आईएएस बनने के लिए कैसी तैयारियां करनी चाहिए, कौनसी बातें प्रेरित करती हैं और किनसे ज्यादा सहयोग मिलता है, आईएएस टॉपर्स ने अपनी सफलता के बाद जो बातें कहीं, उनसे यह जाना जा सकता है। इनसे भावी अभ्यर्थियों को कई तरह की जानकारियां मिल सकती हैं तो जीवन के बाकी क्षेत्रों में भी संघर्ष करने वालों को भी कोई न कोई बात आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकती है।
श्रुति शर्मा, देश में प्रथम : मेरे सफर में शामिल हर शख्स को श्रेय
मेरी सफलता का श्रेय उन सभी को जाता है जो मेरे आईएएस अधिकारी बनने के सफर में साथ रहे। खासतौर पर मेरे माता-पिता, जो बहुत ज्यादा सहयोग करते थे। मेरे दोस्तों को भी, जिन्होंने मुझे गाइड किया। मुझे ऐसे परिणाम की उम्मीद नहीं थी, यह आश्चर्यजनक लेकिन बेहद शानदार है। पिछली परीक्षा में चयन 1 नंबर से रह गया था, लेकिन फिर हिम्मत नहीं हारी और इसका परिणाम अब सबके सामने है।
बिजनौर में जन्मीं व दिल्ली में रहने वाली श्रुति ने डीयू के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन की। जेएनयू में एमए इतिहास में एडमिशन लिया लेकिन दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई का मौका मिला तो जेएनयू को छोड़ दिया।
इतिहास पढ़ना अच्छा लगता था तो इसे अपना विषय बनाया...
श्रुति पिछले 4 साल से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। इतिहास पढ़ना अच्छा लगता था तो इसे अपना विषय बनाया। साथ ही जामिया मिलिया इस्लामिया रिहायशी कोचिंग अकादमी (आरसीए) की छात्रा भी थीं। यहां से कुल 23 विद्यार्थी चुने गए।
निरंतर तैयारी...घंटे नहीं देखे : अंकिता अग्रवाल, कोलकाता
दूसरा रैंक आने पर मुझे खुशी है। अपनी तैयारी के दौरान मैंने जितना ज्यादा समय संभव हो सकता था, उतना दिया, पहले से तैयारी के घंटे तय नहीं करती थी। इसका मुझे काफी फायदा मिला, मैंने अपनी तैयारी में निरंतरता रखी। अंकिता 2020 में अपने पहले प्रयास में भारतीय राजस्व सेवा में चुनी गई थीं और नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम्स, इन-डायरेक्ट टैक्स व नारकोटिक्स फरीदाबाद में प्रोबेशन पर हैं। वे डीयू के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स ऑनर्स में ग्रेजुएट हैं। अंकिता ने राजनीति शास्त्र व अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सिविल सेवा परीक्षा में वैकल्पिक विषय चुना था।
सपना सच हो गया : गामिनी सिंगला, आनंदपुर साहिब
टॉप तीन में आने पर मैं बहुत खुश हूं, यह सपना सच होने जैसा है। इस सफलता के लिए मैं अपने पिता को श्रेय देना चाहूंगी। मैं रोजाना 9 से 10 घंटे पढ़ती थी, अधिकतर तैयारी खुद ही की। गामिनी के पिता डॉ. आलोक सिंगला हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर के नयना देवी सिविल अस्पताल में सेवारत है। उनकी मां भी राज्य में चिकित्सा अधिकारी हैं। गामिनी ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया है और सोशियोलॉजी को वैकल्पिक विषय चुना था। यह उनका दूसरा प्रयास था।
...फिर भी नहीं मानी हार : ऐश्वर्य वर्मा, उज्जैन
तीन बार यूपीएससी परीक्षा में असफल होने के बावजूद ऐश्वर्य ने हार नहीं मानी। चौथी बार में ऐसी सफलता मिली कि देश में चौथे स्थान पर आए। ऐश्वर्य इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं। मध्यप्रदेश के उज्जैन के रहने वाले ऐश्वर्य चार साल से बरेली में रहकर सिविल सेवा की तैयारी कर रहे थे। पिता विवेक वर्मा बैंक ऑफ बड़ौदा में अधिकारी हैं। पहली बार सिविल सेवा की परीक्षा में बैठे तो कोचिंग का भी सहारा लिया, लेकिन बाद में तीन साल से वह सेल्फ स्टडी कर रहे थे। ऐश्वर्य ने भूगोल विषय के माध्यम से सफलता पाई।
इस फाइटर की मां बनी राइटर : सम्यक जैन, दिल्ली
सम्यक की नजर कमजोर है, लेकिन हौसले उतने ही मजबूत। दूसरे ही प्रयास में परीक्षा पास की। कमजोर नजर की वजह से सम्यक ने परीक्षा में राइटर की मदद ली, जो उनकी मां बनीं। उन्होंने डिजिटल फॉर्मेट में किताबों से पढ़ाई की, जिससे कई इंटरनेट टूल्स उपयोग कर पाए। उनके पिता एअर इंडिया के लिए सेवारत हैं और पेरिस में तैनात हैं। यूपीएससी परीक्षा के लिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंध व राजनीति शास्त्र विषय ही चुने। मार्च 2020 के लॉकडाउन मे तैयारी शुरू की और रोजाना करीब 7 घंटे तैयारी की।
सोशल मीडिया से दूरी : यक्ष चौधरी, अलेदाकपुर कला (नयागांव), अमरोहा
सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रोज छह-सात घंटे पढ़ाई कर यक्ष ने तीसरे प्रयास में कारनामा कर दिखाया। उनके पिता नौनिहाल सिंह किसान हैं। यश ने 2017 में आईआईटी गुवाहाटी से बीटेक की। इसके बाद सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए।
जिला जज के बेटे ने हासिल की 12वीं रैंक
जनपद न्यायाधीश लल्लू सिंह के बेटे यथार्थ शेखर ने दूसरे प्रयास में 12वीं रैंक हासिल की है। मूल रूप से ग्राम सिजवाही जिला हमीरपुर के रहने वाले लल्लू सिंह ने बताया, यथार्थ पर्यटन का शौकीन है। बेटे ने पूरे परिवार का मान बढ़ाया है।