आईआईटी की तर्ज पर अब विश्वविद्यालय भी फंड के लिए सरकार पर निर्भर नहीं रहेंगे। यह अब अपने खर्च के लिए पूर्व छात्रों से फंड लेंगे। पूर्व छात्रों को विश्वविद्यालयों के गवर्निंग बॉडी में शामिल करेेंगे। इसके लिए केंद्र ने पहली स्टूडेंट करियर प्रोग्रेशन एंड एल्यूमनाई नेटवर्क पोलिसी तैयार की है। इसमें पूर्व छात्र से पैसे के साथ उनके आइडिया से प्लेसमेंट, पाठ्यक्रम, परीक्षा से लेकर अन्य नीतियों में सुधार होगा।
पूर्व छात्र अपनी कुल आय में से एक फीसदी अपने संस्थान को सहयोग के रूप में दे सकता है। पैसे से मदद करने वाले सदस्यों को गवर्निंग बॉडी में शामिल किया जाएगा। ऐसे सदस्य गवर्निंग बॉडी की बैठक में भी शामिल होंगे। पूर्व छात्रों से मिलने वाला पैसा छात्रों की विभिन्न योजनाओं समेत इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगाया जाएगा। यदि पूर्व छात्र नियमों को पूरा करते होंगे तो वे शिक्षण कार्यों में भी सहयोग कर सकते हैं। संस्थान को मिलने वाले फंड पर पूर्व छात्र को आयकर से भी छूट मिलेगी।
नीति के तहत संस्थान के उत्थान में सहयोग देने वाले पूर्व छात्रों को सम्मानित भी किया जाएगा। वार्षिकोत्सव, दीक्षांत समारोह जैसे कार्यक्रमों में उन्हें आम छात्रों से रूबरू करवाते हुए अवार्ड भी मिलेंगे। ऐसे कार्यक्रमों में नेता या अधिकारी को बुलाने की बजाय पूर्व छात्रों को मुख्य अतिथि बनाने की भी योजना है। इसका मकसद वर्तमान और पूर्व छात्रों में संवाद कायम करना है। वह स्नातक की पढ़ाई करने वाले छात्रों को नौकरी, पढ़ाई आदि में राय दे सकते हैं।