प्रबन्धन का प्रसार सिर्फ किताबी ज्ञान के माध्यम से नहीं होता बल्कि उसके लिए छात्र-छात्राओं को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरुप खुद को सजग भी रहना पड़ता है और समाज में आ रहे परिवर्तनों के प्रति जानकारी रखनी पड़ती है। इसी संदर्भ में जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा (उ.प्र.) समय-समय पर विभिन्न विषय-वस्तुओं पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियाँ, कार्यशालाएँ एवं अधिवेशन इत्यादि आयोजित करता रहता है।
इसी श्रृंखला में 15 दिसबंर को विश्वविद्यालय मे प्रबन्धन की द्वि-दिवसीय संगोष्ठी “अ डायनामिक शिफ्ट ऑफ फोर जी-गुड गवर्नेंस एंड ग्लोबल ग्रोथ” का शुभारम्भ हुआ, जिसमें राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शिक्षाविदों व उद्योग जगत के जाने-माने प्रबन्धकों ने संगोष्ठी की शोभा बढ़ायी। यह संगोष्ठी यूएसए की कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के सहयोग से आयोजित की जा रही है।
संगोष्ठी का शुभारंभ भव्य तरीके से उपस्थित गणमान्यों द्वारा सरस्वती वंदना की सुमधुर तान के मध्य मां सरस्वती एवं प्रेरणास्रोत स्व. श्री गणेशी लाल अग्रवाल के चित्रपट पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। संगोष्ठी में भारत सरकार के केन्द्रीय सूचना आयोग में बतौर सूचना आयुक्त कार्यरत आइएएस अधिकारी विमल जुल्का ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
कुलपति प्रो. डी.एस. चैहान, प्रतिकुलपति एवं प्रबन्धन संस्थान के निदेषक प्रो. आनन्द मोहन अग्रवाल, निदेशकगण प्रो0 अनूप कुमार गुप्ता, प्रो0 प्रदीप मिश्रा, परीक्षा नियंत्रक प्रो0 पी0एन0 माहेष्वरी, पॉलीटैक्निक के प्रधानाध्यापक डॉ. विकास कुमार शर्मा और डॉ. दिवाकर भारद्वाज, कुलसचिव श्री अशोक कुमार सिंह तथा विश्वविद्यालय के समस्त विभागाध्यक्ष, कार्यक्रम संचालक, प्रोफेसरगण व शिक्षकों का विषाल जनसमूह के साथ ही साथ प्रतिभागियों के रूप में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और कंपनियों से पधारे शिक्षाविदों और अधिकारियों ने भी भव्य उद्घाटन समारोह में भागीदारी की।
दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदन के पश्चात प्रतिकुलपति व प्रबन्धन संस्थान के निदेशक प्रो0 ए0एम0 अग्रवाल ने समस्त आगन्तुकों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम की सफलता उपस्थित समस्त बुद्धिजीवीगणों द्वारा संगोष्ठी के मूल तत्वों को राष्ट्र हित में सही समय पर उचित प्रकार से प्रयोग किये जाने से ही साबित होती है। प्रो. अग्रवाल ने कहा कि इस द्वि-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत किये जाने वाले गुणवत्तापूर्ण शोध-पत्र निश्चित तौर पर प्रबन्धन शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि संगोष्ठी में पधारे बुद्धिजीवियों के विचारों के माध्यम से निश्चित ही विषय-वस्तु पर हमारी राय और सोच में परिपक्वता आएगी और मुश्किल सवालों के जबाव भी मिलेंगे।
तत्पश्चात संगोष्ठी के सहसंयोजक एवं प्रबन्धन विभागाध्यक्ष (स्नातक) प्रो0 सोमेश धमीजा ने संगोष्ठी की विशय-वस्तु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान परिदृश्य में यह विशय काफी तर्कसंगत है, जब बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ और विष्व के तमाम देष आर्थिक मंदी की मार झेल रहे हैं। ऐसे में यह नितांत आवश्यक हो जाता है कि इनसे उबरने के कारगर उपाय ढूँढें जाएँ और उन पर कार्य किया जाये।
प्रबंधन परास्नातक के विभागाध्यक्ष और संगोष्ठी सहसंयोजक प्रो. विकास त्रिपाठी ने उपस्थित अतिथियों का परिचय कराया और यह उम्मीद जतायी कि आने वाले दो दिनों में इनके माध्यम संगोष्ठी की विशय वस्तु पर तार्किक विचार विमर्श होगा।
श्री जुल्का ने संगोष्ठी के विशय वस्तु पर प्रकाष डालते हुए बताया कि आज के वैश्वीकरण युग में यह बेहद आवश्यक है कि हम परिस्थितयों के अनुरूप खुद को ढालें और अपने ज्ञान और तजुर्वे को दूसरों के साथ ताजा करें। उन्होंने यह भी कहा कि एक विश्व शक्ति के रूप में उभरने के लिए भारत को आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा। जिसके लिए हमें खुद की सहायता करनी होगी। उन्होंने अपने जीवनकाल के कुछ पहलुओं के माध्यम से छात्रों को प्रोत्साहित किया जिन्हें सभी ने मंत्रमुग्ध होकर सुना। उन्होंने कहा कि एक अच्छे विश्वविद्यालय की पहचान उसकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा होती है जो उसके अच्छे शिक्षकों और विद्यार्थियों पर निर्भर करती है और इस मसले में जीएलए विश्वविद्यालय एक मिसाल है।
सेन्टर फॉर ग्लोबल मैनेजमेंट कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी सेनवर्ना डिनो यूएसए को-डायरेक्टर और विशिष्ट अतिथि डॉ. विपिन गुप्ता ने गर्वेनेंस कॉस्ट की बात की। जिसको उन्होंने तीन टुकड़ों में बांटा और उसके माध्यम से मॉडल ऑफ नॉलेज पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने मथुरा कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संस्थानों जैसे अक्षय पात्र, वात्सल्य ग्राम के माध्यम से कुशल प्रशासन पर प्रकाश डाला।