दोनों ही उच्च शिक्षा की नियामक संस्था
एआईसीटीई और यूजीसी दोनों ही देश की उच्च शिक्षक नियामक संस्था हैं। एआईसीटीई तकनीकी कॉलेजों और यूजीसी सामान्य विश्वविद्यालयों में डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई, परीक्षा और मूल्यांकन, अनुसंधान के मानकों के समन्वय, निर्धारण और रख-रखाव के लिए वैधानिक संगठन है। ऐसे में दोनों के बीच की दूरियां उच्च शिक्षा की रफ्तार को प्रभावित करेंगी।
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एआईसीटीई का अलग मसौदा
एआईसीटीई ने बताया, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, विकसित भारत 2047 के तहत एआईसीटीई रेग्यूलेशन 2025 का मसौदा तैयार किया है क्योंकि इंजीनियरिंग में वैश्विक स्तर पर उभरती तकनीक के आधार पर छात्रों को तैयार करना है। इसलिए शिक्षक भर्ती नियमों में इनको जोड़ना जरूरी है। नए नियमों में अब यूजी व पीजी प्रोग्राम में अलग-अलग विषय की पढ़ाई होने के बाद भी तकनीकी कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बन सकते हैं। प्रमोशन के लिए सिर्फ पढ़ाई व रिसर्च ही जरूरी नहीं होगा बल्कि स्टार्टअप, इनोवेशन, छात्रों की राय भी अहम होगी। ऐसे में यूजीसी किस आधार पर एआईसीटीई के शिक्षक नियमों के रेग्यूलेशन पर टिप्पणी कर सकता है।