासन कितने दिनों के लिए लगाया जा सकता है?
निलंबन की स्थिति में राज्यपाल कभी भी राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश कर सकते हैं। लेकिन ज्यादा से ज्यादा छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। इस अवधि के अंदर सरकार बनानी होती है। अगर राष्ट्रपति शासन को छह महीने के लिए और बढ़ाना हो तो संसद के दोनों सदनों से अनुमोदन लेना होता है।