क्या है धारा 341?
वायरल संदेश में जिस धारा 341 (Section 341) का उल्लेख किया है, उसका एससी, एसटी और ओबीसी या आरक्षण से कोई संबंध नहीं है। आईपीसी की धारा-341 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकता है तो उसे एक महीने तक की जेल की सजा या 500 रुपये का आर्थिक दंड अथना दोनों से दंडित किया जा सकता है। यह एक जमानती और संज्ञेय अपराध है और किसी भी न्यायिक अदालत में इस पर सुनवाई हो सकती है।
क्या है वायरल संदेश का दावा
वायरल संदेश में दावा है कि एनआरसी, सीएए और एनपीआर की आग अभी बुझी नहीं कि मोदी सरकार एक और कानून लाने जा रही है, जिससे ओबीसी, एससी, एसटी का हक अधिकार समाप्त होने वाला है। धारा 341 हटाने जा रही है, जिसके तहत ओबीसी, एससी, एसटी का जन्म प्रमाण पत्र बनता है और उसके आधार पर आरक्षण मिलता है। धारा 341 को हटाने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। सभी बहुजन, ओबीसी, एससी, एसटी के लोग जाग जाइए और मनुवादी सरकार से लड़ने के लिए कमर कस लें। जितने भी क्रांतिकारी ग्रुप हैं सभी में फॉरवर्ड करें।
पड़ताल : भ्रामक है वायरल संदेश का दावा
भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन प्रेस सूचना ब्यूरो की पीआईबी फैक्ट चेक टीम ने भी इस वायरल दावे की जांच की है और इस भ्रामक अर्थात फर्जी बताया है। पीआईबी फैक्ट चेक टीम ने लिखा यह दावा फर्जी है। केंद्र सरकार द्वारा धारा 341 हटाने हेतु कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है। ऐसे भ्रामक संदेशों को साझा न करें।