केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इस फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान में संचालन शुरू होने के बाद सबसे पहले बैच में 150 छात्रों का दाखिला करेगा। पूरी तरह तैयार होने पर लगभग 500 छात्रों को प्रवेश दिया जा सकेगा। उन्हें बिहैवियर साइंस, नागरिक और आपराधिक कानून, पुलिस विज्ञान, अपराध विज्ञान और फॉरेंसिक जैसे अन्य विषयों में अत्याधुनिक विशेषज्ञता प्रदान करेगा।
परिसर में डीएनए सेंटर भी होगा
शाह ने कहा कि गुजरात स्थित राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) के सहयोग से उत्तर प्रदेश फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान के परिसर में पांच एकड़ भूमि पर डीएनए के लिए उत्कृष्टता केंद्र बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार ने डीएनए सेंटर के लिए 15 करोड़ रुपये भी आवंटित किए हैं, जो देश का सबसे उन्नत अनुसंधान केंद्र होगा।
पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा
जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान का नेतृत्व एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा किया गया। बताया गया है कि संस्थान गंभीर और जटिल अपराधों के मामलों की वैज्ञानिक जांच के लिए प्रोफेशनल स्किल विकसित करने के साथ ही फॉरेंसिक लैब में काम करने वाले वैज्ञानिकों और पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए भी काम करेगा।
ये हैं संस्थान की 10 खासियतें
- 200 करोड़ रुपये अनुमानित कुल लागत
- 15 करोड़ रुपये से बनेगा डीएनए सेंटर
- 50 एकड़ जमीन पर हो रहा है निर्माण
- 08 अनुभाग होंगे संस्थान में
- 14 उन्नत अनुसंधान प्रयोगशालाएं बनेंगी
- 150 विद्यार्थियों को मिलेगा दाखिला पहले बैच में
- 500 विद्यार्थियों को प्रवेश मिल सकेगा बाद में
- नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, गांधीनगर से होगी संबंद्धता
- संस्थान के निदेशक एडीजी रैंक के अधिकारी रहेंगे
- लखनऊ के सरोजनी नगर में हो रहा निर्माण
ये होंगे पाठ्यक्रम, उन्नत प्रयोगशालाएं भी
संस्थान में बीएससी, एमएससी फॉरेंसिक साइंस, एमफिल, पीएचडी, पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च, पीजी डिप्लोमा इन फॉरेंसिक साइंस, एडवांस स्पेशलाइज्ड एंड टेलरमेड पीजी डिप्लोमा व अन्य पीजी सर्टिफिकेट के कोर्स भी शुरू किए जाएंगे। इंस्टीट्यूट में लाई डिटेक्शन, नार्को एनालिसिस व ब्रेन मैपिंग, जीव विज्ञान, सीरम विज्ञान व डीएनए, डेटा एनालिसिस, साइबर सुरक्षा व साइबर फॉरेंसिक, आग्नेयास्त्र, फॉरेंसिक ध्वनिकी व प्रलेख, विस्फोटक व विष विज्ञान आदि से संबंधित उन्नत प्रयोगशालाएं होंगी।