केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को लोकसभा में विश्वविद्यालयों में अनुसंधान को वित्तपोषित करने के लिए एक राष्ट्रीय एजेंसी स्थापित करने के लिए अनुसंधान राष्ट्रीय रिसर्च बिल पेश किया।
इस बिल में अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) को बीजने, विकसित करने और बढ़ावा देने, इसकी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र के बड़े योगदान के साथ 50,000 करोड़ रुपये का फंड स्थापित करने का प्रावधान है।
सरकार के अनुसार नेशनल रिसर्च फाउंडेशन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत वैज्ञानिक अनुसंधान की उच्च स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान करने वाली एक शीर्ष संस्था होगी। जून में केंद्रीय मंत्रीमंडल से विधेयक मंजूरी मिलने के बाद जितेंद्र सिंह ने कहा था, एनआरएफ उद्योग, शिक्षा जगत, सरकारी विभागों और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग स्थापित करेगा। उन्होंने आगे कहा कि यह वैज्ञानिक और संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों के योगदान के लिए इंटरफेस मेकेनिज्म तैयार करेगा।
उन्होंने कहा कि एनआरएफ एक नीतिगत ढांचा बनाने और नियामक प्रक्रियाओं को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। एनआरएफ में एक गवर्निंग बॉडी होगा, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री करेंगे। इसमें 15 से 25 प्रतिष्ठित शोधकर्ता शामिल होंगे और शिक्षा मंत्री और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री एनआरएफ के उपाध्यक्ष होंगे।
लोकसभा में पारित हुआ प्रबंधन संशोधन बिल 2023
लोकसभा ने शुक्रवार को प्रबंधन संस्थान (संशोधन) बिल 2023 पारित कर दिया। इस बिल को 28 जुलाई को निचले संसद में पेश किया गया था। मणिपुर हिंसा पर विपक्षी सदस्यों के प्रतिरोध के बीच निचले सदन द्वारा पारित किया गया था। बिल को लेकर संसद में बहस के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार का आईआईएम की स्वायत्तता में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने बताया कि संस्थानों की प्रबंधन जवाबदेही राष्ट्रपति को सौंपी गई गई है, वहीं अकादमी की जवाबदेही आईआईएम के पास ही रहेगी।
इस बिल के अनुसार राष्ट्रपति भारतीय प्रबंधन संस्थानों के विजिटर होंगे। उनके पास कामकाज का ऑडिट करने, जांच के आदेश देने और निदेशकों को नियुक्त करने और उन्हें हटाने की शक्तियां होंगी।
जनवरी 2018 में लागू हुआ आईआईएम अधिनियम के तहत कुछ प्रमुख बी स्कूलों को अधिक स्वायत्तता प्रदान की गई है। प्रत्येक संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में 19 सदस्य होते हैं, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों से केवल एक-एक प्रतिनिधि शामिल होता है। बोर्ड फैकल्टी, पूर्व छात्रों और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व समेत 17 लोगों को नामांकित करता है। इसके साथ ही नए निदेशकों और अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए खोज पैनल की भी नियुक्ति करता है।