पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालयों को छात्रों को सक्षम नागरिक बनाने का प्रयास करना चाहिए। शिक्षा प्रणाली के शीर्ष पर होने के नाते, विश्वविद्यालयों को वैश्विक परिप्रेक्ष्य रखने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआईयू को एक सक्रिय हितधारक की भूमिका निभानी चाहिए क्योंकि परिवर्तनकारी उच्च शिक्षा के लिए सभी के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान एआईयू की 97वीं वार्षिक आम बैठक भी हुई। एआईयू के अध्यक्षीय भाषण में जादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति सुरंजन दास ने कहा कि सूचनात्मक पाठ्यक्रम से रचनात्मक और परिवर्तनकारी पाठ्यक्रम में बदलाव की आवश्यकता है। दास ने जोर दिया कि अनुसंधान संस्थानों और समाज के बीच सहयोगात्मक कार्य होना चाहिए।
वहीं, पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष बिबेक देबरॉय ने अपने व्याख्यान में कहा कि उच्च शिक्षा के संस्थान के व्यवहार्य होने के लिए नामांकन का एक निश्चित बेंचमार्क स्तर होना चाहिए।
देबरॉय ने कहा कि सरकार के सीमित संसाधनों को उच्च शिक्षा के बजाय स्कूली शिक्षा पर सबसे अच्छा खर्च किया जाता है। पेशेवर रूप से व्यवहार्य पाठ्यक्रम होने चाहिए, जबकि अन्य पाठ्यक्रमों को सब्सिडी दी जा सकती है। विचार-विमर्श में 500 से अधिक कुलपति, आईआईटी, आईआईएससी, एनआईटी के निदेशकों के साथ-साथ विदेशों के शिक्षाविद् और नीति निर्माता भाग ले रहे हैं।