UGC Chairman To universities: उच्च शिक्षा संस्थानों में परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए अच्छी खबर है। दरअसल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार (M Jagadesh Kumar) ने विश्वविद्यालयों से छात्रों को स्थानीय भाषाओं में परीक्षा लिखने की अनुमति देने के लिए कहा है। भले ही पाठ्यक्रम अंग्रेजी माध्यम में पेश किया गया हो।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान पाठ्यपुस्तकें तैयार करने और मातृभाषा/स्थानीय भाषाओं में शिक्षण-और सीखने की प्रक्रिया का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयोग ने जोर देकर कहा कि इन प्रयासों को मजबूत करना और "मातृभाषा/स्थानीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों को लिखने और अन्य भाषाओं से मानक पुस्तकों के अनुवाद सहित शिक्षण में उनके उपयोग को प्रोत्साहित करने जैसी पहल को बढ़ावा देना" आवश्यक है।
यूजीसी की तरफ से कहा गया है कि विश्वविद्यालय छात्रों को परीक्षाओं में स्थानीय भाषाओं में उत्तर लिखने की अनुमति दें। भले ही परीक्षा कार्यक्रम अंग्रेजी माध्यम में हो, और स्थानीय भाषाओं में मूल लेखन के अनुवाद को बढ़ावा देना और शिक्षण-और सीखने की प्रक्रिया के दौरान विश्वविद्यालयों में स्थानीय भाषा का उपयोग करना होगा। विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर प्रोग्राम में प्रवेश परीक्षा- सीयूईटी यूजी और सीयूईटी पीजी भी हिंदी, अंग्रेजी समेत 13 भारतीय भाषाओं में आयोजित होती है। इसमें असमी, बांग्ला,गुजराती, मराठी, कन्नड़, मलयालम, ओडिया, पंजाबी, तमिल, तेलग, और उर्दू शामिल है।
स्थानीय भाषा में विषय समझने के साथ परीक्षा में प्रदर्शन भी सुधरेगा
जगदीश कुमार ने कहा, विद्यार्थी अपनी मातृभाषा या स्थानीय में विषयों को समझने के साथ-साथ परीक्षा में भी बेहतरीन प्रदर्शन कर सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी भारतीय भाषाओं में पढ़ाई की सिफारिश की गयी है। इसी आधार पर विश्वविद्यालयों को स्थानीय भाषाओं में परीक्षा लिखने की अनुमति देने को कहा गया है। कुमार ने कहा, बेशक अभी पाठ्यक्रम का माध्यम अंग्रेजी है, लेकिन जल्द ही विभिन्न भारतीय भाषाओं में भी किताबें तैयार हो जाएंगी। स्थानीय भाषाओं में मूल लेखन के अनुवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसलिए विश्वविद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में स्थानीय भाषा का उपयोग किया जाए। किताब भारतीय भाषाओं में तैयार करने के लिए शिक्षक भी सहयोग कर सकते हैं।
प्रोफेसर कुमार ने कहा, 2035 तक सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 27 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। भारतीय भाषाओं में पढ़ाई, परीक्षा लिखने का विकल्प होने पर अधिक से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा से जुड़ेंगे।
विशेष रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समूहों को लाभ होगा। हालांकि अकादमिक परिस्थितियां अभी भी सामान्य रूप से अंग्रेजी माध्यम केंद्रित बनी हुई हैं। यदि स्थानीय भाषाओं में शिक्षण, अधिगम और मूल्यांकन को सुदृड़ किया जाए तो इससे शिक्षण-अधिगम में छात्रों की सहभागिता बढ़ेगी और सफलता दर में वृद्धि होगी।