साहिबजादों के बलिदान को किया याद
वीर बाल दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि लगभग 320 वर्ष पहले दसवें सिख गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चारों साहिबजादों ने सत्य और न्याय के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि सबसे छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की वीरता को भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर में सम्मान के साथ याद किया जाता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी देश की महानता इस बात से तय होती है कि उसके बच्चे कितने देशभक्त और उच्च आदर्शों से प्रेरित हैं। उन्होंने खुशी जताई कि पुरस्कार पाने वाले बच्चों ने बहादुरी, कला-संस्कृति, पर्यावरण, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा और खेल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
बच्चों के उल्लेखनीय असाधारण कार्य
उन्होंने सात वर्षीय शतरंज खिलाड़ी वाका लक्ष्मी प्रग्निका, साहसिक कार्यों के लिए सम्मानित अजय राज और मोहम्मद सिदान पी तथा दूसरों की जान बचाते हुए शहीद हुए व्योमा प्रिया और कमलेश कुमार का विशेष उल्लेख किया। इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमावर्ती क्षेत्र में सैनिकों को सहायता पहुंचाने वाले श्रवण सिंह और दिव्यांग होते हुए भी खेल जगत में उपलब्धियां हासिल करने वाली शिवानी होसुरु उप्पारा की भी सराहना की।
महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि इस वर्ष 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 बच्चों को यह सम्मान दिया गया है। उन्होंने कहा कि ये पुरस्कार यह साबित करते हैं कि आत्मविश्वास और समर्पण के बल पर संसाधनों की कमी को भी मात दी जा सकती है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष बच्चों को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है।