उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति (Chhatrapati Shahu Ji Maharaj University vice-chancellor) द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय(Allahabad High Court) की लखनऊ पीठ में भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के आरोप में दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति वी के सिंह की पीठ ने गुरुवार तक अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
विज्ञापन
कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक ने दी दलील
कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक ने दलील दी कि भ्रष्टाचार के एक मामले में अभियोजन की मंजूरी के बिना उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से यह प्रस्तुत किया गया था कि चूंकि प्राथमिकी में प्रथम दृष्टया गंभीर अपराधों का खुलासा हुआ है, इसे रद्द नहीं किया जा सकता है और पाठक को गिरफ्तारी से राहत नहीं दी जा सकती है। पाठक ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देते हुए मंगलवार को उच्च न्यायालय का रुख किया था।
यह है पूरा मामला
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने मंगलवार को पाठक और एक्सएलआईसीटी कंपनी के मालिक अजय मिश्रा के खिलाफ भ्रष्टाचार और रंगदारी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डेविड मारियो डेनिस द्वारा 29 अक्तूबर की शिकायत के आधार पर इंदिरा नगर पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 342 , 386 (जबरन वसूली), 504 (जानबूझकर अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम धारा 7 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
रंगदारी और धमकाने का मामला
डेनिस ने आरोप लगाया कि उसने डिजिटेक्स टेक्नोलॉजिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के भुगतान की मंजूरी के लिए मिश्रा के माध्यम से पाठक को लगभग 1.31 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जो आगरा में डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में परीक्षा पूर्व और बाद के काम में इस साल जनवरी से सितंबर तक लगा हुआ था, जहां पाठक उप-कुलपति थे। । मिश्रा, जिनकी फर्म भी इसी काम में शामिल है, उन्हें रविवार को गिरफ्तार किया गया था। डेनिस ने यह भी आरोप लगाया कि कुलपति ने 15 प्रतिशत कमीशन की मांग की, उन्हें धमकी दी और उनकी फर्म को उनके संपर्कों का उपयोग करके किसी भी विश्वविद्यालय में अनुबंध प्राप्त करने से रोक दिया।