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क्या है अविश्वास प्रस्ताव जिसने गिरा दी कर्नाटक की सरकार, लोकसभा में अब तक कितनी बार हुआ पेश

Wed, 24 Jul 2019 02:46 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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फाइल फोटो - फोटो : PTI
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कर्नाटक में सियासी उथलपुथल जारी है। पूरे देश की निगाहें यहां की राजनीति में मचे बवाल पर टिकी हैं। भाजपा के अविश्वास प्रस्ताव ने कर्नाटक में सत्तारुढ़ कांग्रेस-जीडीएस की सरकार गिरा दी। कांग्रेस और जीडीएस के विधायकों के इस्तीफे से लड़खड़ाई मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की सरकार बहुमत परीक्षण में फेल हो गई। सिर्फ 14 महीने में ही सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी है। 

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लेकिन जिस अविश्वास प्रस्ताव के बाद कर्नाटक के सियासी गलियारों में इतनी हलचल मची, वो आखिर है क्या? इसके नियम क्या हैं? अब तक देश (लोकसभा) में कितनी बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जा चुके हैं? सबसे पहली बार अविश्वास कब लाया गया? किसके खिलाफ पेश हुए सबसे ज्यादा अविश्वास प्रस्ताव? ऐसे कई सवाल हैं, जिनके जवाब आपको जरूर जानने चाहिए। आगे हम आपको इन सभी सवालों के जवाब बता रहे हैं।

क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव
  • अविश्वास प्रस्ताव एक संसदीय प्रस्ताव है, जिसे सामान्य रूप से विपक्ष द्वारा किसी सरकार को हराने या कमजोर करने की उम्मीद से रखा जाता है। कुछ परिस्थितियों में सत्तारुढ़ सरकार के समर्थक भी अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं, अगर उन्हें सरकार में विश्वास न हो।  
  • संविधान में अविश्वास प्रस्ताव का कोई जिक्र नहीं है। लेकिन अनुच्छेद 118 के तहत हर सदन अपनी प्रक्रिया बना सकता है। जबकि नियम 198 के तहत ऐसी व्यवस्था है कि कोई भी सदस्य लोकसभा अध्यक्ष को सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे सकता है।
प्रस्ताव रखने के क्या हैं नियम
  • अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने के लिए सबसे पहले विपक्षी दल को लोकसभा अध्यक्ष को इसकी लिखित सूचना देनी होती है।
  • इसके बाद स्पीकर उस दल के किसी सांसद से इसे पेश करने के लिए कहते हैं। यह बात सदन में तब उठती है जब किसी दल को लगता है कि सरकार सदन का विश्वास या बहुमत खो चुकी है।
कब स्वीकार होता है अविश्वास प्रस्ताव
  • अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन हासिल होना चाहिए। 
  • लोकसभा अध्यक्ष या स्पीकर की मंजूरी मिलने के बाद 10 दिनों के अदंर इस पर चर्चा कराई जाती है। 
  • चर्चा के बाद स्पीकर अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोटिंग कराता है या फिर कोई फैसला ले सकता है।

पहली बार कब और किसके खिलाफ पेश हुआ था अविश्वास प्रस्ताव
भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव 1963 में पेश किया गया था। पंडित जवाहर लाल नेहरू की सरकार के खिलाफ इसे जेबी कृपलानी ने रखा था। तब इस प्रस्ताव के पक्ष में केवल 62 वोट और विरोध में 347 वोट पड़े थे। नेहरू की सरकार चलती रही थी।

किसके खिलाफ पेश हुए सबसे ज्यादा अविश्वास प्रस्ताव
  • अब तक सबसे ज्यादा अविश्वास प्रस्ताव इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ पेश हुए हैं। इंदिरा के शासन काल में 15 बार अविश्वास प्रस्ताव पेश हुए।
  • इसके अलावा लाल बहादुर शास्त्री और नरसिंह राव की सरकारों ने भी तीन-तीन बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना किया।
किसने सबसे ज्यादा बार पेश किया ये प्रस्ताव
देश के इतिहास में अब तक सबसे ज्यादा बार अविश्वास प्रस्ताव पेश करने का रिकॉर्ड माकपा सांसद ज्योतिर्मय बसु के नाम दर्ज है। उन्होंने चार बार अविश्वास पेश किया और चारों इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ थे।

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अविश्वास और विश्वास प्रस्ताव में क्या अंतर

  • अविश्वास विपक्ष जबकि विश्वास प्रस्ताव हमेशा सत्ता पक्ष पेश करता है। यह केंद्र में प्रधानमंत्री और राज्य में मुख्यमंत्री पेश करता है। सरकार के बने रहने के लिए इस प्रस्ताव का पारित होना जरूरी है। प्रस्ताव पारित नहीं हुआ तो सरकार गिर जाएगी। 
  • जब सरकार को समर्थन देने वाले घटक समर्थन वापसी का ऐलान कर दें, तो विश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। राष्ट्रपति या राज्यपाल, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को सदन का भरोसा हासिल करने के लिए कह सकते हैं।

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  • अटल बिहारी वाजपेयी ने दो बार सदन में विश्वास मत हासिल करने की कोशिश की, लेकिन दोनों बार वे असफल रहे। 1996 में उन्होंने प्रस्ताव पर मतदान से पहले इस्तीफा दे दिया था। जबकि 1998 में सिर्फ एक वोट की कमी के कारण उनकी सरकार गिर गई थी।
  • इनके अलावा वीपी सिंह, एचडी देवगौड़ा और आईके गुजराल की सरकारें भी विश्वास प्रस्ताव हार चुकी हैं।
लोकसभा में अब तक कितनी बार पेश हुआ अविश्वास प्रस्ताव
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