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डिग्री कॉलेजों में स्मार्ट क्लासेज बनाने के नाम पर घोटाला, पढ़िए किस तरह से किया गया खेल!

Wed, 20 Dec 2017 03:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,संजय त्रिपाठी
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घोटाला
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डिग्री कॉलेजों में स्मार्ट क्लासेज बनाने के नाम पर घोटाला सामने आया है। जिस तरह से घोटाला किया गया है, उससे उच्च शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजमी है।
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उच्च शिक्षा विभाग द्वारा की गई 300 कंप्यूटरों की खरीद पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। विभाग के कुछ लोग इसे कांग्रेस के कार्यकाल में हुए लैपटॉप घोटाले जैसा बता रहे हैं, तो उच्च शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों के ऑन रिकॉर्ड आपत्ति उठाने के बावजूद की गई इस खरीद को कई सीधे तौर पर भ्रष्टाचार बता रहे हैं।

डिस्पैच रजिस्टर पर जिस तरह एक खाली पत्रांक मंगाकर इन कंप्यूटरों की खरीद के आर्डर किए गए हैं, इससे तो साफ जाहिर है कि दाल में कहीं तो कुछ काला है ही। यही नहीं, कंप्यूटर बाजार दर से मंहगे हैं, यह एक सवाल हो सकता है, मगर इससे बड़ा सवाल यह है कि जब विभागीय मंत्री ही आवश्यकता जांचे-परखे बिना इस तरह की नई खरीद के पक्षधर नहीं थे तो फिर क्यों यह खरीद की गई?
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बीते माह उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह ने 40 डिग्री कॉलेजों में स्मार्ट क्लासेज बनाने के लिए दो करोड़ दस लाख रुपये के कंप्यूटर खरीद के ऑर्डर किए थे। यह खरीद राशि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के प्रीपेटरी ग्रांट से की गई। गौरतलब है कि इस ग्रांट में रूसा का कामकाज देखने के लिए ऑफिस खर्च, मॉनिटरिंग समेत अन्य कार्यों के लिए किए जाने का प्रावधान है।

सूत्रों के मुताबिक इसके लिए डिस्पैच रजिस्टर में एंट्री किए बगैर एक खाली पत्रांक मंगाया गया, जिस पर खरीद संबंधी आदेश जारी कर दिए गए। दो करोड़ दस लाख के कंप्यूटरों की खरीद की कवायद इतनी गुपचुप हुई कि किसी को भनक तक नहीं लगी।

विभागीय मंत्री ने साफ तौर पर डिग्री कॉलेजों में कंप्यूटरों की खरीद के लिए की थी मनाही

dhan singh rawat - फोटो : file photo
 इसके पूर्व हायर एजूकेशन काउंसिल की बैठक में खुद विभागीय मंत्री धन सिंह रावत ने साफ तौर पर डिग्री कॉलेजों में कंप्यूटरों की खरीद के लिए मनाही की थी। उन्होंने कहा था कि पूर्व में खरीदे गए कंप्यूटरों का उपयोग सुनिश्चित होने के बाद खरीद संबंधी कोई कार्रवाई की जाए।

बावजूद सर्वे चौक स्थित नटराज इंजीनियरिंग सर्विसेज नाम की फर्म को ऑर्डर जारी कर दिया गया। इस गुपचुप खरीद का पता विभाग के मंत्री और अधिकारियों को तब चला जब फर्म की ओर से एक धन्यवाद पत्र सभी को जारी किया गया। पत्र मिलते ही खलबली मच गई।

मालूम चला कि खरीद के लिए जिस पत्रांक पर आदेश जारी किया गया है, उसका जिक्र डिस्पैच रजिस्टर में है ही नहीं। उस पर केवल इतना लिखा गया कि यह पत्रांक अपर मुख्य सचिव के पीएस के नाम जारी है। इस पर अपर सचिव डॉ. रंजीत सिन्हा ने डिस्पैच रजिस्टर में इस पत्रांक को रद्द कर दिया।

यह सूचना जब अपर मुख्य सचिव को मिली तो उन्होंने तत्काल डिस्पैच रजिस्टर मंगाकर इसे खेदजनक करार देते हुए रजिस्टर पर अपनी टिप्पणी दर्ज कर दी। इसी बीच आनन-फानन में डोईवाला, ऋषिकेश और थैलीसैंण समेत दर्जन भर से ज्यादा कॉलेजों में कंप्यूटर सप्लाई भी कर दिए गए। विभाग के सूत्रों की मानें तो तमाम कॉलेजों में इन्हें रखने की जगह तक  नहीं है।
 
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बाजार से करीब 15 हजार रुपये महंगे कंप्यूटर मंगाए

computer
बताया जाता है कि जिस कन्फिगरेशन (विन्यास) के कंप्यूटर मंगाए हैं, वे बाजार से करीब 15 हजार रुपये तक महंगे हैं। इसके अलावा आनन-फानन में हुई इस खरीद प्रक्रिया पर उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने खुद भी सवाल खड़े किए थे, मगर सब कुछ दरकिनार कर दिया गया।  बताया जाता है कि जिस कन्फिगरेशन (विन्यास) के कंप्यूटर मंगाए हैं, वे बाजार से करीब 15 हजार रुपये तक महंगे हैं।

रूसा की ओर से 40 कालेजों के लिए पैसा आया है, जिनसे कॉलेजों में स्मार्ट क्लासेज बनाए जाने हैं। मैंने काउंसिल की बैठक में कहा था कि पूर्व में बनाई गई स्मार्ट क्लासेज का अध्ययन कर लें और खरीदे गए कंप्यूटरों को उपयोग सुनिश्चित कर लें। उसके बाद ही अगली खरीद की जाए। मैं अभी हैदराबाद में हूं, लौटकर पूरे मामले की जानकारी करता हूं। किसी भी प्रकार की अनियमितता मिली तो सख्त कार्रवाई होगी।
- धन सिंह रावत, राज्य मंत्री (उच्च शिक्षा)

ई-टेंडर के जरिये खरीद की गई है। अपर सचिव और नोडल अफसर बेवजह आपत्ति कर रहे थे। मैंने विभागीय मंत्री को सारी बात स्पष्ट करने के बाद ही खरीद के ऑर्डर जारी किए थे।
- डॉ. रणवीर सिंह, अपर मुख्य सचिव
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