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बच्चों को शारीरिक शोषण से बचाने के लिए अब CBSE भी करेगा काम, जानें कैसे

Fri, 02 Aug 2019 03:36 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

  • बच्चों के साथ यौन अपराधों की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए पॉक्सो संशोधन विधेयक 2019 लोकसभा में पारित
  • महिला एवं बाल कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी ने सीबीएसई को भी दी बड़ी जिम्मेदारी
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विस्तार
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बच्चों के शारीरिक शोषण की घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। बच्चों के साथ ऐसा अपराध करने वालों के सख्त से सख्त सजा देने और ऐसे अपराधों पर लगाम लगाने के उद्देश्य यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) संशोधन विधेयक 2019 को लोकसभा में मंजूरी मिल गई। नाबालिग के साथ गंभीर यौन अपराध करने वालों को मृत्यु की सजा तक का प्रावधान करने वाले इस विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पारित किया गया है।

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महिला एवं बाल कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी ने विधेयक पेश करने के साथ-साथ यह भी कहा कि ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) भी काम करेगा।

कैसे और क्या काम करेगा CBSE

  • स्मृति ईरानी ने कहा कि सीबीएसई सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाएगा।
  • इसके तहत बच्चों को अच्छे और बुरे टच (गुड टच एंड बैड टच) के बारे में बताया जाएगा। ताकि बच्चों के साथ कोई बुरी हरकत करने की कोशिश करे भी, तो वे उस शख्स का मकसद समझ सकें।

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  • बच्चों को समझाया जाएगा कि ऐसी कोई भी घटना होती है तो वे तुरंत शोर मचाएं और घर पर माता-पिता या अन्य किसी अभिभावक को इसकी जानकारी जरूर दें।
  • अभी भी कई स्कूलों में इस तरह के सत्र आयोजित किए जाते हैं। लेकिन अब बोर्ड का दायित्व होगा कि हर स्कूल में समय-समय पर ये जागरूकता कार्यक्रम जरूर चलाए जाएं।
  • ईरानी ने कहा कि इसके लिए 40 हजार से ज्यादा शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि वे स्कूलों में सही तरीके से बच्चों को जागरूक कर सकें।
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बता दें कि विधेयक में प्रावधान किया गया है कि नाबालिग के खिलाफ गंभीर यौन अपराध के साबित होने पर दोषी को कम से कम 20 वर्ष की कठिन कारावास की सजा सुनाई जाएगी। इसमें ऐसे अपराध के लिए आजीवन कारावास, मृत्युदंड और जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है।

सीबीएसई ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी इलस्ट्रेशन के जरिए अच्छे व बुरे टच के बारे में समझाया है।

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