UGC Draft Guidelines : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मंगलवार को अपनी वेबसाइट से उस ड्रॉफ्ट गाइडलाइन को हटा दिया, जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणियों के पर्याप्त उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने पर आरक्षित पदों के "आरक्षण को रद्द" करने का सुझाव दिया गया था। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने कहा कि दिशानिर्देशों को वेबसाइट से हटा दिया गया है, क्योंकि अपनी प्रतिक्रिया देने की समय अवधि समाप्त हो गई है।
यूजीसी की ड्रॉफ्ट गाइडलाइंस पर रविवार को विवाद खड़ा हो गया, जिसमें कहा गया है कि एससी, एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किसी भी रिक्ति को "अनारक्षित" घोषित किया जा सकता है, अगर इन श्रेणियों के पर्याप्त उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं। इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे उच्च शिक्षा संस्थानों में कोटा खत्म करने की साजिश करार दिया। उन्होंने लिखा- UGC के नए ड्राफ्ट में उच्च शिक्षा संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को खत्म करने की साजिश हो रही है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि एक भी पद अनारक्षित नहीं किया जाएगा और केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (शिक्षक संवर्ग में आरक्षण) अधिनियम, 2019 के लागू होने के बाद आरक्षण के बारे में अस्पष्टता की कोई गुंजाइश नहीं है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (सीईआई) में आरक्षित श्रेणी के पदों का कोई आरक्षण रद्द नहीं किया गया है और "ऐसा कोई आरक्षण रद्द नहीं होने जा रहा है"। मसौदा दिशानिर्देशों की कई हलकों से आलोचना हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भाजपा "केवल युवाओं की नौकरियां छीनने में व्यस्त है। इस मुद्दे पर सोमवार को जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने भी यूजीसी अध्यक्ष के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
कांग्रेस ने सोमवार को उच्च शिक्षा संस्थानों में पदों के आरक्षण के लिए दिशानिर्देशों के मसौदे पर यूजीसी अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार को बर्खास्त करने की मांग की, साथ ही पार्टी नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणियों के आरक्षण को समाप्त करने की एक "साजिश" है।