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UG: स्नातक छात्र मातृभाषा के साथ पढ़ेंगे एक और भाषा, यूजीसी ने राज्यों को लिखा पत्र; रोजगार क्षमता बढ़ाना मकसद

Sun, 15 Feb 2026 10:44 AM IST
शाहीन परवीन अमर उजाला, ब्यूरो

सार

UGC: यूजीसी ने स्नातक स्तर पर छात्रों को मातृभाषा के साथ एक अतिरिक्त भाषा पढ़ाने की पहल की है। इस संबंध में राज्यों को पत्र लिखकर रोजगार क्षमता बढ़ाने और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर जोर दिया गया है।
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UGC - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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Undergraduate Students: उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के भाषाई कौशल और रोजगार क्षमता को नई दिशा देने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर के छात्र अपनी मातृभाषा के अलावा एक अन्य भारतीय भाषा की पढ़ाई कर सकेंगे।

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यूजीसी ने इस संबंध में सभी राज्यों को पत्र लिखकर 2047 तक विकसित भारत के विजन के तहत अंतर-सांस्कृतिक समझ को मजबूत करने और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है। 

भारतीय भाषा समिति (BBS) की सिफारिशों पर आधारित इस योजना के तहत संस्थानों को छात्रों के लिए 22 भारतीय भाषाओं का विकल्प देना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप इस पहल का उद्देश्य छात्रों को किसी अन्य राज्य या क्षेत्र की भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे न केवल छात्रों की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव बढ़ेगा, बल्कि अन्य क्षेत्रों में उनकी रोजगार क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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तीन चरणों में होगा विभाजित

यह भाषाई कौशल बेसिक, इंटरमीडिएट और एडवांस तीन चरणों में विभाजित होगा। इसमें छात्रों को सुविधानुसार प्रवेश और निकास का विकल्प मिलेगा। संस्थान इन कोर्स को एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स (एईसी), क्रेडिट कोर्स या ऑडिट कोर्स के रूप में संचालित कर सकेंगे। यह कार्यक्रम नए क्रेडिट फ्रेमवर्क के तहत तीन अलग-अलग सेमेस्टर या तीन माइनर कोर्स के रूप में चलेगा। 12वीं पास और 16 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति इस कोर्स का हिस्सा बन सकता है।

एप और पोर्टल भी किया जाएगा विकसित

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक भाषाई शिक्षण एप और पोर्टल भी विकसित किया जाएगा, जिससे ऑनलाइन माध्यम से कहीं से भी जुड़ा जा सकेगा। भाषा के विशेषज्ञ भाषा गुरु के रूप में मार्गदर्शक की सेवाएं दे सकेंगे। उच्च शिक्षण संस्थान इन पाठ्यक्रमों का डिजाइन स्वयं तैयार कर सकते हैं या अन्य विशेषज्ञ संस्थानों के साथ एमओयू के माध्यम से इन्हें संचालित कर सकते हैं।
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