क्या है विरोध के पीछे की वजह?
UGC के नए रेगुलेशन लागू होने के बाद छात्रों के बीच असंतोष बढ़ गया है। विरोध करने वाले संगठनों का मानना है कि इस नियम का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है और छात्रों या शिक्षकों को झूठे आरोपों में फंसाया जा सकता है। इसी चिंता के चलते जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, कायस्थ महासभा और वैश्य संगठनों ने मिलकर ‘सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4)’ का गठन किया है, ताकि रेगुलेशन के खिलाफ संगठित विरोध किया जा सके।
पालन न करने पर सख्त कार्रवाई
यूजीसी ने नए ईक्विटी नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है। आयोग ने कहा है कि जो भी कॉलेज या विश्वविद्यालय इन नियमों का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसमें संस्थान को UGC की योजनाओं से बाहर करना, कोर्स बंद करना, ऑनलाइन और डिस्टेंस एजुकेशन पर रोक लगाना और संस्थान की मान्यता रद्द करना शामिल है।
भेदभाव होने पर कर सकेंगे शिकायत
यूजीसी के नए नियमों में जातिगत भेदभाव की शिकायत करने का तरीका भी बताया गया है। नियमों के अनुसार, कोई भी पीड़ित छात्र, शिक्षक या कर्मचारी हेल्पलाइन, ईमेल या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। वह अपनी कंप्लेंट लिखित रूप में भी दे सकता है। अगर मामला गंभीर और आपराधिक है, तो उसे सीधे पुलिस के पास भेजा जाएगा।
यूजीसी ने कहा है कि अगर शिकायतकर्ता इक्विटी कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह एक महीने के भीतर कॉलेज या विश्वविद्यालय में बनाए गए ऑम्बड्समैन के पास अपील कर सकता है। वहां तय समय में निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा, यूजीसी पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा और कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों का रैंडम इंस्पेक्शन करके रिपोर्ट भी मांगेगा, ताकि नियम सही ढंग से लागू हो रहे हैं या नहीं, यह सुनिश्चित किया जा सके।
देखें आधिकारिक अधिसूचना