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GPSC: सरकारी नौकरी के लिए 26 साल लड़ी कानूनी जंग, अब जीत तो मिली पर नौकरी फिर हाथ से गई

Fri, 07 Apr 2023 05:54 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

गुजरात के दो उम्मीदवारों ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया के दौरान हुए भेदभाव के खिलाफ 26 साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, इसके बाद जब वे केस जीत भी गए तो भी नौकरी उनके हाथ नहीं आई।
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Gujarat High Court
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विस्तार
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गुजरात के दो उम्मीदवारों ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया के दौरान हुए भेदभाव के खिलाफ 26 साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, इसके बाद जब वे केस जीत भी गए तो भी नौकरी उनके हाथ नहीं आई। हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई के दौरान, गुरुवार को याचिकाकर्ताओं जगदीश धनानी और केवी वडोदरिया को पता चला कि उन्होंने 26 साल पहले कृषि उप निदेशक के पद के लिए गुजरात लोक सेवा आयोग (जीपीएससी) की परीक्षा पास कर ली थी, मगर उम्र के कारण अब उन्हें नौकरी नहीं दी जा सकती।   

 

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गुरुवार को हुई आखिरी सुनवाई

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एजे देसाई और जस्टिस बीरेन वैष्णव की खंडपीठ ने कहा कि यह कवायद अब अकादमिक है क्योंकि याचिकाकर्ता सेवानिवृत्ति की उम्र के करीब हैं और अपील के लंबित रहने के दौरान उन्होंने पहले ही कहीं और रोजगार ले लिया था। अदालत ने पूछा- आपको अब क्या लाभ होगा? कुछ भी नहीं। आपको अभी नियुक्त नहीं किया जा सकता है। उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि हम इसका निपटान कर रहे हैं। आप 58 साल के हैं और दूसरा याचिकाकर्ता कहीं और काम कर रहा है।  

 

चार उम्मीदवारों ने दी थी GPSC के फैसले को चुनौती

चार याचिकाकर्ता जगदीश धनानी, केवी वडोदरिया, पीडी वेकारिया और वीए नंदनिया ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जब जीपीएससी ने उन्हें उप निदेशक कृषि के पद के लिए 1997 में ली गई भर्ती परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी थी। उस समय, GPSC ने ऊपरी आयु सीमा 30 वर्ष निर्धारित की थी। चूंकि याचिकाकर्ता पहले ही आयु सीमा-पार कर चुके थे, इसलिए आयोग ने उनके आवेदनों को खारिज कर दिया था। 

 

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हाईकोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में मांगे थे परिणाम

उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, तो अदालत ने 1997 में एक अंतरिम आदेश पारित किया और आयोग को निर्देश दिया कि उन्हें परीक्षा और साक्षात्कार के लिए उपस्थित होने दिया जाए और परिणाम सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत किया जाए।

उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, याचिकाकर्ता भर्ती प्रक्रिया के लिए उपस्थित हुए और उनके परिणाम अदालत में प्रस्तुत किए गए। जब मामला गुरुवार को अंतिम सुनवाई के लिए आया तो पीठ ने जीपीएससी के वकील चैतन्य जोशी को एक सीलबंद लिफाफा खोलने का आदेश दिया, जिससे पता चला कि धनानी और वडोदरिया ने परीक्षा में सफलता हासिल कर ली है। 

 
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