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पड़ताल : जानिए क्या है आर्टिकल-341? धारा-341 से कैसे अलग है अनुच्छेद-341? क्या इसे हटा देगी सरकार?

Mon, 12 Apr 2021 06:11 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

आइए जानते हैं क्या है वायरल दावे की सच्चाई और क्या है अनुच्छेद-341 यानी आर्टिकल-341 और क्या अंतर है धारा-341 यानी सेक्शन-341 और अनुच्छेद-341 यानी आर्टिकल-341 में? 
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भारतीय संविधान का अनुच्छेद 341 - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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सोशल मीडिया पर अक्सर तरह-तरह के दावे सामने आते हैं। कुछ को हम नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, जो हमसे और हमारे समुदाय से इतने जुड़े हुए होते हैं कि उन्हें दरकिनार करना असंभव लगता है और हम उन्हें आगे भेज देते हैं। जब वह संदेश सैकड़ों और हजारों लोग के पास पहुंच जाता है तो सामाजिक असंतोष व तनाव उभरने लगता है और कानून व्यवस्था बिगड़ने की नौबत आ जाती है।

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इसलिए ऐसे संदेशों की सच्चाई जानना बेहद जरूरी होता है। ऐसा ही एक मैसेज इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल संदेश में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग में आने वाली जातियों के लोगों को अधिकार देने वाली धारा-341 को हटाने जा रही है।

जबकि संविधान की धारा-341 का अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग में आने वाली जातियों के लोगों को अधिकार देने या न देने संबंधी कोई जुड़ाव ही नहीं है। संविधान की धारा-341 इससे पूरी तरह अलग है। बता दें कि संविधान में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग में आने वाली जातियों के लोगों को अधिकार देने संबंधी प्रावधान अनुच्छेद-341 से जुड़े हैं।
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आइए जानते हैं क्या है वायरल दावे की सच्चाई और क्या है अनुच्छेद-341 यानी आर्टिकल-341 और क्या अंतर है धारा-341 यानी सेक्शन-341 और अनुच्छेद-341 यानी आर्टिकल-341 में? आगे पढ़ें पर क्लिक करें 

क्या है धारा 341?
वायरल संदेश में जिस धारा 341 (Section 341) का उल्लेख किया है, उसका एससी, एसटी और ओबीसी या आरक्षण से कोई संबंध नहीं है। आईपीसी की धारा-341 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकता है तो उसे एक महीने तक की जेल की सजा या 500 रुपये का आर्थिक दंड अथना दोनों से दंडित किया जा सकता है। यह एक जमानती और संज्ञेय अपराध है और किसी भी न्यायिक अदालत में इस पर सुनवाई हो सकती है। 

क्या है अनुच्छेद 341?
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 (Article 341) की। अनुच्छेद-341 में राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि वह विभिन्न जातियों और कबीलों के नाम एक विशेष सूची में शामिल कर दें। 
  • 1950 में तत्कालीन राष्ट्रपति ने एक अध्यादेश के जरिए एक अनुसूची जारी की, जिसमें पिछड़ी जातियों या जनजातियों के भागों को शामिल किया गया था। बाद में इन सूचीबद्ध जातियों और जनजातियों को ही अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति कहा गया। 
  • इस अनुच्छेद में दो मुख्य प्रावधान हैं, पहले क्लॉज में बताया गया है कि राष्ट्रपति राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की किसी जाति को सार्वजनिक अधिसूचना के जरिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में शामिल कर सकते हैं। 
  • जबकि, इसके दूसरे क्लॉज में बताया गया है कि भारतीय संसद राष्ट्रपति की सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा अनुसूचित जाति या जनजाति में शामिल किसी भी जाति या समुदाय को इस सूची से बाहर निकाल सकते हैं।  

क्या है वायरल संदेश का दावा 
वायरल संदेश में दावा है कि एनआरसी, सीएए और एनपीआर की आग अभी बुझी नहीं कि मोदी सरकार एक और कानून लाने जा रही है, जिससे ओबीसी, एससी, एसटी का हक अधिकार समाप्त होने वाला है। धारा 341 हटाने जा रही है, जिसके तहत ओबीसी, एससी, एसटी का जन्म प्रमाण पत्र बनता है और उसके आधार पर आरक्षण मिलता है। धारा 341 को हटाने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। सभी बहुजन, ओबीसी, एससी, एसटी के लोग जाग जाइए और मनुवादी सरकार से लड़ने के लिए कमर कस लें। जितने भी क्रांतिकारी ग्रुप हैं सभी में फॉरवर्ड करें। 
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पड़ताल : भ्रामक है वायरल संदेश का दावा 
भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन प्रेस सूचना ब्यूरो की पीआईबी फैक्ट चेक टीम ने भी इस वायरल दावे की जांच की है और इस भ्रामक अर्थात फर्जी बताया है। पीआईबी फैक्ट चेक टीम ने लिखा यह दावा फर्जी है। केंद्र सरकार द्वारा धारा 341 हटाने हेतु कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है। ऐसे भ्रामक संदेशों को साझा न करें। 
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